जो बीत गई सो बात गई
जीवन में एक सितारा था
माना वह बेहद प्यारा था
वह टूट गया तो टूट गया
अंबर के आनन को देखो
कितने इसके तारे टूटे
कितने इसके प्यारे छूटे
जो छूट गए फिर कहाँ मिले
पर बोलो टूटे तारों पर
कब अंबर शोक मनाता है - हरिवंश राय बच्चन
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती
लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है
चढ़ती दीवारों पर सौ बार फिसलती है
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है - सोहनलाल द्विवेदी
अग्निपथ! अग्निपथ! अग्निपथ!
वृक्ष हों भले खड़े
हों घने, हों बड़े
एक पत्र-छाँह भी
माँग मत, माँग मत, माँग मत
अग्निपथ! अग्निपथ! अग्निपथ! - हरिवंश राय बच्चन