छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव के सरकारी स्कूल में 11वीं-12वीं के लिये एक भी टीचर नहीं है
बच्चे टीचर नियुक्ति की माँग लेकर कलेक्टर के पास गये उन्होंने DEO के पास भेजा
DEO ने दुत्कार कर कहा “ज़िंदगी भर जेल में रहोगे तो समझ में आएगा”
आरती साहू जैसे बच्चों की इस देश से क्या उम्मीद है? यही ना कि सरकारें कम से कम उनको पढ़ने का मौक़ा तो दें
सोचिये ज़रा, हम अपने बच्चों को महँगे स्कूल भेजते हैं, ट्यूशन लगवाते हैं - और इसी देश में कुछ बच्चे पढ़ने के लिए बेचैन हैं. लेकिन सरकारें उन्हें पढ़ने नहीं दे रहीं
जातिगत जनगणना इसलिए ज़रूरी है - जिससे छत्तीसगढ़ के पिछड़े आदिवासी बच्चों को पढ़ने लिखने का मौक़ा मिले.
यह सोचना भी कि यह बच्चे बाक़ी बच्चों के साथ कम्पीट कर सकते हैं बेमानी है
उनकी बेबसी देख कर ग़ुस्सा आता है