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एक शरीफ औरत भले ही कितनी भी गर्म हो जाए पर जैसे ही उसको अहसास होता है कि जालिम का रस बहने वाला है तो वो उसको यही बोलती हैं
"उफ्फ जान अंदर मत छोड़ना आह"
जब हथियार दमदार हो जब वो पेलता है तो हिलते हैं कबूतर मेरे तो मैं रंग नही देखती बुला लेती हूं
वो आकर बोलते हैं "कु*या बन"
एक संस्कारी औरत सब कुछ सह सकती है, पर अपनी ढलती जवानी की बेइज्जत्ती नहीं सह सकती।
इस���िए वह हर उस मर्द को मौका देने लगती है जो उसको लगता है कि उसकी जवानी को निचोड़ सके।
एक औरत पेट की भूख सहन कर सकती है लेकिन जब जिस्म प्यासा हो तो उससे बर्दाश्त नहीं होता ��िर वह जाति धर्म और रिश्तों की ज��जीर तोड़कर किसी अंजान या गैर मर्द के साथ अपनी हसरतों को पूरा करती है अपनी पर्सनल इच्छाओं को उस गैर मर्द के साथ शेयर करके जिस्मानी सुख को भोगती है
एक औरत पेट की भूख सहन क��� सकती है लेकिन जब जिस्म प्यासा ह��� तो उससे बर्दाश्त नहीं होता फिर वह जाति धर्म और रिश्तों की जंजीर तोड़कर किसी अंजान या गैर मर्द के साथ अपनी हसरतों को पूरा करती है अपनी पर्सनल इच्छाओं को उस गैर मर्द के साथ शेयर करके जिस्मानी सुख को भोगती है
इतनी शिद्दत से कुत्ता हड्डी नही चूसता जितनी शिद्दत से शादी��ुदा 🧡औरत 💚 मर्द का हथियार चूसती हैं .. पति के घर से निकलते ही, प्यासी औरत मुहल्ले के ज़ालिम मर्दों का हथियार लेने के लिए उनकी मुफ्त की घोड़ी बनने में संकोच नही करती
बचपन से ही मूसल का चस्का लग जाने से यही होता है। जिस्म गदरा जाता है इन घोड़ियों का। और फिर इनको सम्हालना किसी छोटी मुमफली🤏 वाले के बस की बात नही रहती। तो ये अपनी गोश्त जैसी लटकती चर्बीदार जिस्म को एक कसाई सांड के हवाले करती है। जिसे हम रौंद कर इन्हे इनकी औकात दिखाते हैं। 💚💚😈
पठान का काला घोडा, जिस संस्कारी की तरफ निग़ाह कर गया...!
कुँवारी हो या रां•ड, सब के भोस•ड़े तबाह कर गया...!
मैं वो जालिम वहसी दरिन्दा हूँ जिसकी बाँहों मैं आई संस्कारी औरत किसी और घोड़े की तरफ कभी आकर्षित नहीं होती क्योंकि चरमसुख का दूसरा नाम सिर्फ पठान...!!
जुम्मा मुबारक मेरी संस्कारी दासियों।
आज कल की नई नवेली संस्कारी औरतों को ये तो पता है कि उनको हर जुम्मे को अपने करीबी सब मुस्लण्ड मर्दो को चूसकर उसका वीर्यपान करना है लेकिन ऐसा क्यों करना है ये नहीं पता।
क्या कोई संस्कारी इस सवाल का सही जवाब दे सकती है?