जिस प्रकार का खुलासा चुनाव आयोग के संदर्भ में एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी समाचार पत्र में हुआ है यह खुलासा बहुत बड़ी चुनावी बेईमानी स्पष्ट दर्शा रहा है
भाजपा के इशारे पर संविधान और लोकतंत्र तथा कानून विरोधी कार्य कर रहे अधिकारी ये जान लें कि पापकर्म और बेईमानी का घड़ा एक दिन अवश्य भरता है और जब फूटता है तो बहुत बुरी सजा मिलती है
भाजपा जो कि ताकत, पैसे का इस्तेमाल करके अधिकारियों से गलत काम करवाती है वो भाजपा भी अंत में अधिकारियों को फंसवा कर भाग खड़ी होती है
अतः बेईमानी और संविधान विरोधी कार्य कोई अफसर ना करे ये सलाह है क्योंकि जब हिसाब किताब होगा तो न्याय और संविधान तथा कानून अनुसार सजा मिलेगी और कोई भाजपाई बचाने नहीं आएगा
अकबर, बाबर और औरंगज़ेब के बाद अब महमूद गज़नवी!
भाषण पर भाषण जारी है।
साल 2018 से एक भी प्राइमरी टीचर भर्ती नहीं आई है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के सारे मगरमच्छ छोड़ दिए गए हैं।
दूध का दूध और पानी का पानी करने वालों ने सारा दूध ही पानी कर दिया है।
नोएडा के गरीब गुरबा मज़दूर अपने हक की मांग के अपराध में गंभीर धाराओं में जेलों में कैद हैं।
भ्रष्टाचार इस कदर बास मार रहा है कि बीजेपी के केंद्रीय नेताओं की फीडबैक बैठक तक उसकी दुर्गंध से भर जा रही है।
सत्ता के सजातीय मोह ने अतीत के सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं।
और यहां मुगलों और मुसलमान शासकों से भाषणों में रोज़ ही जंग जारी है!
न रोटी, न रोजगार, न कोई उम्मीद,
चुनाव के वास्ते सिर्फ हिंदू-मुसलमान की तैयारी है!!
बड़ी ख़बर-
योगी आदित्यनाथ के उद्घाटन वाली परियोजना में धोखाधड़ी के गंभीर सवाल, वो भी पार्टी के भीतर से।
योगी आदित्यनाथ आज लखनऊ विकास प्राधिकरण की जिन योजनाओं का उद्घाटन करने जा रहे हैं,
उनमें बीजेपी के ही पूर्व केंद्रीय मंत्री ने लगाया भारी धोखाधड़ी का आरोप।
बीजेपी के पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर ने लखनऊ विकास प्राधिकरण पर जमीन खरीद में किसानों के साथ भारी धोखाधड़ी का संगीन आरोप लगाया।
सोचिए, किसानों के साथ भारी धोखाधड़ी की ये कहानी पार्टी के भीतर से आ रही है,
और योगी आदित्यनाथ इसे लखनऊ के विकास में नया अध्याय बता रहे हैं।
बस 7000 करोड़ के सूचना के विज्ञापन को किनारे कर दीजिए,
तो विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का कुआं भी नहीं दिखेगा,
सीधे खाई दिखेगी!!
@mediacellsp@brajeshpathakup बृजेश स्वयं सेवक बहुत बड़ा घटिया इंसान है। अपने समाज का उत्पीड़न करने वाले के साथ मंच साझा करता है। उसी भाजपा ढोंगी के तारीफों का पुल बांधता है वो भी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए। मका मक्कार इंसान है।
वादावीर @brajeshpathakup असल में धोखावीर हैं
ये वायदावीरी और धोखावीरी भाजपा की रीति और नीति है इसीलिए यूपी की बदकिस्मती है कि भाजपा यूपी की सत्ता पर काबिज है
लेकिन इस बार जनता है तैयार, भाजपा को करेगी सत्ता से बाहर
IIT बॉम्बे मामले में अब CCTV फुटेज सामने आ गया है
फुटेज में प्रोफेसर दूल्ला अपनी ड्यूटी करते हुए दिखाई दे रहे हैं बस उनकी बदकिस्मती इतनी थी
कि कमरे में मौजूद 3 इनविजिलेटरों में से फोन देखते हुए छात्र को पकड़ने वाले वही थे
साहिल वानकोडे सुसाइड केस में पक्का सबूत मिला है।
एक और CCTV फुटेज सामने आया है जिसमें वह परीक्षा के दौरान फ़ोन के साथ नकल करते हुए पकड़ा जाता हुआ दिख रहा है। इसके बाद वह फ़ोन इनविजिलेटर को सौंप देता है।
क्या फिर भी क्या SC/ST Modi Act लगेगा बेशर्मी से
इस सफाई का कोई मतलब नहीं। डिप्टी डायरेक्टर स्तर के अधिकारी के दस्तखत से संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की भूमिका का स्पष्टीकरण सिर्फ गोदी मीडिया ही मानेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त और बाकी दोनों चुनाव आयुक्तों की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के बिना उनकी दस्तखत का पत्र भी अपर्याप्त होता।
ये मनोज सिंह हैं। सर्वे की मैट्रिज़ कंपनी चलाते हैं।
आज इनका किया सर्वे चल रहा है, एक चैनल पर।
योगी आदित्यनाथ को बंपर जीत की ओर बढ़ता दिखाया जा रहा है।
इनके सर्वे पर जाने से पहले योगी भक्ति में गले तक डूबे इनके विचारों को जान लीजिए।
इंडिया टीवी के कार्यक्रम कॉफी विथ कुरक्षेत्र में ये अक्सर ही राजनीतिक विश्लेषक बनकर आते हैं,
और ऐसा झूम झूमकर योगी चालीसा गाते हैं कि अगर बीजेपी के नए मीडिया संयोजक आशीष उषा अग्रवाल इन्हें आधा घंटे सुन लें,
तो अपने सभी प्रवक्ताओं को इनके पास ट्रेनिंग के लिए भेज दें।
सवाल है कि नए नवेले चैनल ने इनसे सर्वे क्यों करवाया?
