एक गरीब आदिवासी किसान परिवार से निकलकर दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में अपनी पहचान बनाने वाले विजय शंकर मीणा ने कड़ी टक्कर देकर साबित किया कि संघर्ष और संकल्प के सामने परिस्थितियाँ छोटी पड़ जाती हैं।
विजय शंकर मीणा की यह यात्रा केवल एक चुनाव की कहानी नहीं, बल्कि उन लाखों आदिवासी युवाओं की उम्मीदों का प्रतीक है, जो शिक्षा, सम्मान और बराबरी की हिस्सेदारी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
चुनाव समाप्त हुआ है, सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व की लड़ाई नहीं। संघर्ष जारी रहेगा!
चुनाव का परिणाम हमारे पक्ष में नहीं आया। हम 2,053 वोटों से चुनाव हार गए, लेकिन यह हार हमारे लिए सिर्फ एक चुनाव का परिणाम है, संघर्ष की हार नहीं।
छोटे भाई विजय शंकर मीणा ने पूरी मजबूती, मेहनत और ईमानदारी के साथ चुनाव लड़ा। एक गरीब आदिवासी परिवार के इस बेटे ने दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे बड़े विश्वविद्यालय में जिस तरह हजारों युवाओं के बीच अपनी आवाज़ बुलंद की और चुनाव लड़ा, वह अपने आप में बड़ी बात है।
इस पूरे संघर्ष में दिन-रात मेहनत करने वाले सभी साथियों का दिल से धन्यवाद। जिस तरह इतने नौजवानों और युवाओं का हमें समर्थन मिला, वह हमारे लिए सबसे बड़ी ताकत है।
विनोद भाई का विशेष धन्यवाद, जिन्होंने एक गरीब आदिवासी बेटे पर भरोसा जताया और उसे दिल्ली विश्वविद्यालय में चुनाव लड़ने का अवसर दिया। भाई राहुल झांसला का भी दिल से धन्यवाद, जिन्होंने हर कदम पर मजबूती से साथ दिया।
जब सरकार, प्रशासन और पूरा तंत्र आपके खिलाफ खड़ा हो जाए, तब एक गरीब के बेटे के लिए लड़ाई कितनी मुश्किल होती है, यह हमने इस चुनाव में देखा। सरकार की तानाशाही और दबाव के बावजूद विजय शंकर मीणा ने जिस हिम्मत और मजबूती से लड़ाई लड़ी, वह हमेशा याद रहेगी।
दिल्ली विश्वविद्यालय में एक गरीब आदिवासी बेटे का इतनी मजबूती से चुनाव लड़ना ही अपने आप में बड़ी जीत है।
यह हार नहीं है। यह हमारे संघर्षों की जीत है, उन हजारों युवाओं के भरोसे की जीत है जिन्होंने हमारे साथ खड़े होकर अपनी आवाज़ बुलंद की।
लड़ाई जारी रहेगी।
इंक़लाब ज़िंदाबाद @RahulGandhi@VinodJakharIN@rahuljhanslaa@Vijay_DUSU
जोधपुर के भोपालगढ़ से लेकर श्रीगंगानगर के संगरिया तक कांग्रेस के पार्षदों को जबरन उठाने एवं फर्जी शिकायतों के आधार पर गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
भाजपा द्वारा कहीं सत्ता का दबाव, कहीं पुलिस की धमकी, तो कहीं लाठी के दम पर लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश का खतरनाक चेहरा सामने आ रहा है।
जिन्हें जनता ने वोट देकर चुना है, उन्हें पुलिस और मशीनरी के दम पर झुकाने की कोशिशें की जा रही हैं।
भाजपाई सत्ता तानाशाही पर उतर आई है, सभी कांग्रेसजन डटे रहें और किसी भी सूरत में लोकतंत्र का अपहरण नहीं होने दें।
रिपोर्टरों ने कहा- मौत पर राजनीति करने आ गए? अभिजीत दीपके ने पूछा-किसकी वजह से मौतें हुई हैं?
गोदी रिपोर्टर ने बोला- सभ्यता।
@abhijeet_dipke का रिऐक्शन देखो 😅👇
अब मोदी सरकार की लूट UPI तक पहुँच गई है। “No fees on UPI” को बदलकर अब “₹2,000 तक के UPI transactions पर no fees” कर दिया गया है।
गगनचुंबी महँगाई से आम आदमी की जेब पहले ही खाली है। थोक महँगाई 10% के क़रीब है और भाजपा सरकार ने जनता पर “Digital Payments Tax” लगाकर उनकी बची-कुची, बचत को भी तबाह करने की योजना बना दी है।
मोदी सरकार का सबसे बड़ा पलटवार देखिए —
10 साल पहले नोटबंदी करके देश की अर्थव्यवस्था को झटका दिया गया। जब नोटबंदी के विनाशकारी नतीजों पर सवाल उठे, तो सरकार ने दलील दी थी कि नोटबंदी Digital Payments और Cashless Economy को बढ़ावा देने के लिए थोपी गई।
वित्त मंत्री जी ने हाल ही में संसद में कहा था कि UPI पर कोई Tax व Charges नहीं लगेंगे, पर कई ख़बरों के मुताबिक़:-
₹5,000 के transaction पर ₹25 और ₹10,000 पर ₹50 तक की संभावित वसूली की जाएगी। क्या ये सच है?
MDR की बात करें तो सरकार को क्या यह नहीं पता कि व्यापारी पर पड़ने वाला यह अतिरिक्त बोझ आखिरकार कीमतों के जरिए आम उपभोक्ता की जेब से ही वसूला जाएगा?
महँगाई से त्रस्त जनता को राहत देने के बजाय मोदी सरकार हर रोज उसकी जेब पर डाका डालने का नया तरीका खोज रही है !!
रात के अंधेरे में एक और डिजिटल लूट की पटकथा लिख दी गई है।
मोदी जी और निर्मला सीतारमण का नया नोटिफिकेशन कहता है: ₹2,000 तक UPI पर No Charge...
मतलब ₹2000 के ऊपर हर एक ट्रांजेक्शन पर अब डकैती होगी। पैसा आपका होगा, जेबें सरकार की भरेंगी।
मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फ़ीस लगाने का रास्ता खोल दिया है
US Trade Deal की तरह ही, Compromised PM मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने surrender कर रहे हैं : राहुल गांधी, नेता प्रतिपक्ष