AICC zonal head,Secretary RPCC | Grandson of well renowned freedom fighter, social activist and Former President of RPCC Late Shri Sardar Har Lal Singh Ji.
@ashokgehlot51 दुःख की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचकर उनका दर्द साझा करना ही सच्ची जनसेवा है। आशा है कि प्रभावित परिवारों को शीघ्र न्याय, उचित मुआवजा और हर संभव सहायता मिलेगी।उम्मीद है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और प्रभावित परिवारों को न्याय एवं उचित मुआवजा मिलेगा।
जयपुर के खोह नागोरियान में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट से मारे गए लोगों के परिजनों के बीच जाकर उन्हें ढांढस बंधाया एवं हालातों का जायज़ा लिया। यहां बेहद मार्मिक हालात हैं, स्थानीय लोगों में सरकार और प्रशासन की संवेदनहीनता को लेकर आक्रोश है।
घटना के बाद फायर ब्रिगेड एवं एंबुलेंस के आने में देरी हुई। यदि ये समय पर आती तो शायद जनहानि कम होती। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजस्थान की राजधानी में इतना बड़ी घटना हो गई, कई लोगों की जान चली गई और सरकार के किसी बड़े नेता ने यहां का दौरा तक करना मुनासिब नहीं समझा।
मैंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर एवं जिला कलेक्टर, जयपुर से फोन पर बात कर पीड़ितों की यथोचित मदद करने का आग्रह किया है।
After Vote Chori and Sarkar Chori - the BJP-EC jugalbandi has finished the contest before it has even begun with Seat Chori.
Look at what happened in the recent Rajya Sabha elections.
Congress candidate Meenakshi Natarajan ji submitted every document. No pending cases. The EC cancelled her nomination on a frivolous BJP objection.
Parimal Nathwani ji, the BJP-backed independent, got his own name wrong on the form and skipped multiple mandatory disclosures. The EC gave him an extension to fix everything.
Same Election Commission. Two candidates. One was disqualified without even a hearing. The other was rewarded despite not following the rules.
When the Congress sought a meeting, the EC first tried to evade us. When we finally met, they did not say one word.
Expect to see much more of this - because for the BJP, it is far easier to fix the election than to win it.
यह हम सभी के लिए बेहद गर्व और खुशी की बात है कि सिरोही के डोडूआ गांव के विश्वजीत सिंह देवड़ा लंदन की क्वीन मैरी युनिवर्सिटी के छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए हैं। उन्होंने यह प्रेस्टीजियस चुनाव जीत कर राजस्थान का मान सम्मान बढ़ाया है।
विडंबना है कि जिस प्रदेश से विश्वजीत सिंह आते हैं, वहीं पर राज्य सरकार छात्रसंघ चुनाव नहीं करवा रही है जबकि सभी छात्र संगठन चुनाव करवाने की मांग लगातार करते आ रहे हैं। छात्रसंघ युवा नेताओं के लिए राजनीति की नर्सरी की तरह होते हैं, राजस्थान के राजनीतिक इतिहास में अनेक नेता हुए हैं जिन्होंने छात्रसंघ चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक पारी शुरू की है लेकिन भाजपा सरकार की छात्रसंघ चुनाव करवाने में कोई रुचि नहीं है, बार बार सभी की मांग के बावजूद सरकार द्वारा इसे टर्न डाउन करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
कोटा के बाद बीकानेर में सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की किडनी खराब होने पर राजस्थान की बिगड़ती स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर देहात कांग्रेस जिला अध्यक्ष श्री बिशनाराम सियाग और शहर कांग्रेस जिला अध्यक्ष श्री मदन गोपाल मेघवाल के नेतृत्व में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज बेहद शर्मनाक और निंदनीय है।
कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के साथ बल प्रयोग किया जाना बताता है कि भाजपा सरकार किस कदर घबराई हुई है। लोकतंत्र में मुद्दों को उठाना विपक्ष का कर्तव्य है, पर भाजपा सरकार गलतियों को दुरुस्त करने के बजाय विपक्ष की आवाज को दबाना चाहती है।
महान क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन। देश की आज़ादी के लिए उनका समर्पण, त्याग और देशभक्ति हम सभी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगी।
अहमदाबाद में आयोजित प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीतने वाले ऋतिक बिश्नोई, अर्जुन परिहार, आर्यांशी स्वामी, राजस्थान पुलिस की कांस्टेबल देवांशी शर्मा, अर्जुन परमार एवं गायत्री तथा रजत पदक विजेता सुमन यादव को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
आप सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ। आप इसी प्रकार अपनी प्रतिभा और मेहनत से राजस्थान एवं देश का नाम निरंतर रोशन करते रहें।
कांग्रेस में हड़कंप, मानेसर प्रकरण के बाद की इनसाइड स्टोरी: ऐसे हुई गहलोत के खिलाफ साजिश, सचिन पायलट को राहुल गाँधी निष्कासित कर रहे थे लेकिन अहमद पटेल ने रोका था।
INDIA NEWS के वरिष्ठ पत्रकार अजीत मैंदोला की कलम से -
जयपुर | राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चार साल बाद जो बोले है, उससे कांग्रेस की राजनीति गरमा गई है। पार्टी के भीतर आम चर्चा शुरू हो गई है कि अब राहुल गांधी को सच्चाई का पता लगाना चाहिए। उसके बाद ही राजस्थान और दूसरे राज्यों के फैसले करने चाहिए। इसका कारण यह बड़ा सवाल है कि आखिर वह साजिशकर्ता कौन है, जिसने अशोक गहलोत को अध्यक्ष बनने से रोका। यही नहीं, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के दौरान विवाद किसने करवाया था। प्रियंका गांधी ने उस समय खुद अध्यक्ष पद पर दावेदारी ठोक दी थी। फिर सोनिया गांधी ने उन्हें जैसे-तैसे मनाया। इसके चलते परिवार में खींचतान की खबरें बाहर आई थीं।
इसका असर यह हुआ कि पार्टी को राजस्थान और केंद्र दोनों जगह बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। पार्टी कमजोर होती चली गई। भाजपा जो चाहती थी, वह हो गया, क्योंकि गांधी परिवार के सबसे बड़े संकट मोचक गहलोत को पार्टी से दूर कर दिया। इन्हीं संकट मोचक गहलोत ने मई 2022 में उदयपुर में संकल्प सम्मेलन करवा कर पूरी कांग्रेस को संदेश दिया था कि राहुल गांधी ही कांग्रेस के नेता हैं और उनके ही आदेश सब को मानने पड़ेंगे। इस सम्मेलन के बाद असंतुष्ट गुट खत्म हो गया था। सोनिया गांधी भी जानती थी गहलोत ने असंतुष्ट गुट को शांत करने के लिए सम्मेलन बुलाया था। इसके बाद भी 25 सितंबर 2022 को उनके खिलाफ ही बड़ी साजिश रच कर उन पर तमाम आरोप लगा दिए गए।
गहलोत पर ही बगावत के आरोप
कुछ लोगों ने इस तरह का प्रचार कर दिया कि गहलोत ने विधायकों से बगावत करवा दी। बिना सच जाने ऐसा माहौल बना दिया कि गहलोत सीएम की कुर्सी नहीं छोड़ना चाहते थे, जबकि सच्चाई इसके विपरीत थी। इस साजिश ने कांग्रेस को सबसे बड़ा नुकसान पहुंचाया। पार्टी 2023 में राजस्थान जैसे राज्य का अहम चुनाव हार गई। उस समय उन सब घटनाओं के मुख्य केंद्र बिंदु में सचिन पायलट ही थे, क्योंकि सचिन पायलट ने चुनाव से कुछ समय पूर्व अपनी सरकार के खिलाफ यात्रा निकाल माहौल फिर बिगाड़ा था। उस समय प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सचिन के निष्कासन की सिफारिश की थी, लेकिन फिर उसी लॉबी ने जिसने अध्यक्ष के चुनाव के समय साजिश की थी, उसने ही निष्कासन रुकवा दिया। मध्य प्रदेश के एक बड़े नेता ने सचिन को पार्टी से बाहर होने से बचाया था।
