सुबह समाधि आसन आप 2-3 मिनट ज़रूर करिए। पादपश्चिमोत्तानासन का भाई है समाधि आसन। इससे आपका शरीर तंदुरुस्त रहेगा,मन के संकल्प-विकल्प कम होंगे,प्राणोत्थान में मदद मिलेगी,सुषुम्ना का द्वार खुलेगा और चंद समय में आप चित्त के प्रसाद को पाने के अधिकारी हो जाएँगे।#RishiDarshan#AsharamBapu
"ब्रह्मज्ञान के सत्संग की दिव्य महिमा"
ब्रह्मज्ञान का सत्संग सुनने को जो चार कदम चलकर आते हैं, एक-एक कदम यज्ञ करने का फल देता है। श्रृद्धा से बैठते हैं तो भक्तियोग होता है, सुनते हैं तो ज्ञानयोग का फल होता है और जब नाम सुमिरण करके आनंदित होते हैं, तो महाराज जपयज्ञ का फल फलित होता है।
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देसी गाय का दूध पीते हो, तो जितना दूध उससे आधा पानी डाल दो और सोना-चांदी जो भी घर में गहना, बर्तन है, उसमें डालो, उबालो, वह दूध यौवन शक्ति देने वाला है। बुढ़ापे को दूर करने वाला है। लाखों रुपए की दवाई, उतना काम नहीं करेगी, जितना उससे काम होगा। #AsharamjiBapu
कोई इलाज़ काम नहीं करता तो ये पाप का प्रभाव है इसलिए रोग नहीं मिटता। वात, पित, कफ के दोष से भी रोग होता है, प्रकृति के नियम उल्लंघन करने से भी रोग होता है और दूसरा पाप के प्रभाव से जो रोग होता है वो मिटता नहीं है।
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हनुमान जी के पास अष्ट सिद्धियां थी — अणिमा छोटे हो जाए, गरिमा बड़े हो जाए, लघिमा — इस प्रकार की सिद्धियां थी, अष्ट सिद्धि, नवनिधि थी। फिर भी हनुमान जी श्री राम के शरण गए, बिन शर्तीं शरणागत ले ली। राम कथा सुनबे को रसिया और राम काज बिनु कहां विश्रामा — ये हनुमान जी के दो मूल मंत्र थे।
तो जिसे आत्म ज्ञान पाना है, जिसे पूर्ण गुरु कृपा भई, पूर्ण गुरु का ज्ञान आसुमल से हो गए साई आशाराम — वो तत्व पाना है, तो उसके देवी कार्य के बिना विश्राम क्या? जो गुरु के देवी कार्य को खोज नहीं पाता, कर नहीं पाता, और गुरु के देवी अनुभव को क्या खोजेगा, क्या करेगा?
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भगवान की भक्ति और प्रीति मिल गई तो आप राजाओं के राजाओं से भी ऊंचे सुख के धनी हो गए। आप देवताओं से भी सम्मानित होने वाले पद में पहुंच जाएंगे। भागवत प्रीति बहुत ऊंची चीज है।
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तुलसीदास ने थर्मामीटर दे दिया सबको, जानिहे जीव तब जागा, हरि पद रुचि, विषय विलास विरागा।
भगवान में रुचि हो जाए और विषय विलास से वैराग हो जाए, तो आप जगे हैं। उपनिषद कहती हैं,
उत्तिष्ठ जागृत प्राप्य वरान्निबोधत्। उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः।
उठो, जागो और श्रेष्ठ पुरुषों के पास जाओ।
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जिस रावण का सब उजड़ गया उस रावण के पास लक्ष्मण गए। लक्ष्मण पहले गए, श्री राम जी के पास कि रावण का मृत्यु हुआ, अब प्रभु उत्सव मनाते होंगे, प्रसन्न हुए होंगे। तो श्री रामचंद्र जी थोड़े उदास महसूस हुए। लक्ष्मण बोलते हैं प्रभु आज तो उत्सव का दिन है, आप क्यों उदास हो? राम जी कहते हैं कि धरती से एक योद्धा, एक पंडित आज इस धरती से अलविदा हुआ। बोले कौन योद्धा पंडित। बोले लंकापति रावण। उस-उसके लिए प्रभु आप लंकापति रावण योद्धा और पंडित कह रहे हैं, वो तो महा। जी ऐसा था। राम जी कहते हैं कि परस्त्री हरण के बड़े अपराध के सिवा बाकी उसमें गुण भी तो थे। शत्रु में भी गुण देखने वाले श्री रामचंद्र भगवान की जय। और शत्रु भी जिनकी मृत्यु के समय घोर शत्रुता, जीवन भर शत्रुता रखने वाले रावण मृत्यु के समय जिनकी प्रशंसा किए बिना नहीं रहते हैं, ऐसे रामचंद्र जी का अवतरण दिवस राम नवमी है। #AsharamjiBapuQuotes #RamNavami
