ज़मीं से जो भी रिश्ता जोड़ते हैं,
हवा का रुख वो अक्सर मोड़ते है
पहाड़ों से उतर, शहरों में आये
मगर शहरों में पत्थर तोड़ते हैं
छुड़ा कर हाथ इस दुनिया से अब भी
तुम्हारे घर की जानिब दौड़ते हैं
कभी कभी मशीनी शहर लुधियाना की शाम भी इतने रंग समेट कर जब आंगन में उतरती है तो दिल चाहता है के काश इस मशीनी जिस्म की कोरी कैनवस पर भी कोई शाम उतरे और रूह में रंग भर दे।
aaj sham ka manzar mobile ki aankh se.
#ritaz
रोज़ लफ़्ज़ों को तोड़ लाता हूँ
फिर पिरो कर ग़ज़ल बनाता हूँ
जब कभी उसको भूल जाता हूँ
याद करता हूँ तिल-मिलाता हूँ
आ तो जाता हूँ लौट कर घर में
खुद को रखता हूँ भूल जाता हूँ
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शहीदों को भुलाते जा रहे हो ,याद रख लेना,
कि उनके ख़ून से होकर ही आज़ादी निकलती है |
23 मार्च 1931 क्रांतिकारी वीर शहीद दिवस,
शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव की पुण्यतिथि पर उनको शत-शत नमन || 🙏
#ritaz
Ishq khuda ho ishq ho mazhab, ishq jaha.n pehchaan bane,
un rangon se khelen holi, jinse hindustan bane |
عشق خدا ہے عشق ہے مذہب عشق جہاں پہچان بنے
اُن رنگوں سے کھیلیں ہولی جنسے ہندوستان بنے
#ritaz
हां !! हुआ था, मगर हर बार नहीं कर सकते
खुद को फिर इश्क़ में बीमार नहीं कर सकते
एक कश्ती है जिस�� डूबना मंज़ूर नहीं
एक दरिया है जिसे पार नहीं कर सकते
हम हैं मज़दूर, इमारत का हुनर है, लेकिन
तेरे आंगन में ये दीवार नहीं कर सकते ||
#ritaz
बड़ा समझा चुके दिल को मगर ऐ जान गुज़रेंगे
तुम्हारे बाद सब मौसम बड़े वीरान गुज़रेंगे
गरीब ऐ शहर में बंटवा दिए हैं फूल क्योंकि कल
इसी बस्ती से साहिब बन के आलीशान गुज़रेंगे ||
#ritaz
हां हुआ था, मगर हर बार नहीं कर सकते
खुद को फिर इश्क़ में बीमार नहीं कर सकते
एक कश्ती है जिसे डूबना मंजूर नहीं
एक दरिया है जिसे पार नहीं कर सकते।
- @Iamritaz