अमेरिका में सफल टेक्नोलॉजी करियर और रियल एस्टेट कारोबार छोड़कर जनसेवा के लिए भारत लौटे भाजपा नेता अनंतन अय्यासामी की भावुक पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। तमिलनाडु के तेनकासी जिले के रहने वाले अय्यासामी पहले इंटेल कंपनी में इंजीनियर थे। बाद में उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया और भाजपा से जुड़ गए।
अनंतन अय्यासामी को भाजपा ने 2026 विधानसभा चुनाव में वासुदेवनल्लूर (एससी) सीट से उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, उन्हें डीएमके के ई. राजा से करीब 6500 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। चुनाव हारने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखी, जिस पर लोगों की काफी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
अय्यासामी ने लिखा कि पिछले चार वर्षों में उन्होंने गांवों में विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए और अपना पूरा समय लोगों की सेवा में लगाया। उनका सपना करीब एक लाख युवाओं को रोजगार से जोड़ने का था।
उन्होंने बताया कि बीते चार सालों में गांवों में बस स्टॉप बनवाए गए, तालाबों का जीर्णोद्धार कराया गया, छात्रों की पढ़ाई में मदद की गई और मेडिकल कैंप व करियर वर्कशॉप आयोजित कराई गईं। उन्होंने कहा कि इसमें सिर्फ पैसा ही नहीं, बल्कि परिवार के साथ बिताने वाले अनमोल पल भी शामिल थे।
अय्यासामी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि चुनाव के दौरान उसी गांव ने ऐसे उम्मीदवार को चुना, जो पांच साल में मुश्किल से वहां दिखाई दिया। उन्होंने कहा, "आखिरकार, चुनाव के एक हफ्ते के पैसों ने चार साल की सच्ची सेवा को हरा दिया।"
उन्होंने बताया कि चार साल पहले उन्होंने अपनी 12 साल की बेटी से कहा था कि वह अमेरिका छोड़कर भारत लौट रहे हैं ताकि राजनीति और जनसेवा में काम कर सकें। हार के बाद उनकी बेटी ने वीडियो कॉल पर पूछा, "अप्पा, क्या अब आप मुझे बता सकते हैं कि राजनीति वास्तव में क्या होती है?"
अय्यासामी ने लिखा कि जीवन में पहली बार उनके पास अपनी बेटी के इस सवाल का कोई जवाब नहीं था। उनकी इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने समर्थन जताया। एक यूजर ने लिखा, "निष्काम भाव से काम करते रहिए, आपका दिन जरूर आएगा।" वहीं दूसरे यूजर ने कहा, "राजनीति एक कड़वी सच्चाई है, यहां सब कुछ सही करने के बाद भी जीत जरूरी नहीं होती।"
#BJP #AnanthanAyyasamy #TamilNadu
अकबर की औलादें महाराणा प्रताप से पंगा ले रही थीं, मिल गया सबक।
हापुड़ के देहरा में महाराणा प्रताप की जयंती पर शोभा यात्रा निकल रही थी, अकबर की औलादों ने छत से पथराव शुरू कर दिया। बस फिर क्या था हिंदुओं ने छतों पर चढ़ कर पत्थरबाजों को कूट दिया।
आदरणीय @Nishantjdu जी,
आप स्वास्थ्य मंत्री बने हैं, या बनवा दिए गए हैं, वह आप जानें, परंतु आपके अपने स्वास्थ्य को देख कर मुझे चिंता होती है। आपके कंधे झुके हुए, चेहरा कांतिहीन, स्वर धीमा और चाल कहीं से भी आत्मविश्वास का परिचय नहीं देती।
आप लम्बे समय तक राजनीति से दूर रहे। आपके पिता जी ने भी आपको दूर ही रखा। संभवतः, इसका कोई उचित कारण रहा होगा। आपने पहले भी कहा था कि आप पहले सीखेंगे, समझेंगे, फिर आएँगे, पर ये क्या हुआ?
आप सब कुछ हैं, पर नेता नहीं हैं। यह आप जानते हैं, यह आपके पिता भी जानते थे। आप एक साधारण नागरिक हैं, जिनके पिता मुख्यमंत्री थे। अब आपको पार्टी के लोगों ने बहला कर, स्वास्थ्य मंत्री बना दिया है।
यह आपका सम्मान नहीं है। किसान को शिक्षक बनाना, शिक्षक को डॉक्टर बनाना, डॉक्टर को प्रशासक बनाना, प्रशासक को कुछ और बनाना, उनका सम्मान नहीं होता, बल्कि उन्हें असफल होते देखने की एक कामना का क्रियान्वयन मात्र होता है।
अब आपके हितैषी, आपको ले कर आर्टिकल छपवाएँगे। हर दिन आपके चेहरे से मीडिया के माइक चिपकेंगे। आप न बोले पाएँगे, न बचाव कर पाएँगे क्योंकि आप भी जानते हैं, स्वास्थ्य मंत्रालय आपने चुना नहीं था।
बिहार का स्वास्थ्य विभाग बहुत बेकार स्थिति में है। आप चाहें तो पार्टी से जुड़े रह कर, राजनीति को समझें, पर मंत्रालय ले कर बिहार के साथ उपहास मत होने दीजिए। आप सज्जन व्यक्ति हैं, पर मंत्री बनने योग्य नहीं हैं।
