UGC कानून और NEET पेपर लीक पर सबसे ज्यादा भाजपा के वैचारिक समर्थक ही जब सोशल मीडिया पर पूरे मुखरता से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे थे,
उस समय कॉकरोचों का अंडा भी तैयार नहीं हुआ था।
उस समय भाजपा के कान पर जूं नहीं रेंगी।
समय करवट लिया, और आज वही धमेंद्र प्रधान नरेंद्र मोदी जी के गले का हड्डी बन गया है, नरेंद्र मोदी के कार्यकाल पर एक कलंक तो लग ही गया कि एक भीड़ उस नकारे मंत्री के वजह संसद तक पहुंचकर पूरे लुटियंस में अराजकता फैला दिया।
इस सरकार को इतना समझना चाहिए कि चुनाव जीतने का मतलब सरकार की लोकप्रियता का मानक नहीं होता है, जनता विकल्पहीनता में आपको चुन रही हो।
यदि ये मानक होता तो -
लालू यादव भी 15 साल सत्ता सुख भोगे थे।
It was a much bigger protest than most of us anticipated. I think for a moment, even the govt might have been caught off guard.
So, hats off to the Aam Aadmi Party. These guys understand mass psychology, especially youth psychology, better than most other politicians, and they know how to manipulate it and use it to their advantage. Even Congress, a much larger party with more resources and experience, cannot mobilize this kind of protest.
Also, this event again exposes the BJP’s ongoing vulnerability in the modern info-war. They fail to recognize a fundamental truth: the youth are inherently anti-establishment, aggressive, and driven by cultural trends. If a protest is perceived as "cool" and culturally dominant, participation explodes because joining becomes a way to signal belonging and status. You cannot counter this energy with outdated hashtags or by reminding the youth how bad things were under previous regimes. That historical comparison means nothing to a generation that never lived through it. The youth do not judge a govt against its past; they judge it against their own expectations for the future.
To fix this, the most important thing is BJP must aggressively reform its communication machinery. Fire the absolute dinosaurs running their digital strategy, those pre-2014 social media relics are still trapped in a time capsule, utterly clueless about the modern internet. These digital fossils don't understand anything beyond spamming robotic IT-cell hashtags and forcing artificial trends that everyone sees right through. In their place, the party must hire actual youth who live and breathe modern internet culture to build organic, decentralized narratives.
ये वो सरकार है जो अपने समर्थकों को अपनी ही दिहाड़ी आईटी सेल से ट्रोल कराती है। और इसके कैबिनेट मंत्री दो दिन के वामपंथी लड़कों को बगल में ड्राइंगरूम में बिठा कर उनकी मांगे सुनते हैं। इनका सारा अहंकार बस अपने ही समर्थकों और शुभचिंतकों के लिए है।
अब मुझे यह समझ में नहीं आ रहा कि सरकार ने UGC पर इंगेज नहीं किया, CBSE/NEET पर जब बोलना था, तब एक शब्द नहीं बोला, आज कैसे थूक चाटने लगे?
यही बात तो पार्टी के समर्थक सात महीने से बोल रहे थे। पूरा कम्यूनिकेशन ब्लैकआउट किया, मीडिया में अपने प्रवक्ताओं को भेजना बंद किया, हाउस अरेस्ट कराया, सुप्रीम कोर्ट से स्टे के बाद से ऐसे जताया कि उपकार कर दिया हो, आज घुटनों पर आ गए?
यही इस सरकार का पैटर्न बन चुका है। फोड़े को बवासीर बनने देते हैं, फिर जब लगता है कि अब मामला हाथ से निकल गया, तब झुक कर बात मानने को तैयार हो जाते हैं।
सुबह के 11 बजे तक यह आंदोलन सरकार के हिसाब से चल रहा था, नियंत्रण में था। अब यह स्पष्ट है कि नड्डा के घर बुलाने और तीन माँगें सुनने के बाद, तिलचट्टों का विश्वास आकाश पर है और वो CAA, किसान आंदोलन की तरह, भारत को नया, फर्जी आंदोलन देने जा रहे हैं।
अब मुझे देखना है कि माँगों पर सरकार करती क्या है! आत्महत्या करने वालों के परिजनों को एक करोड़ की माँग उचित है, क्योंकि अधिकांश पेपर लीक के कारण ही ‘सॉरी’ लिख कर मरे। दो अन्य माँगों में से एक प्रधान के त्यागपत्र की है, जो होना तो जनवरी में ही था, पर ईगो के कारण आज तक खींच लाई सरकार।
प्रधान अब इनके गले की फाँस बन चुका है।ये हर वो चीज करते हैं, जिसका इन्होंने पहले विरोध किया पर वामपंथी इनसे करवाते हैं। ‘कास्ट सेंसस’ ये राहुल के कहने पर करा रहे हैं, और प्रधान अब तिलचट्टों के कहने से जाएगा।
इनकी पुलिस आज फिर पिटी है, जैसे लाल किला वाले आंदोलन में पिटी थी। आईटीसेलिए फिर से विक्टिम बने घूम रहे हैं और यह पूछ रहे हैं कि ‘क्या ऐसे लोग विद्यार्थी हैं’? फिर अपने मालिक से पूछो न कि क्यों नड्डा से मीटिंग को तैयार हो गए?
जब सरकार अपने समर्थकों पर थूकती है तब उन्हें दूसरों का थूका चाटना ही पड़ता है।
@smitaprakash Hunger strike started by her yesterday after dinner and finished today before breakfast. I am having such hungr strikes since my birth.
Mudi should resign🤔
वामपंथी मादरचोद होते हैं। और उन्हें जहाँ भी, जो भी पेलता है, मुझे प्रसन्नता होती है। मैं इन लौड़ा-लहसुन वाली दार्शनिक बातों से वर्षों पहले ऊपर उठ चुका हूँ जो तुम हाफ-पैंट पर बेल्ट लगा कर लिख रहे हो।
मजरूह सुल्तानपुरी ने चुनौती देते हुए कहा कि बिना उर्दू के प्रयोग के हिंदी फिल्में अधूरी है!
एक गीतकार गोपाल दास नीरज ने चुनौती स्वीकार की और एक गीत लिखा था.. जिसमें एक भी उर्दू शब्द नहीं था
रंगीला रे, तेरे रंग में
यूँ रंगा है, मेरा मन....
छलिया रे, न बुझे है
किसी जल से, ये जलन
नमन श्री गोपाल दास नीरज जी को #GopaldasNeeraj
Muslim youth wearing tilak hid real identity and arrived with Hindu girl at Banke Bihari Mandir in Mathura, UP.
Devotees stopped them after identity revealed during online payment; handed over to police.
@mathurapolice
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने चुनौती दी थी कि हनुमानगढ़ी में रोज़ा नमाज हुई थी सिद्ध करके दिखाओ।
वीडियो उपलब्ध है।
अब गद्दी कौन छोड़ेगा, यह भी बताओ महाराज !