एक इत्तेफाक हो,
एक रोज तुम साथ हो
सफर हो थोड़ी दूर तक का
और हाथों में तुम्हारा हाथ हो
नज़रें देखकर तुम्हें गाएं गज़ल
ज़ुबा खामोश होकर भी
कह जाए मन की हलचल
सच कहूँ तो गुजर जाए ये उम्र
पर गुजरे न ये सफर ✍
❤💛
आरफा खानुम दिल्ली में 'छठ पूजा' के लिए बने घाटों पर गई
फिर लोगो से बातचीत की और मोदी जी को लेकर झूठ फैलाई
लोगो को लगातार मजबूर किया कि ताकि वे मोदी जी के खिलाफ कुछ बोल दे, पर लोगों ने 'मोदी जी' के खिलाफ एक शब्द नही बोला।