क्या कहीं से 'विशाल' आदेश आया?
सूचना के पंजीरी वितरण अभियान में,
मत पूछिए किसने कितना खाया?
ज्ञानेश बाबू!
तेज़ हवा बुझा देगी
तुम्हारे महल के कंगूरों की
नकली रोशनियां
याद रहे
हवा किसी की नहीं
हवा तेज होगी तो
इन थकी सांसों में
राहत आ ठहरेगी
और जुटेगी
उतनी ज्यादा हिम्मत
यह कहने के लिए कि-
“हवा तेज चलता है..!!
टोपी संभालो
उड़ जाएगा..!!”
नि:शब्द!
सूचना ने लखनऊ के पत्रकारों को ये खबर चलाने के लिए भेजा है।
“मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में दो पीड़ित परिवारों से की मुलाकात,
और 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की।
एक के पति की कैंसर से हुई थी मौत।
एक व्यक्ति की सड़क हादसे में हुई थी मौत।”
मतलब अब 2-2 लाख की आर्थिक सहायता का फोटो भेजकर प्रचार करना पड़ रहा है!!
प्रिय सूचना निदेशक विशाल सिंह, ये क्या है?
क्या ज़मीन का माहौल वाकई बहुत बुरा है?
“ सारे देवी देवताओं कों डुबो दो” नरेंद्र मोदी
इस वीडियो में नरेंद्र मोदी ने अपने दिल के हर एक बात रख दी है, वह अंदर से क्या है , अंदर से हिंदू धर्म के लिए जो नफ़रत है , देवी देवताओं के लिए जो नफ़रत है
वह सब इस वीडियो में देख लो,,
ये वह वीडियो है जो BJP का IT cell और गोदी मीडिया आपको कभी नहीं दिखायें हे
इतनी नफ़रत कौन करता है हिंदुओं से ? mulla?
चुनाव आयोग, 5 सवाल हैं - देश जवाब चाहता है:
1. विपक्ष को डिजिटल वोटर लिस्ट क्यों नहीं मिल रही? क्या छिपा रहे हो?
2. CCTV और वीडियो सबूत मिटाए जा रहे हैं - क्यों? किसके कहने पर?
3. फर्जी वोटिंग और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की गई - क्यों?
4. विपक्षी नेताओं को धमकाना, डराना - क्यों?
5. साफ-साफ बताओ - क्या ECI अब BJP का एजेंट बन चुका है?
भारत का लोकतंत्र बेशकीमती है - इसकी चोरी का अंजाम बहुत भयानक होगा। अब जनता बोल रही है - बहुत हुआ!
#VoteChori
राहुल गांधी ये बात कई बार कही है लगता है उसका असर होने लगा है अब यही बात पूरे विपक्ष को एक साथ कहनी चाहिए कि चुनाव आयोग के जो भी अफसर गलत कर रहे हैं उन्हें सरकार बदलने के बाद सजा मिलेगी...
इससे कुछ ईमानदार अफसर गलत करने वालों का साथ छोड़कर सामने आएंगे।
“ मैं ये बात बहुत seriously बोल रहा हूँ … ये Treason है
Election Commission में जो भी ये काम कर रहे है आपको हम छोड़ेंगे नहीं… क्योंकि आप हिंदुस्तान के ख़िलाफ़ काम कर रहे हो
आप याद रखिए आप कहीं भी हो- retired हो- कुछ भी हो हम आपको ढूँढ के निकालेंगे”
~ नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi जी
( August 2025)
जब चुनाव आयोग के भीतर ही दो चुनाव आयुक्त 14 बार आपत्ति दर्ज करें, तो सवाल सिर्फ चुनाव प्रक्रिया का नहीं - लोकतंत्र की विश्वसनीयता का है।
वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने से लेकर चुनावी डेटा के नियंत्रण तक गंभीर सवाल उठे हैं। दो आयुक्तों ने कुछ कदमों को “unauthorised” और “illegal” तक कहा है।
देश जानना चाहता है -
जब वोटर तय करने वाली व्यवस्था में ही पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हों, तो जवाबदेही किसकी है?
वोट किसी सरकार, पार्टी या संस्था की कृपा नहीं है।
वोट जनता का अधिकार है। और उस अधिकार की रक्षा हर कीमत पर होनी चाहिए।
लोकतंत्र में वोटर की आवाज़ से बड़ा कोई अधिकार नहीं।