सचिन ने अपनी ही सरकार गिराने की कोशिश की थी
इससे पूर्व 2020 में सचिन पायलट ने उप मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष होते हुए खुद अपनी सरकार गिराने की कोशिश की थी। किसी भी राजनीतिक दल के इतिहास में यह ऐसा पहला मामला था, जिसमें मुखिया ने ही विरोधी दल भाजपा से हाथ मिला अपनी सरकार गिराने में कोई कमी नहीं रखी। इस घटना के बाद पार्टी के सर्वोच्च नेता राहुल गांधी ने सचिन पायलट को पार्टी से बाहर करने का मन बना लिया था, लेकिन तब अहमद पटेल ने उनके निष्कासन को रोका था। इतने बड़े धोखे के बाद भी दो साल में ऐसा क्या हुआ कि गांधी परिवार ने अचानक यू टर्न लेते हुए सचिन पायलट को सीएम योग्य मान लिया। पार्टी के साथ खड़े रहने वाले 90 विधायकों की मर्जी जाने बिना उनका नेता बनाने का फैसला कर लिया। ये वे विधायक थे, जिन्होंने करोड़ों रुपये का ऑफर ठुकरा पार्टी और अपनी सरकार को बचाने के लिए सचिन के खिलाफ सब कुछ दांव पर लगा दिया था। गांधी परिवार ने सचिन को सीएम बनाने का फैसला उस समय किया, जब सब कुछ तय रणनीति के हिसाब से चल रहा था।
अगस्त 2022 में अशोक गहलोत के नेतृत्व में चला आंदोलन:
अगस्त 2022 में राहुल गांधी के खिलाफ ईडी की कार्रवाई को लेकर दिल्ली में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस ने बड़ा आंदोलन चलाया। गहलोत ने दूसरे साथ खुद भी गिरफ्तारी दी थी। तब वह राजस्थान के मुख्यमंत्री थे। इसके बाद 4 सितंबर 2022 की रामलीला मैदान में होने वाली रैली से पहले सब कुछ तय हो गया था कि अशोक गहलोत पार्टी के अगले अध्यक्ष होंगे। उन्होंने अपनी स्वीकृति भी दे दी थी। कांग्रेस ने भी घोषणा कर दी थी। पार्टी में बड़ा उत्साह था। महंगाई के खिलाफ 4 सितंबर 2022 की रैली में राहुल गांधी मुख्य वक्ता थे, लेकिन अगले अध्यक्ष के रूप में गहलोत को महत्व दिया गया था। उसी दिन शाम को जोधपुर हाउस में देशभर के कांग्रेसी नेताओं ने गहलोत को बधाई दी।
फिर यूं बदले हालात:
7 सितम्बर 2022 को भारत जोड़ो यात्रा शुरू कराने के बाद गहलोत जयपुर लौट आए। इससे पहले 27 अगस्त 2022 को इटली में सोनिया गांधी की मां का निधन हो गया। पूरा गांधी परिवार इटली चला गया। केवल राहुल गांधी 4 सितंबर की रैली के चलते वापस लौट आए। सोनिया गांधी और उनकी बेटी प्रियंका गांधी सितंबर दूसरे सप्ताह में भारत वापस आए।उनकी वापसी के वाद ही अचानक कांग्रेस की राजनीति में बड़ा यू टर्न आया। राहुल गांधी यात्रा में व्यस्त थे, तभी 11 सितंबर के बाद राजस्थान में खबरें चलने लगीं कि सचिन पायलट अगले सीएम होंगे। सचिन के समर्थक प्रचार में जुट जश्न की तैयारी में लग गए और राजस्थान कांग्रेस सकते में आ गई। सरकार बचाने वाले विधायक अपने को ठगा महसूस करने लगे। सब के अंदर यह बात घर कर गई कि अब उनसे राजनीतिक बदला लिया जाएगा।
वो लोग ताकतवर हो जाएंगे, जिन्होंने पार्टी तोड़ने की कोशिश की। उसके बदले में पार्टी तोड़ने वाले विधायकों ने भाजपा से 10 से 20 करोड़ रुपये लिए थे। गहलोत खुले आम कह चुके थे कि दिल्ली में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के घर पर करोड़ों की लेनदेन हुआ था। एक अनुमान है कि 250 करोड़ से ज्यादा पैसा दिया गया, क्योंकि 27 विधायक लाने का ठेका हुआ था। सरकार की सजगता से 17 ही विधायक मानेसर पहुंचे और खेल बिगड़ गया। ऐसे में सरकार बचाने वाले विधायकों को लगा कि जिन्होंने पार्टी के साथ धोखा किया उन्हें कमान दी जा रही है। यह फैसला हैरानी वाला इसलिए था कि गांधी परिवार अपने भरोसेमंद जिस गहलोत को पार्टी अध्यक्ष बनाने जा रहा था, उससे कोई चर्चा ही नहीं की गई। इससे यही संदेश गया कि कोई बहुत बड़ी साजिश हो गई है।
