When a train derailed in 1950s, Lal Bahadur Shashtri resigned. On the same morality I demand PM Modi, HM Amit Shah and Civil Aviation Naidu resign so that a free& fair inquiry is held. All that Modi and associates have been doing so far is galavanting which must stop must stop.
The INDIA Opposition bloc wants to have a constructive debate with the Government on the NEET exam and the prevailing paper leak issue.
It is unfortunate that we weren’t allowed to do so in Parliament today. This is a serious concern that is causing anxiety to lakhs of families across India.
We urge the Prime Minister to debate on this issue and give the students the respect they deserve.
मीडिया के साथियों से बस एक सवाल 👇
आपकी टीम में कितने दलित, आदिवासी और पिछड़े हैं?
▪️▪️राहुल गांधी द्वारा एक रिपोर्टर से पूछा गया सवाल कि ‘आपके मालिक किस जाति से आते हैं?’, बिलकुल सही निशाने पर लगा है। मीडिया के बड़े बड़े मठाधीश बड़े आक्रोश और आहत हैं। सवाल जितना वाजिब और गम्भीर है, उसकी विवेचना उतनी ही सतही, सस्ती और दिग्भ्रमित करने वाली है। हमारे देश में पत्रकारिता का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। आज़ादी के आंदोलन के समय से ही बड़े से बड़े नेता ने पत्रकारिता के माध्यम से समाज के पिछड़ों, दलितों और शोषितों की आवाज़ उठाने में अपना योगदान दिया है। यहाँ तक कि महात्मा गांधी ने अपने अख़बार का नाम ‘हरिजन’ रखा था। तब पत्रकारिता कोई धंधा नहीं हुआ करती थी, बल्कि यह अनसुनों की आवाज़ सरकार को सुनाने का माध्यम हुआ करती था।
▪️▪️लेकिन आज़ादी के बाद जब पत्रकारिता का व्यवसायीकरण हुआ तो उसमें लेखकों और पत्रकारों के ��र्ग में सवर्णों का और मालिक वर्ग में वैश्यों में दबदबा हो गया। आप किसी मीडिया हाउस के मालिक का नाम लीजिए, पूरी सम्भावना है कि वह वैश्य समाज से होगा, या समाज के अन्य किसी समृद्ध से होगा। किसी पत्रकार का नाम लीजिए तो पूरी सम्भावना है कि वह अभिजात्य वर्ग से होगा। इस क्षेत्र में पिछड़ों, दलितों, शोषितों, अल्पसंख्यकों या आदिवासियों का प्रतिभाग न के बरा��र है।
▪️▪️तो इस सवाल को बरगलाने या राहुल गांधी पर टूट पड़ने से बेहतर होगा कि हम इसका जवाब ढूँढे कि देश की 73% आबादी की आवाज़ कौन उठाएगा? क्या वो उन दलितों और वांछितों का दर्द या मनोदशा समझ सकता है, जिसे दलित बस्तियों में जाने की मनाही हो? क्या कोई मीडिया हाउस उस आदिवासी का दर्द समझ सकता है जिसने कभी उनके बीच कदम नहीं रखा और स्टूडीओ में टाई पहन कर बड़ी ही सहजता से उन्हें वनवासी और कोयला-चोर बता देत�� है? क्या कोई मीडिया-हाउस मालिक पिछड़ों को लेकर कोई कार्यक्रम प्रसारित करेगा?
▪️▪️राहुल गांधी के सवाल पर मुख्यधारा की मीडिया की बौखलाहट का कारण बिलकुल साफ़ है। पिछले 10 सालों में मीडिया ने अपना धर्म नहीं निभाया। उन्होंने सवाल पूछने बंद कर दिए हैं जिससे उनकी विश्वसनीयता शून्य हो चुकी है। ऐसे में जब राहुल गांधी इस धराशायी हो चुके लोकतंत्र ��े इस स्तम्भ के मलबे पर खड़े हो कर सवाल पूछते हैं कि ‘बताओ तुम्हारे इस पूरे मायाजाल में आम जनता की आवाज़ कहाँ है?’ तो ये बेचैनी स्वाभाविक है।
▪️▪️एक ख़ास तबके को संतुष्ट रख कर और सरकार की मिलीभगत से पैसा बनाने वाला मीडिया हमेशा सामाजिक चेतना से डरेगा। उसे हमेशा यह ख़तरा रहता है कि अगर जनसामान्य पलट कर हमसे सवाल पूछने लगा कि पत्रकारिता का चोला ओढ़ कर अजेंडा चलाने वालों, हमारी बात कब करोगे? महं���ाई की बात कब करोगे? बेरोज़गारी की बात कब करोगे? आर्थिक असमानता की बात कब करोगे?… तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी। वो इस बात से डरते हैं कि इस 73% आबादी की चेतना जागी और उन्होंने अपनी आवाज़ सुनाने के लिए कोई वैकल्पिक माध्यम चुन लिया तो हमारी दुकानें बंद हो जायेंगी। हमारा प्रायोजित प्रचार कौन देखेगा?
🎯🎯 इसलिए, राहुल गांधी का सवाल बिलकुल सटीक निशाने पर लगा है। सामाजिक चेतना से ही स��माजिक न्याय होगा… और यह हो कर रहेगा।
हमेशा कहा जाता है औकात में रह कर बात करनी चाहिए। भारतीय राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले श्री अमित शाह जी को 10वीं फेल बालक @yadavtejashwi ज्ञान दे रहा था
“लाइन में रहो, ठंडा दिया जाएगा”
अब ठंड में पसीने निकल रहे होंगे😅
आप किसी भी युवा से पूछिए कि वे क्या करना चाहते हैं?
वे आपको बताएंगे कि उन्हें रोजगार चाहिए।
लेकिन सच्चाई ये है कि आज हिंदुस्तान में युवाओं को रोजगार नहीं मिल सकता है।
हमारे युवा अपने सपनों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं, जिसके कारण उनके दिल में नफरत औ��� गुस्सा पैदा हो रहा है।
इसलिए हम 'भारत जोड़ो यात्रा' में कन्याकुमारी से कश्मीर तक चले थे और उनकी बात सुनी।
: @RahulGandhi जी
📍 पश्चिम बंगाल
आज दलाली करने वालों की इज्ज़त है, काम करने वालों की नहीं।
भारत तरक्की तभी करेगा जब एक श्रमिक का भी उतना ही सम्मान होगा जितना किसी बड़े उद्योगपति का होता है।
कामगारों का सम्मान ही रोज़गार की कुंजी है।
#BharatJodoNyayYatra