कैंसर की बीमारी हो तो 10 ग्राम तुलसी का रस और 8-10 ग्राम शहद। सुबह, शाम, दोपहर को ताजा दही 50 ग्राम और तुलसी का रस उतना ही। कैंसर की बीमारी मिटता है। जय राम जी की।
तुलसी के पत्ते की माला पहनाने से भी कैंसर के कीटाणु नष्ट होते हैं। मुंह में तुलसी का पत्ता पड़ा रहे, हर दो घंटे में। लेकिन दूध और तुलसी एंटी है। दूध के साथ तुलसी नहीं लेना, कभी।
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निंदा के समान तो पाप नहीं है। दूसरा ये , सुनते फिर भी निंदा के बिना नहीं रहा जाता। पर निंदा सम अघ न खगेसा, पराई निंदा के समान और बड़ा भारी पाप नहीं है। #SantShriAsharamjiBapu
एक भी अंग्रेजी रंग निर्दोष नहीं है सारे रंगों में कोई न कोई बीमारी पैदा करने की दुष्टता है। मैंने कहा कि अब इतनी बड़ी टक्कर लेना #हिंदू समाज को बचाने के लिए... रंगों से #Holi नहीं खेलो तो कोई बात मानेगा नहीं, मैंने केसुडे के फूलों से #होली खेलना चालू कर दिया।
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शत्रुता पर विजय पाने का उत्सव, 'एक में सब, सबमें एक' उस रंगरेज साहब की प्रीति जगानेवाला उत्सव है होली ।
साहब है रंगरेज चुनार मोरि रंग डारी ।
स्याही रंग छुड़ाय के दियो भक्ति को रंग ।।
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ये होलीकोत्सव बड़ा प्राचीन है, पुराणों, शास्त्रों और लोकगीतों में इसकी भारी महिमा है। सूर्य के तीखे किरण झेलने की ऊर्जा हममें बनी रहे इसलिए पलाश के फूलों से होली खेलना, वर्षभर खुजली, दाह, मंदाग्नि आदि बीमारियों से टक्कर लेने की जीवनीशक्ति विकसित होती है।
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#holi
ये होली को उत्सव प्रह्लाद के जीवन से भी जुड़ा है, रघुराजा के कर्म से भी जुड़ा है, नारद जी के सत्संग से भी जुड़ा है, ऋतु परिवर्तन से भी जुड़ा है। और इस होली का उत्सव का सदुपयोग करने से आपकी आयु, आरोग्य में, स्वास्थ्य में वृद्धि होगी — इससे भी जुड़ा है।
भारतीय संस्कृति के जो भी उत्सव हैं, या तो ऋतु परिवर्तन से जुड़े हैं, नया अन्न आने से जुड़े हैं। एक ऋतु जा रही है और दूसरी आ रही है — गांठ संधि, गांठ संधि काल से जुड़े ये बड़े रहस्यमय उत्सव हैं।
इनका आदर से और विधि से पालन करने से आदमी स्वस्थ रहता है, सुखी रहता है, सम्मानित रहता है, और सत्-चित्-आनंद स्वरूप ईश्वर के स्वभाव में, अपना कामी, क्रोधी, लोभी, मोही, अहंकारी, चिंतित और जन्म-मरणने वाले तुच्छ स्वभाव का त्याग करके, अपने परम सुहृदय के स्वभाव में घुल-मिल जाने वाला ये संदेश देता है — होली को उत्सव।
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आप स्वास्थ्य की रक्षा करना चाहें तो पलाश के फूलों से होली खेलिए, अपने रोमकूपों को स्वस्थ कर देना, केमिकल रंग से बचना। इन दिनों में कीर्तन यात्रा निकालना हितकारी है। कूदना-फांदना हास्य, विनोद, हरि बोल, हरि बोल करते हुए कूदें-फांदें कीर्तन यात्रा निकाले।
#AsharamjiBapuQuotes#holi
ईर्ष्या से, द्वेष से, घृणा से और काम, विकार और विलास से आदमी का पूर्व संचित पुण्य क्षीण हो जाता है। योग्यताएं नष्ट हो जाती हैं। संयम से, सदाचार से, सुमिरन से, ध्यान से और चित्त की विश्रांति से आदमी का पुण्य और योग्यता, शक्तियां उभर जाती हैं। ये नियम साधारण से साधारण व्यक्ति और बड़े से बड़े योगी को भी लागू पड़ते हैं। मैंने तो कथा में ये भी सुना है कि मैले-कुचैले कपड़े, झूठे हाथ और मुंह हों, और दांत भी गंदे हों — ऐसा अगर चक्रपाणी विष्णु करे, तो उसको भी लक्ष्मी छोड़कर चली जाएगी। जय राम जी की।
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