किसी निहत्थे को पुलिस के द्वारा गोली मार दिया जाना कानून को खत्म कर देना है ..
पुलिस द्वारा किए गया फर्जी एनकाउंटर (Fake Encounter) या न्यायेतर हत्या (Extrajudicial Killing) लोकतांत्रिक व्यवस्था, मानवाधिकार और कानून के शासन (Rule of लॉ) का खुलेआम उल्लंघन है । माननीय सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी समय-समय पर अपनी रुलिंग्स के माध्यम से इस प्रकार के एनकाउंटर्स को बेहद गंभीर मानते हुए गंभीर आपत्ति जताई है ।
ऐसे एनकाउंटर्स संवैधानिक और मौलिक अधिकारों का हनन हैं l जब पुलिस खुद ही न्याय करने लगती है, तो वह नागरिक के "निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार" (Right to a Fair Trial) को पूरी तरह छीन लेती है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समता) का भी उल्लंघन है। लोकतंत्र की बुनियादी शर्त ही यही है कि कानून सबसे ऊपर है। फर्जी एनकाउंटर इस बुनियाद को हिला देते हैं।
न्यायाधीश, ज्यूरी और जल्लाद की भूमिका में जब खुद ही आ कर पुलिस किसी को दोषी मान कर उसे बेरहमी से मार देती है, तो वह न्यायपालिका के अस्तित्व को ही चुनौती देती है।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने ही ओम प्रकाश बनाम झारखंड राज्य मामले में स्पष्ट कहा था कि " ऐसी हत्याएं राज्य-प्रायोजित आतंकवाद (State-sponsored terrorism) के समान हैं।" त्वरित न्याय या 'इंस्टेंट जस्टिस' की आड़ में कई बार वैसे लोग भी मार दिए जाते हैं जिनकी कोई आपराधिक पृष्ठ्भूमि नहीं होती है और जिनके दोष का निर्धारण न्यायपालिका के द्वारा किया जाना होता है ।
आरा के शाहपुर में युवक भरत भूषण तिवारी के द्वारा आत्म - समर्पण किए जाने के पश्चात् भी सम्राट चौधरी सरकार की बेलगाम हो चुकी पुलिस के द्वारा उसे मार दिया जाना कोल्ड ब्लडेड मर्डर ही है l बिहार के मुख्यमंत्री को ये बताना होगा कि बिना कानूनी जांच , न्यायिक प्रक्रिया के युवक को दोषी मान कर पुलिस के द्वारा बेरहमी से मार दिया जाना कैसे उचित है ? बिहार की पुलिस को कानून हाथ में ले कर नृशंस हत्या करने की छूट किसने दे रखी है ?
मुख्यमंत्री जी .. जब शासन और शासन का मुखिया ही एनकाउंटर को सही ठहराने लगता है , तो पुलिस को लगने लगता है कि वो कानून से ऊपर है और वर्त्तमान में बिहार पुलिस यही मान कर चल रही है l
मुख्यमंत्री जी .. सनद रहे कि प्रकाश कदम बनाम राम प्रसाद विश्वनाथ गुप्ता मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने ही कहा था कि "यदि कोई पुलिसकर्मी अपने वरिष्ठ के अवैध आदेश पर फर्जी एनकाउंटर करता है, तो उसे 'हत्या' का दोषी मानकर मृत्युदंड तक दिया जाना चाहिए।" इस लिहाज से तो शाहपुर फर्जी एनकाउंटर में शामिल तमाम पुलिसकर्मियों के साथ - साथ उनको एनकाउंटर का आदेश देने वाले वरीय पुलिस अधिकारियों पर भी इरादतन हत्या का मुक़दमा चलना चाहिए और अगर बिहार पुलिस को एनकाउंटर की खुली छूट का आदेश आपकी तरफ से दिया गया है , तो मुक़दमा आप पर भी दर्ज होना व् चलना चाहिए l
मुख्यमंत्री जी .. अपराध का अंत जरूरी है, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया, दंड - संहिता को सिरे से नजरअंदाज कर किसी निहत्थे को पुलिस के द्वारा गोली मार दिया जाना कानून को खत्म कर देना है और ये किसी भी सभ्य समाज के लिए आत्मघाती है।
मुख्यमंत्री जी .. शायद आपको इस बात की जानकारी नहीं है कि न्यायपालिका का ही मानना है कि 'कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया' का कोई विकल्प नहीं हो सकता, एनकाउंटर तो कदापि नहीं l
भरत तिवारी के मां बाप सहित 14 लोगों सहित 50 अन्य पर नामजद एफआईआर।अरे ईमानदार बिहार पुलिस प्रशासन एक परिवार को अपने बेटे का 13 दिन वाला शोक तो मना लेने दो। मुझे तो ऐसा लगता है कि बिहार पुलिस भरत तिवारी के साथ साथ बाकियों को #नक्सली साबित करने पर तुली है। इतने लोगों पर एफआईआर यही साबित कराना चाहती है कि भरत तिवारी एक #गैंगस्टर था।
अपना हक मांगने पर ये परिणाम होता है तो पूरे देश को अपने अधिकार की बात करनी चाहिए क्योंकि पीड़ित केवल जवानियां गांव के लोग ही नहीं पूरे देश की लगभग 60% आबादी इसी सिस्टम की शिकार है।
12 सालों में अगर भ्रष्टाचार नहीं खत्म कर पाए तो क्या कर पाए तुम -
1- थानों में भ्रष्टाचार चरम पर है
2- लेखपाल, डीएम, SP, साइबर क्राइम थाना, सब भ्रष्ट हैं
3- तहसील, कचहरी, कृषि भवन, में भ्रष्टाचार भरा पड़ा है
4- प्रधान, बीडीसी, जिलापंचायत सदस्य, जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक, सांसद, मंत्री , मुख्यमंत्री सब भ्रष्ट हैं।
5- भगवान के मंदिर में आपके नाक के नीचे से चोरी हो गई, ये कैसी चौकीदारी है?