गहलोत को अध्यक्ष बनने से रोकने की साजिश:
साजिश यही थी कि गहलोत को अध्यक्ष बनने से रोका जाए। पार्टी का बड़ा धड़ा और राजनीति के जानकार भी मानते हैं कि गहलोत अगर अध्यक्ष बन गए होते तो राहुल गांधी को बड़ी ताकत मिलती और पार्टी मजबूत होती, लेकिन जिसने भी षड्यंत्र किया उसने एक तीर से कई निशाने साधे। इस षड्यंत्र में पार्टी का कोई नेता शामिल था, जिसने भाजपा की ‘मर्जी की कर दी। यह व्यक्ति परिवार से था या कोई अन्य, यह जांच का विषय है।
गहलोत ने केवल अपनी पीड़ा व्यक्त कीः
गहलोत ने अपनी पीड़ा व्यक्त कर जिस तरह से सचिन पायलट को निशाने पर लिया, उससे यह तो साफ हो गया कि पार्टी में बड़ा संकट आने वाला है। गांधी परिवार को राजस्थान का फैसला करने से पूर्व 2022 में घटे पूरे घटनाक्रम की जांच करानी चाहिए और प्रदेश के मौजूदा नेताओं से एक-एक कर सच का पता लगाना चाहिए। पूरे देश में राजस्थान ही एक मात्र ऐसा राज्य है जहां पर कुछ उम्मीद है। अगर यह राज्य भी हाथ से निकल गया तो यह भी उत्तर प्रदेश बन जाएगा
@RahulGandhi@ashokgehlot51@kharge@Pawankhera@rajivarorajpr
@ashokgehlot51 सर,
अब बात वोट चोरी से ऊपर वोट पर डाका डालने तक पंहुच गई है। चोरी तो छुपकर की जाती है, लेकिन ये जो सरे आम कर रहे हैं, यह डाका है।
अफसोस यह है कि देश की किसी ज़िम्मेदार संवैधानिक संस्था की रीढ़ अब झुक गयी है, किसी में दम नहीं इस अराजकता को रोकने का !
मध्यप्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी की कैंडिडेट मीनाक्षी नटराजन जी का नॉमिनेशन रद्द करवाना भाजपा की लोकतंत्र का गला घोटने वाली बात है।
ये चुनावों को फ्री एंड फेयर तरीके से लड़ ही नहीं सकते। जो नॉमिनेशन फॉर्म को कैंसिल करने के लिए तर्क दिए जा रहे हैं वो वैलिड नहीं हैं और एक प्रकार से कांग्रेस से सीट छीनने की साजिश है और यही तो वो वोट चोरी है जिसकी बात श्री राहुल गांधी बार बार करते हैं।
सभी दलों को भाजपा के इस षडयंत्र के खिलाफ बोलना चाहिए, जिस तरह से ये चाहे लोकसभा हो या राज्यसभा, अपनी संख्याबल बढ़ाने के लिए पैंतरेबाजी कर रही है किसी को नहीं पता कि अगला निशाना कौन होगा।
12 वर्षों की गरीब-विरोधी आर्थिक नीतियों और compromised विदेश नीति ने आज देश को ऐसे हालात में ला खड़ा कर दिया है जहाँ लाखों गरीब परिवारों और महिलाओं को लकड़ी के ज़हरीले धुएं की तरफ धकेल दिया गया है।
उज्ज्वला योजना में सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 कर दिया गया। उसपर पिछले 3 महीनों में घरेलू LPG सिलेंडर के दाम ₹89 बढ़ा दिया गया - मतलब, पहले दाम बढ़ाओ, फिर सब्सिडी घटाओ, गरीबों का चूल्हा बुझाओ।
प्रवासी मजदूरों की जीवनरेखा, 5 किलो का सिलेंडर भी ₹323 महंगा कर दिया - वो कमाएगा क्या, खाएगा क्या, और बचाएगा क्या?
अरबपति मित्रों को लाखों करोड़ों की कर्ज़माफ़ी दिलाना और गरीबों को अपनी नाकामियों का बिल थमाना - ये लूट का मोदी मॉडल है।
मोदी जी, क्या आपकी नाकामियों का बोझ सिर्फ गरीब उठाएंगे? क्या आपकी बनाई इस चरमराती अर्थव्यवस्था की कीमत मजदूर, किसान, महिलाएं और मध्यम वर्ग ही चुकाएंगे?
धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
आदिवासी अस्मिता और अधिकारों के महानायक बिरसा मुंडा जी ने जल, जंगल और ज़मीन की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
उनका संघर्ष, साहस और विचारधारा हमें न्याय, समानता और वंचित समुदायों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने की प्रेरणा हमेशा देते रहेंगे।