5 अक्टूबर को IIT Bombay के वन विहार स्थित गेस्ट हाउस में जयपुर का हिन्दू अतिथि आया, उसने लॉबी में खुलेआम जातिगत टिप्पणियां की,
उसने चिल्लाकर कहा कि "इस देश का संविधान भंगी ने बनाया है" " मेरी बेटी भी यह बोलती है खुलेआम"
अबे B*"## मनुवादी भंगी जाति में किसी का पैदा होना गुनाह क्या, इस जाति ने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा, जो देखो वो गाली दे देता है,
अब इस पर SC ST एक्ट लगेगा तो इसकी जाति समुदाय वाले बोलेंगे गलत लगा है, फेक केस है,
मनुवादी अब इस देश में बेल्ट ट्रीटमेंट मांग रहे हैं यह सुधरने वाले नहीं है, इनको कॉलेजियम कोर्ट भी संरक्षण देता है क्योंकि जज जात बिरादरी वाले बैठे हैं,
दुष्ट मनु ने ऐसी जाति व्यवस्था बनाई है कि गंदगी करने वाले पूजनीय कहलाते हैं और साफ़ सफ़ाई करने वाले नीच अछूत कहलाते हैं,
वीडियो देखकर खून खौल गया है मेरा, @ambedkariteIND पर जाकर देख सकते हो।
ब्राह्मण भिखारी है तो भी आशीर्वाद देता है, 🔥
ब्राह्मण भले कितना गरीब निर्धन ही क्यों ना हो उसको फिर भी पंडित जी कहकर सम्मानित किया जाता है, यह सामाजिक रूप से पूजनीय है,
ब्राह्मण होना ही प्रिविलेज है, ब्राह्मण से जाति आधार पर भेदभाव नहीं होता, ब्राह्मण के पास कल्चरल कैपिटल है, सिस्टम में ओवर रिप्रेजेंटेट है ।
आईआईटी में पढ़ने वाले एक एक्स स्टूडेंट ने बताया जैसे ही SC ST और OBC समाज के स्टूडेंट IIT में आते हैं
वो देखते हैं उनके समाज का फैकल्टी में कोई भी प्रोफेसर या अधिकारी नही है.
IIT में सवर्ण प्रोफेसरों का वर्चस्व है. दूसरा सबसे बड़ा डरावना बात है कि IIT के कैंपस में आरक्षण को एक गाली की तरह पेश किया जाता है.
सवर्ण स्टूडेंट आपस में खुलकर आरक्षण के खिलाफ बात करते हैं. SC ST स्टूडेंट यह माहौल देखकर खुद को IIT के कैंपस अलग थलग पाता है.
एक्स स्टूडेंट ने कहा अगर कोई शिकायत है तो SC ST सोचते हैं किससे कहा जाए. कारण IIT का पूरा वातावरण आरक्षण विरोधी नजर आता है.
अभी तक बहुजन समाज का कोई नेता IIT में सवर्ण समाज के प्रोफेसरों के ओवर रिप्रजेंटेशन को मुद्दा नही बना पाया.
किसी भी सेक्टर या इंस्टीट्यूशन में ओवर रिप्रजेंटेशन का अर्थ है अवैध कब्जा. भारत के सभी समुदाय जाति का प्रतिनिधित्व IIT में होना चाहिए. यह केवल डाइवर्सिटी नही, रोजगार का भी मुद्दा है. सभी बड़े रोजगार मुट्ठीभर जातियों को क्यों दिया जा रहा है ?
“मेरा दलित साथी पैसे, पढ़ाई और संस्कारों में मुझसे आगे लेकिन उसे जाति के कारण नहीं मिलता रूम”
ब्राह्मण युवक ने वीडियो में बताया भारत के शहरों में जातिगत भेदभाव का सच!
अब नोएडा के सेंटर पर SSC की जूनियर हिंदी ट्रांसलेटर की परीक्षा रद्द हो गई.
आज 12 बजे से परीक्षा होनी थी, लेकिन तकनीकी खराबी की वजह से परीक्षा नहीं हो पाई.
परीक्षा देने आए परेशान युवाओं ने कहा - 'मोदी से देश को छुड़वाओ, तभी कुछ हो पाएगा.'
