हाथ को पैर कहा होता हम पैर से नहीं खा रहे होते। यह जितने भी नाम हैं, जितने भी गुण हैं, जितनी भी मात्राएं हैं जितने भी भाषाएं हैं सब काल्पनिक है रची गई हैं और बताई गई है।
हमारे गुरुजी थे स्कूल टाइम से श्री रमेश बाबू हमें कहानी सुनाते थे की एक गांव में एक स्कूल था उसे स्कूल में नदी के पार से एक गांव से एक बच्चा पढ़ने आता था। एक दिन गुरु जी ने पूछा दूध का रंग कौन सा है सारे बच्चों ने कहा सफेद, एक बच्चे ने बताया दूध का रंग काला होता है।
शिक्षा; काला और सफेद कुछ नहीं होता जो हम सीखते हैं वही हम जानते हैं। जो कोई गलत है, हो सकता है उसे वही बात सही बताई गई हो या उसने सीखी हो या उसने देखी हो, सच बताना अगर किसी ने आरंभ में ही सूरज को चाँद कहा होता तो क्या चाँद दिन में नहीं उग रहा होता ?
@IRCTCofficial@AshwiniVaishnaw
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