कागज को कलम करूं,
या कलम से कागज भरूं?
मुझे बताओ जरा ,
मैं क्या इंतजाम करूं?
तुम्हें कुछ याद दिलाऊं,
या फिर आजाद करूं?
मुझे बताना कि,
क्या इंतिखाब करूं।।
तुम्हें रुककर मना लूं,
या जाने को कह दूं?
जैसा चाह लो वैसा,
मैं अब अंजाम करूं।।
@Kavishala_Hindi@hindwiOfficial@hindisopan
कब तक दिल की ख़ैर मनाएँ, कब तक रह दिखलाओगे
कब तक चैन की मोहलत दोगे, कब तक याद न आओगे
बीता दीद-उमीद का मौसम, ख़ाक उड़ती है आँखों में
कब भेजोगे दर्द का बादल, कब बरखा बरसाओगे
:- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ 🌼