'मोदी से देश को छुड़वाओ, तभी कुछ हो पाएगा'
- देश के युवा
आज SSC की जूनियर हिंदी ट्रांसलेटर भर्ती परीक्षा 12 बजे से होनी थी, लेकिन नोएडा के सेंटर पर तकनीकी खराबी होने की वजह से परीक्षा नहीं हो पाई
एक परीक्षा तो करा नहीं सकते, बस बतकही करवा लो!
'मोदी से देश को छुड़वाओ, तभी कुछ हो पाएगा'
- देश के युवा
आज SSC की जूनियर हिंदी ट्रांसलेटर भर्ती परीक्षा 12 बजे से होनी थी, लेकिन नोएडा के सेंटर पर तकनीकी खराबी होने की वजह से परीक्षा नहीं हो पाई
एक परीक्षा तो करा नहीं सकते, बस बतकही करवा लो!
खुलेआम ये गुंडा आख़िर किसे ललकार रहा है - कानून को या पुलिस-प्रशासन को?
सरकारी संरक्षण तो है ही, लेकिन क्या पुलिस ने भी इसे गुंडागर्दी का ‘लाइसेंस’ दे रखा है?
आख़िर इतना बेख़ौफ़ होने की ताक़त इन्हें कौन दे रहा है?
त्रिपाठी, मिश्रा, श्रीवास्तव, शुक्ला, पाण्डेय, द्विवेदी, सिंह।
जब आरक्षण नहीं होगा और अनुशंसा पर लोग चुने जाएंगे तब कुछ ऐसा ही नज़ारा सामने आएगा क्योंकि अनुशंसा करने वाले लोग घोर जातिवादी हैं।
ये तो सरकारी संस्था का परिणाम है,
प्राइवेट सेक्टर पहले से ही जातिवादियों की बपौती है।
1. ब्राह्मण समाज से आने वाला स्वतंत्र भारद्वाज ने एक दलित छात्रा के पिता का सिर फोड़ दिया, उनके सिर में सात टांके आए और वह मौत की कगार तक पहुंच गया।
2. दिल्ली सरकार में कानून मंत्री के पद पर बैठे कपिल मिश्रा ने स्वतंत्र भारद्वाज के बचाव में सिस्टम को लगा दिया
3. दिल्ली पुलिस के DCP पद पर बैठे सचिन शर्मा ने स्वतंत्र भारद्वाज द्वारा की हुई इस घटना को सिर्फ मामूली विवाद माना
4. उसके बाद दिल्ली पुलिस के ACP अजय शर्मा ने स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार करने में कोई रुचि नहीं दिखाई और वो रात भर खुला घूमता रहा
अब आपको समझ में आ गया होगा.. कि संवैधानिक व्यवस्थाओं का दुरुपयोग कौन कर रहा है लोकतंत्र का सत्यानाश कौन कर रहा है?
सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत शर्मा पहले ही बेरोजगारों, छात्रों को कॉकरोच बता चुका है
अब पीड़ित SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक अपने न्याय के लिए जाएं तो कहां जाए? - ओमेश नागर
#jantarmantarprotest #cjp #cjpprotest #paperleak #studentsucide
🚨बड़ी ख़बर🚨 राम मंदिर के CEO जितेंद्र मिश्रा बने, OBC, SC समुदाय से किसी को संभवतः दरी बिछाने का प्रमुख बनाया जाएगा,
टॉयलेट सफ़ाई का अतिरिक्त कार्यभार भी एक SC जाति को दिया जा सकता है,
घबराना नहीं है, यह हिंदुराष्ट्र का प्रथम कदम है, देश की बहुजन आबादी में कोई योग्यता नहीं है जो मंदिरों को संभाल सके,
मंदिरों पर 100% ब्राह्मणों का आरक्षण है उनसे कोई यह अधिकार नहीं छीन सकता लेकिन SC ST OBC समुदाय के आरक्षण को ख़त्म करने के लिए यह सबसे आगे रहते हैं,
इंटरव्यू में जितेंद्र मिश्रा से पूछा गया: क्या आप जनेऊ पहनते हैं, जवाब हाँ आया, ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने कहा सैलरी कितनी लोगे डिस्कस कर लें।
न्यायमूर्ति प्रकाश शर्मा चोर है 🔥🔥
यह राजस्थान हाईकोर्ट का दृश्य है, राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रकाश शर्मा पर आरोप है कि वह ब्राह्मणवाद करते हैं,
आज हड़ताल कर दी है वकीलों ने, प्रकाश शर्मा अपने पावर का दुरुपयोग करके नेपोटिज्म फैला रहे हैं, जान पहचान वालो के केस अपनी कोर्ट में ट्रांसफर करवाकर सुनते हैं, उनके मामले तुरंत लिस्ट करे जाते हैं,
बाबासाहेब अंबेडकर ने इसीलिए ब्राह्मणवाद को खतरा बताया था ।
इस झंडू बाम का नाम सौरभ द्विवेदी है. इसको आरक्षण पर बहस कराने में मजा आता है.
