गांधी को गोली मारने के बाद गोडसे भी यही बोला था कि उसका किसी संघठन से कोई संबंध नहीं है।
अभिजीत दीपके पर हमला करने वाला राकेश गुर्जर भी यही कह रहा है।
संघी भ*वों की यह पुरानी मोडस ऑपरेंडी रही है।
इस वीडियो ने मुझे झकझोर दिया।
ये उस भारत के लाचार युवा हैं - जिसकी सरकार अपने अरबपति दोस्तों पर लाखों करोड़ लुटा देती है, पर अपने ही छात्रों को एक सुरक्षित सफ़र तक नहीं दे सकती।
चुनाव के वक़्त यही सरकार पूरी-पूरी ट्रेनों का इंतज़ाम कर लेती है। और परीक्षा देने जा रहे छात्रों के हिस्से में आती है - भीड़, घुटन, और बेबसी।
इससे बड़ा सबूत क्या होगा कि मोदी सरकार छात्रों की गूंज सुनना ही नहीं चाहती।
पर मैं वादा करता हूँ - हम यह आवाज़ उन बहरे कानों तक पहुँचाएँगे। हर छात्र को उसका हक़ मिलेगा, उसका न्याय मिलेगा।
17 जून, कोटा। यही गूंज, अब हुंकार बनेगी।
#ChhatronKiGoonj
One of the biggest scams in India is allotting centres of competitive exams in other states or 400–800 km away.
Why can’t exam centres be allotted within the same state or city as the aspirants?
Poor Common Man ..these guys don't have guts to bring oil from Iran or middle East or Russia... Bolo unko ke apna transport cost add kare aur humko deliver kare... Indian political system needs to be reformed..
E20 के नाम पर खेल या जनता के साथ धोखा?
सरकार ने E20 यानी पेट्रोल में अधिकतम 20% एथेनॉल मिश्रण की बात कही थी। लेकिन अगर कहीं 45%-50% एथेनॉल या किसी अन्य मिलावट की जा रही है, तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
जनता अपनी मेहनत की कमाई से ईंधन खरीदती है। यदि मानकों से अधिक मिश्रण किया जा रहा है तो इससे वाहन मालिकों को नुकसान, इंजन संबंधी समस्याएं और आर्थिक बोझ उठाना पड़ सकता है।
सरकार, तेल कंपनियों और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है कि पेट्रोल पंपों की नियमित जांच कराएं और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई करें। नियम सबके लिए समान होने चाहिए, चाहे कोई कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।
जनता का सवाल सीधा है — पेट्रोल में वास्तव में कितना एथेनॉल मिल रहा है? इसकी पारदर्शी जांच और रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?
#E20Petrol
#FuelQuality
#ConsumerRights
#PetrolPumpCheck
#ViralPost
We don't care whether the government wants to push E27, E85, or even E100.
What we do care about is getting the right fuel for the vehicles we own.
Stop forcing E0 and E10-compatible vehicles to run on fuels their engines were never designed to handle.
Consumers are not a testing ground for policy experiments, nor should they be forced to bear the cost of reduced compatibility, performance issues, or long-term engine damage.
Fuel choice should be based on vehicle compatibility, not government mandates.