यहाँ स्वास्थ्य विभाग को एक अच्छा मंत्री चाहिए जो कार्य कर सके, वह नहीं जिसके पीछे तीन लोग खड़े रहें। आप अन्य क्षेत्रों में अच्छे होंगे। राजनीति आपको मानसिक रूप से बर्बाद कर देगी, जो आपके कुछ ‘हितैषी’ चाहते भी होंगे।
विपक्ष आपको ले कर विषैला होता रहेगा, वह मीडिया वालों को भेजेगा, आपमें हर दिवस ग्लानि का भाव उपजेगा, हर दिन आप परेशान होंगे।
बिहार ने आपके पिता को बहुत कुछ दिया है। आप बिहार को अपना त्यागपत्र दे दीजिए।
नमस्कार
एक सामान्य बिहारी
@hpgasservices@CMOfficeUP@dmsid1
LPG Order ID 1260974600029158
Booked date 16/4/26
अभी तक डिलीवर नही हुई, क्या नियमो व सर्विस के मामलों में सिद्धार्थनगर पूरे प्रदेश से कटा हुआ है,यहा होम डिलीवरी नही हो रही, बाकी प्रदेश के तरह
गौतम खट्टर के बाद देश के जाने माने लेखक
पवन विजय जी पर गोवा यूथ कांग्रेस ने FIR करवाया है ।
इन्होंने किताबे दिखाकर साक्ष्य के साथ गौतम खट्टर ने जो बोला उसको जस्टिफाई किया था ।
अब गोवा की BJP पुलिस बहुत शख्त है इनको जरूर गिरफ्तार करेगी ।
ये प्रचंड मोदी समर्थक है ।
अब बस खिलजी औरंगज़ेब को कुछ कहने पर FIR होने लगे तो पूरा देश ऋणी रहेगा सेकुलरिज्म का 🙏🏻
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Booked date 16/4/26
अभी तक डिलीवर नही हुई, क्या नियमो व सर्विस के मामलों में सिद्धार्थनगर पूरे प्रदेश से कटा हुआ है,यहा होम डिलीवरी नही हो रही, बाकी प्रदेश के तरह
मनुस्मृति औरंगजेब के समय में लिखी गई थी, ये इस मूर्ख का मानना है। गौतम बुद्ध ‘क्षत्रिय’ कुल में जनमे थे, क्या यह किसी बौद्ध ग्रंथ में नहीं है? क्या ललितविस्तर सूत्र (तीसरी शताब्दी) में यह नहीं लिखा है:
“बोधिसत्व निम्न कुलों (जैसे चांडाल, बांसुरी या गाड़ी बनाने वालों, या मिश्रित जातियों) में जन्म नहीं लेते। वे केवल दो उच्च कुलों—ब्राह्मण या क्षत्रिय—में ही जन्म लेते हैं। जब संसार में ब्राह्मण कुलों का सम्मान/प्रभुत्व अधिक होता है, तो बोधिसत्व ब्राह्मण कुल में जन्म लेते हैं। जब क्षत्रिय कुलों का प्रभुत्व होता है, तो क्षत्रिय कुल में। गौतम बुद्ध के समय क्षत्रिय कुल प्रमुख था, इसलिए उन्होंने वहाँ जन्म लिया।”
वस्तुतः, बौद्ध ग्रंथों में जातिवाद चरम पर है। जहाँ हिन्दू ग्रंथों में ब्राह्मणों को सर्वकालिक उच्च स्थान प्राप्त है, बौद्ध ग्रंथ बताते हैं कि भविष्य में जो भी जाति वर्चस्व में होगी, बुद्ध उसी में उत्पन्न होंगे! स्पष्ट कहा गया है कि बोधिसत्व निम्न कुलों में जन्म ले ही नहीं सकते! इससे बड़ा जातिवाद क्या होगा?
कुछ दिन में भाजपा के इस मंडलीकरण की कृपा से हम लोग विष्णु को बुद्ध का अवतार मानने लगेंगे। ऐसे ही लोग जब सरकार को सलाह देते हैं, तब यूजीसी जैसी बकलोली निकल कर आती है।
आइटी सेल वाले इसे भी डिफेंड कर लेंगे और कहेंगे उनके परदादा तो बौद्ध ही थे, बाद में हिन्दू बने। दिलीप मंडल भाजपा में घुस कर, सरकारी पैसों पर, वामपंथी नवबौद्ध अजेंडा चला रहा है। भाजपा का सूचना तंत्र नपुसंकों की तरह ताली पीट रहा है।
1. समिति का चूरन नहीं चाहिए, वापस लो, संशोधित करो
2. स्पष्ट लिखो कि किसी पर भी जातीय टिप्पणी, राजनैतिक नारेबाज़ी, दीवारों पर ग्रैफ़िटी पर समान दंड होगा, कोई भी 'विशेष कर' जैसे शब्द नहीं
3. जाँच होने तक सुरक्षा दो, बच्चे निलंबित न किए जाएँ
4. कैंपस में पुलिस नहीं चाहिए, जब तक अपराध जघन्य/गंभीर ना हो
5. झूठा केस बनाने वाले को कॉलेज से निकाला जाए, आर्थिक दंड और जेल (क्योंकि उद्देश्य भविष्य की हत्या होती है)
ज्ञान में कमी नहीं होनी चाहिए। गवई जी नवीं पंक्ति में कहते हैं कि 'संस्था उन्हें प्रश्न करे जिनके पास शक्ति है', और अंतिम पंक्ति में कहते हैं कि '(प्रजातंत्र को प्रयोग में लाने के लिए) हमें साहसिक कृत्य करते रहना चाहिए।'
मुझे यह पूछना है कि शक्ति तो सुप्रीम कोर्ट के पास असीम है, तो उन पर प्रश्न उठाने पर SC/ST एक्ट से ले कर अवमानना क्यों? न्यायाधीश या न्यायालय क्या प्रजातंत्र का हिस्सा नहीं जिनकी आलोचना का साहसिक कृत्य नहीं होना चाहिए?