We are student of Indian culture and philosophy.
We will try to collect and collate the work of the personalities, who has contributed intellectually for Hindus
1.We are student of Indian culture and philosophy.
2.We will try to collect and collate the work of the famous personalities, who has contributed intellectually for Hindu Samaj
3.We are not associated with any political party / movement.
आदि गुरु ग्रन्थ साहिब कि महिमा
सर्व शक्तिमान परमात्मा के भेद को कोई नहीं जानता मैंने देखा है उसका दर्शन किया है। हे सर्व शक्तिमान परमात्मा ! आप की सुन्दर आँखें हैं। सुन्दर दांत हैं। आप का नाक भी अति सुन्दर है। आप के बाल चमकीले लम्बे हैं। आप का शरीर https://t.co/XeSusrXBfv
हम हिन्दू क्यों
मैं देश के सभी लोगों से हाथ जोड़कर प्रार्थना करता हूँ - विनती करता हूँ कि वे हिन्दू बनें ! लेकिन मेरी बातों कागलत अर्थ मत लगाइये ! मैं किसी से यह नहीं कह रहा ह कि वह अपना धर्म परिवर्तित कर ले ! मैं किसी मुसलमान से यह नहीं कह रहा कि वह https://t.co/GcAnSsmGxM
आदि गुरु ग्रन्थ साहिब कि महिमा
सर्व शक्तिमान परमात्मा के भेद को कोई नहीं जानता मैंने देखा है उसका दर्शन किया है। हे सर्व शक्तिमान परमात्मा ! आप की सुन्दर आँखें हैं। सुन्दर दांत हैं। आप का नाक भी अति सुन्दर है। आप के बाल चमकीले लम्बे हैं। आप का शरीर https://t.co/XeSusrXBfv
''आज लखनऊ जिला जेल में यह डायरी प्राप्त हुई। चार डायरियाँ थी, तीन बँट गईं, एक का इस्तेमाल मैं करूँगा।'' यह पंक्तियाँ गणेशशंकरविद्यार्थी ने 31 जनवरी 1922 को लिखी थीं।
उक्त जेलयात्रा विद्यार्थीजी को, जनवरी 1921 में रायबरेली के एक ताल्लुकेदार सरदार https://t.co/H0hWShftQX
हजारीप्रसाद द्विवेदी (19 अगस्त 1907 - 19 मई 1979) हिन्दी निबन्धकार, आलोचक और उपन्यासकार थे। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म श्रावण शुक्ल एकादशी संवत् 1964 तदनुसार 19 अगस्त 1907 ई० को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के आरत दुबे का छपरा, ओझवलिया नामक गाँव https://t.co/KIokUE33j1
पंडित गणेशशंकर 'विद्यार्थी' (1890 - 25 मार्च 1931), हिन्दी के पत्रकार एवं भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के सिपाही एवं सुधारवादी नेता थे।
बलिदान केवल बलिदान' - चित्तौड़ की स्वतंत्रता देवी बलिदान चाहती है। बादल उमड़े थे, बिजलियाँ कड़की थीं और घोर अंधकार छ https://t.co/dqfAhw8Ob0
राधाकुमुद मुखर्जी (१८८४ - १९६४) भारतीय इतिहासकार तथा प्रसिद्ध राष्ट्रवादी थे।
वे समाजशास्त्री राधाकमल मुखर्जी के भाई थे। भारत सरकार ने उन्हें सन १९५७ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। हिन्दू सिविलाइजेशन उनकी प्रमुख पुस्तक है। इसका हिंदी अनुवाद https://t.co/aDzcNYK3ad
भारतीय दर्शन के छः प्रकारों में से सांख्य भी एक है जो प्राचीनकाल में अत्यंत लोकप्रिय तथा प्रथित हुआ था। यह अद्वैत वेदान्त से सर्वथा विपरीत मान्यताएँ रखने वाला दर्शन है।
इसकी स्थापना करने वाले मूल व्यक्ति कपिल कहे जाते हैं। 'सांख्य' का शाब्दिक अर्थ है https://t.co/Hb5cZJjCmA