NEET aspirants were seen crying outside an exam centre in Bengaluru after allegedly missing entry due to delays caused by a Congress event/rally that blocked their route. If true, who takes the responsibility for their lost year?
यह तो बहुत ही अजीब मामला है लड़की की बात बिलकुल सही है।
एक लड़की का ट्रैन में RAC का टिकट हुआ और दूसरी सीट लड़के की थी।
एक लड़की पूरी रात लड़के के साथ कैसे गुजार सकती है..?
रेलवे वालो को सोचना चाहिए एक महिला की सेफ्टी सबसे जरुरी है।
बिहार के भोजपुर में भरत भूषण तिवारी की हत्या से जुड़े घटनाक्रम ने अनेक गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। लोकतंत्र में कानून का शासन सर्वोपरि है और प्रत्येक नागरिक को निष्पक्ष न्याय प्राप्त होना चाहिए।
यदि इस मामले में किसी प्रकार की चूक, अतिरेक अथवा अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच होनी चाहिए और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
सत्य तथ्यों के आधार पर ही सामने आना चाहिए। न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।
#भरत_तिवारी
बिहार के सीओ कब सुधरेगा. ये है तो एक सरकारी नौकर जो जनता का काम करेगा। लेकिन ये अपने आप को विधाता से कम नहीं समझता है और जनता को द्वितीय श्रेणी का नागरिक समझता है। बोधगया सीओ के पास एक फरियादी पहुंचा। सीओ ने उसके साथ हाथपाई किया और धक्के मार के कमरे से बाहर कर दिया और साथ ही गाली भी दी। इसको टूरेंट नौकरी से बरखास्त कर देना चाहिए। @samrat4bjp
IITs' placement cell is asking students not to disclose their JEE & GATE ranks, marks, scores, percentiles in their CVs.
Why?
-So that reserved category students don't feel bad.
India is the only country in the world, where students are being asked to hide their Merit.
@saharanpurpol@dgpup@myogiadityanath@SaharanpurDm@brajeshpathakup 🙏 महाशय बहुत-बहुत धन्यवाद. मुझे लगता है कि पुलिस विभाग को एक उचित ट्रेनिंग बहुत मददगार साबित होगी जो नागरिकों के प्रति विनम्रता के साथ व्यवहार करते हुए उन्हें अपने कार्य करने में दक्षता हासिल होगी 🙏
दारोगा जी को क्या पता कि बुजुर्ग को लतियाते समय कोई बस यात्री वीडियो बनाकर वायरल कर देगा। जिसकी बाद में जांच होगी।
वायरल वीडियो UP सहारनपुर जिला के घंटाघर क्षेत्र हनुमान मंदिर के पास की बताई जा रही है, जहां दरोगा जी किसी व्यक्ति को जूता पहने लातों से मार रहे हैं।
वीडियो की पुष्टि हम नहीं करते, जांच कर कार्यवाही की जानी चाहिए।
सरकारी बाबू लोग ठीक ही बोल रहे है ।
“ये मानसिक रूप से विक्षिप्त था ”
जहाँ लोग अपनी अपनी जाति की राजनीति कर रहे ये आदमी ग़रीब गुर्बा को घर ज़मीन दिला रहा था ।
समझदार लोग अपना घर परिवार जाति की राजनीति
और अपना स्वार्थ देखता है ये भरत तिवारी? दूसरे जाति के लोगो का दुख मिटाना चाहता था ?
ई सब काम सिस्टम का है भाई ।
पैंतीस सौ के चक्कर में ये पुलिस वाले ना अमानवीय व्यवहार कर रहे हैं बल्कि पूरे बिहार पुलिस और मुख्यमंत्री तक को बदनाम करवा रहे हैं …जितने भी पुलिसकर्मी इसमें दिख रहे हैं उनपर ऐसी करवाई कीजिए की दूसरों के लिए सीख हो @bihar_police@samrat4bjp
एक माओवादी ने सरेंडर किया
> 39 लाख कैश, घर और नौकरी मिली
भरत तिवारी ने सरेंडर किया
> एनकाउंटर कर दिया गया
ये एक ही देश में दोहरे मापदंड की शर्मनाक मिसाल है।
Dearest Railway Minister @AshwiniVaishnaw ji,
I am asking repeatedly again & again.
This is very very important & needs immediate attention.
Why should a RAC passenger bear full charge for 50% of a side lower seat? Isn't it unfair?
Once the chart is prepared, Railways must refund 50% of the fare with interest for RAC passengers. The same source of payment can be used for the refund.
Pls implement this immediately. I see many ladies and senior citizens who travel by RAC, without sleep and they pay full charge. This is so unfair.
If any of you reading this feel that this should be implemented immediately, comment with your thoughts and share until Railways makes it a fair deal for passengers.
This is long long overdue. @RailwaySeva
On behalf of Indian Passengers,
#FI
एक पुलिस दरोगा ने एक बाईक सवार व्यक्ति का 6 हजार का चालान काट दिया, वह व्यक्ति उस दरोगा को तके रहा, जैसे ही दरोगा आगे बढ़ा तो दरोगा भी बिना हेलमेट के था तो उस युवक ने पीछा करके दरोगा का वीडियो बनाकर पूछा आपने मेरा चालान 6 हजार का काटा है आपका हेलमेट कहां है?
One of the biggest scams in India is allotting centres of competitive exams in other states or 400–800 km away.
Why can’t exam centres be allotted within the same state or city as the aspirants?