इस झंडू बाम ने लालनटोप में रहते हुए एक भी OBC SC ST और मुसलमान को आगे नही किया.
जब नाना पाटेकर ने पूछा पत्रकारों की टीम में कोई मुसलमान है क्या, तब ये झंडू बाम बगलें झांकने लगा.
इस झंडू की मांग है आरक्षण में समीक्षा होनी चाहिए. झंडू बाम बोलता है SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू किया जाना चाहिए.
झंडू बाम कभी अपनी जाति के ओवर प्रेजेंटेशन पर नही बोलता. झंडू बाम कभी सवाल नही करता है जहां आरक्षण नही हैं वहां अगड़ी जातियों का ओवर रिप्रजेंटेशन किस मैरिट पर है ?
झंडू बाम कभी इस मुद्दे पर बहस नही करता मीडिया में कुछेक जातियों का ओवर रिप्रजेंटेशन क्यों है ?
झंडू बाम को केवल आरक्षण में डिबेट कराने में मजा आता है. डिबेट इस बात पर होनी चाहिए मीडिया में सवर्ण जातियों का ओवर रिप्रजेंटेशन क्यों है. कौन सी परीक्षा पास कर के ये लोग आज तक, जी न्यूज, एबीपी न्यूज और इंडियन एक्सप्रेस हिंदी में नौकरी पा जाते हैं ?
पटना में छात्रों का डबल इंजन वाला भाजपा सरकार द्वारा बर्बर दमन शर्मनाक है!
अपने अधिकार और भविष्य की मांग को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज, वाटर कैनन का प्रयोग और उन्हें खदेड़ने के लिए बुलेटप्रूफ CRPF बख्तरबंद गाड़ी (MPV) का इस्तेमाल बेहद निंदनीय है।
छात्र आंदोलन के दौरान महिला अभ्यर्थी को पुलिस द्वारा घसीटकर ले जाना भी बेहद आपत्तिजनक और शर्मनाक है।
युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लाठियों और दमन से छात्रों की आवाज नहीं दबाई जा सकती।
#TRE4 #Protest #Patna #Students #StudentProtest
ये कितने बेवकूफ लोग हैं जंतर मंतर पर जाकर ऐसी बकवास कर रहे हैं।
फिर इसके बाद "आरक्षण" खत्म करने की मांग करते हैं।
इनकी ऐसी ही सोच और करतूतों की वजह से तो आरक्षण लागू हुआ था— इन्हीं लोगों से SC/ST को बचाने लिए "आरक्षण" लागू किया गया था।
SSC की विभागीय परीक्षा, जिसमें गिने-चुने अभ्यर्थी शामिल होते हैं, उसमें अगर व्यवस्थाओं की ऐसी तस्वीर सामने आ रही है तो चिंता होना स्वाभाविक है।
अभी तो CGL, CHSL और MTS जैसी बड़ी परीक्षाएँ लाइनअप में हैं, जिनमें लाखों छात्र शामिल होंगे। उस समय अगर व्यवस्थाओं में यही स्थिति रही तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
चेयरमैन साहब अभी से जिम्मेदारी से बचते हुए नजर आ रहे हैं।
"Dalit-Adivasi students are becoming doctors with -40 marks" you've probably heard this line before. Here's the truth: the General category is a flat zero out of 800. And this exact rule existed in 2023 too, with zero outrage back then. Full data breakdown in the video.