भारत बहुत दिनों तक इंग्लैंड का उपनिवेश रहा है। सन 1600 ई में स्थापित यह कम्पनी मुगल शासन उत्तराधिकार बनी। प्रारंभ का उद्देश्य व्यापार करना तथा मुंबई कोलकाता और मद्रास के बंदरगाह से होकर शेष भारत में इसका संपर्क रहता था।
धीरे-धीरे कंपनी की प्रादेशिक मौ https://t.co/BIaKzYRJ7U
जेबी कृपलानी के गांधी से सम्बन्ध अच्छे थे लेकिन कभी-कभी दोनों के रिश्तों में विरोधाभास भी दिखायी देता है।
वह चम्पारन सत्याग्रह में गांधी के साथ रहे लेकिन असहयोग आंदोलन में पीछे हट गए। उसके बाद जेबी कृपलानी 1920 से 1927 तक ''गुजरात विद्यापीठ'' में https://t.co/asYXibzLdM
पण्डित बनारसीदास चतुर्वेदी (२४ दिसम्बर, १८९२ -- २ मई, १९८५) प्रसिद्ध हिन्दी लेखक एवं पत्रकार थे। वे राज्यसभा के सांसद भी रहे।
उनके सम्पादकत्व में हिन्दी में कोलकाता से 'विशाल भारत नामक हिन्दी मासिक निकला। पं॰ बनारसीदास चतुर्वेदी जैसे सुधी चिंतक ने ही https://t.co/8Pzqnh33i1
बाजपेयी जी सच्चे देशभक्त थे। जलियांवाला काण्ड से वे बेहद आहत हो उठे, उनकी राष्टीय चेतना मचल उठी और तब "अमृत में विष' नामक एक गद्य काव्य लिख डाला। "तरंगिणी' भी राष्ट्रीय भावों की सजीव झाँकी है जो बहुत ही प्रशंसित हुई।
अपने अद्भुत कर्मठ व्यक्तित्व एवं https://t.co/4UoM4txG9i
भारतीय भाषा विज्ञान लिखकर किशोरी लाल वाजपेयी ने हिंदी के स्थापित मठाधीशों को कड़ी चुनौती थी । "हिंदी शब्दानुशासन" के बाद "भारतीयभाषा विज्ञान" ने हिंदी जगत में तहलका मचा दिया था । सुप्रसिद्ध भाषा विज्ञानी डॉ सुनीति कुमार ने वाजपेयी जी को भेजे बधाई पत्र https://t.co/Ag59sYU95B
किशोरीदास वाजपेयी (अंग्रेज़ी: Kishori Das Vajpeyi, जन्म: 1898 - मृत्यु: 1981) हिन्दी और संस्कृत के सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं व्याकरणाचार्य थे।
संस्कृत और हिन्दी के विद्वान, व्याकरण के पंडित, हिन्दी के आधुनिक पाणिनी की तरह जिन्हें डॉ. https://t.co/g1eyKUhu0G
वासुदेवशरण अग्रवाल के कृतित्व एवं तज्जनित यश का अमर आधार उनके द्वारा संस्कृत एवं हिन्दी के अनेक ग्रन्थों का किया हुआ सांस्कृतिकअध्ययन एवं व्याख्या है।
संस्कृत में कालिदास एवं बाणभट्ट के ग्रन्थों से लेकर पुराण एवं महाभारत तक तथा हिन्दी में विद्यापति के https://t.co/Nw01eg90tO
हिंदी गद्य के लोकविश्रुत रचनाकार वासुदेव शरण अग्रवाल जी का जन्म उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में स्थित खेड़ा नामक ग्राम में 6 अगस्त,1904 ई. https://t.co/YAzcod8f3J
भगवतशरण उपाध्याय (१९१० - १९८२) शिक्षाविद तथा हिन्दी साहित्यकार थे।
भगवतशरण उपाध्याय का जन्म 1910 ई0 को उजियारपुर, जिला- बलिया (उ0प्र0) में हुआ। निधन 12 अगस्त 1982 ई0 को हुआ। उपाध्याय जी ने संस्कृत, हिन्दी साहित्य, इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्त्व का गहन https://t.co/HxXp6gByXm
श्यामलदास का जन्म आषाढ़ कृष्ण ७ विक्रम संवत १८९३ को राजस्थान के ढोकलिया ग्राम में हुआ। इनके तीन भाई और दो बहिनें थीं।
इनका अध्ययन घर पर ही हुआ परम्परा से प्राप्त प्रतिभा तो इनमें भरपूर थी। फारसी और संस्कृत में उनका विशेष अध्ययन हुआ। इनका प्रथम विवाह https://t.co/wUPIhdtWdL