कोई भी मानवीय भावना जब अपने प्रकर्ष पर पहुँचती है तो बहुधा उसके संप्रेषण के लिए शब्दों की भूमिका गौण हो जाती है। परम प्रसन्नता के क्षणों में आँखों से ढलका एक आँसू भी आनंद का सूचक हो सकता है। क्रोध, उदासी या प्रेम की सघनता कई बार मौन के माध्यम से भी बहुत कुछ बोल जाती है। रामकथा के प्रसंग भी हमें यही सिखाते हैं कि यदि भाव की गहराई और हृदय का विस्तार प्रभु राम जैसा अनन्य हो तो जंगल के पशु-पक्षियों और मूक पौधों तक से भी संवाद सहज ही संभव हो सकता है। 🙏🏻
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वक़ील साहब आपकी हर बात सर-आँखों पर बस ज़रा इतनी सी ज़हमत करें कि ये दो बहुत ज़रूरी बात आप भी एक-बार खुलेआम बोल भर दें। बोलिए -
“अगर इस्लाम और भारत में एक को चुनने का मौक़ा होगा तो मैं इस्लाम छोड़कर भारत चुनूँगा।”
“अगर क़ुरान शरीफ़ और संविधान में एक को चुनने का मौक़ा होगा तो मैं संविधान चुनूँगा।”
(आपके वीडियो बयान के सदियों से इंतज़ार में एक “भारतीय-सनातनी”😁🇮🇳🙏)
याद रहे भरी सभा में बेटियों के चीरहरण को चुपचाप देखने वाले चाहे राजनीति के भीष्म हों या ज्ञान के द्रोणाचार्य अंततः पतन न अपयश के भागी बनते ही हैं। मन रो रहा है, आत्मा घायल है। जातीय वैमनस्य की आग में जलते-जलते ये हम कहाँ आ पहुँचे हैं 🥲🙏🇮🇳
PM @narendramodi जी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रीयों से अपील की - महिला सुरक्षा, सम्मान एवं संरक्षण हेतु समर्पित भाव से काम करें।
घटना चाहे राजस्थान, छत्तीसगढ़ अथवा मणिपुर की हो, महिलाओं के खिलाफ़ अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
गाड़ी में कुत्तों को घुमाते हुए तो बहुत लोगों को देखा होगा, गौमाता को घुमाते हुए पहली बार देख रहा हूं.. नमन है इस बहन को देखते हैं कितने लोग लाइक करते हैं।
जय गौ माता❤️ जय गोविंदा🙏