Excuse me, Fraudiye,
Am I stalking your female friend?
Since when has it become a crime to post photos available in the public domain to prove that she has her degree, but you don't?
Jab Jab Dipke Darta hai, Ladki Aage Karta hai!
लगातार आप सब के विचारों के सुनने के उपरांत, हमने एक सरलीकृत माँग पत्र बनाया है। एक बार आम सहमति बन जाए, फिर डिजिटल से धरातल की योजना बनाई जाएगी। तब तक, नीति निर्धारकों के लिए यह पत्र हम सार्वजनिक कर रहे हैं ताकि उन्हें AI से हिन्दी लिखवा कर, उसमें प्राइवेट में आरक्षण जैसी बकलोली न करनी पड़े।
@JPNadda जी, कॉपी ही करना है, तो ठीक से करो। वैसे, आपको दोबारा झुका देख कर दुख हुआ।
यह सवर्णों का सैलाव “माँगकर लेने वालों में से नहीं हैं। हम—अपने हक़ के लिए लड़ना जानते हैं! अपने अधिकारों के लिए लड़ना जानते है अपने बच्चो के भविष्य के लिए लड़ेंगे ✊ https://t.co/kX35NtkjpN
रिपोस्ट प्लीज 🙏
धिक्कार है सरकार पर कैसे लड़कियों को पिटा जा रहा है
अगर आपने आज आवाज नहीं उठाई तो अपने बच्चों के खराब भविष्य के लिए आप स्वयं जिम्मेदार होंगे
सवर्ण समाज की कोई औकात नहीं है क्या सरकार की नजर में
या सरकार सवर्णो को कीड़ा समझती है 🙏
मेरे ऊपर SC/ST एक्ट में FIR पर कुछ बातें सवर्ण समाज से
कोई मेरी माँ या बहन पर सीधे बलात्कारी मानसिकता के साथ यह कहे कि उसका विवाह मैं चंद्रशेखर के साथ करा दूँ, और मैं चुप रह जाऊँ तो आप बताइए कि मैं कैसा पुत्र या भाई हूँ?
इतने पर भी चंद्रशेखर को ले कर मैंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला, जो उक्त वीडियो में है। जब स्टेज से ब्राह्मणों की बेटियों को खींचने की बातें होती हैं और किसी SC नेता का चेला सोच-समझ कर उकसाने के लिए ऐसी बात करेगा, तो मैं चुप कैसे रहूँगा?
आज व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को समझे या न समझे, वह यह अवश्य जानता है कि SC/ST एक्ट क्या है। तो मैं जब बोलता हूँ तो मुझे अपनी सीमाएँ (चाहे वह कितनी ही अनुचित क्यों न हों) पता हैं कि क्या बोलना है, क्या नहीं।
मैं जानता हूँ कि दिल्ली पुलिस के नॉर्थ अवेन्यू स्टेशन में आजाद समाज पार्टी वालों ने कितना दवाब दे कर रात के बारह बजे यह FIR लिखवाया है जो कोर्ट में दो मिनट नहीं टिकेगा। एक भी धारा ऐसी नहीं है जो होल्ड करेगी।
मैं सैनिक स्कूल का छात्र हूँ और इतनी रैगिंग झेल चुका हूँ कि मेरा मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कस्टडी में मेरी हत्या करनी पड़ेगी, दो-चार डंडों से मेरा मनोबल नहीं टूटने वाला। और यदि मैं जीवित बच गया तो इसी स्थिति में जंतर मंतर जाऊँगा और अपने समाज से कहूँगा कि बताओ, तुम्हारी बहन और माँ को ले कर कोई ऐसी टिप्पणी करे तो क्या करोगे?
यदि ऐसा कमेंट फिर मेरे वीडियो पर आया तो मैं पुनः उसी तरीके से उत्तर दूँगा जो मैंने दिया। कानून जब तक है, संशोधन नहीं होता, मैं उसका सम्मान करूँगा और दिल्ली पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करूँगा। 92% ऐसे केस केवल प्रताड़ित करने के लिए होते हैं।
अंत में, सवर्ण समाज से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की टिप्पणी पर मुझे सह लेनी चाहिए थी क्योंकि किसी पार्टी के लोग नाराज हो जाएँगे? क्या ब्राह्मणों की माँ और बहनें इन रेप मैंटिलिटी से संचालित गुंडों के शाब्दिक बलात्कार के लिए जन्म लेती हैं?
जब आवाज़ को लाठी से दबाया जाए, तो समझो तानाशाही का दौर लौट आया है,,,
देखिए कैसे दिल्ली पुलिस महिलाओं के साथ अभद्रता पूर्ण व्यवहार कर रही है,,,
🛑शांतिपूर्ण तरीके से अपने हकों और यूजीसी और आरक्षण के विरोध में सड़क पर उतरे छात्राओं और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस प्रशासन का यह लाठीचार्ज बेहद शर्मनाक और अलोकतांत्रिक है।
क्या इस देश में शांति से सवाल पूछना और विरोध जताना भी गुनाह हो गया है?ताक़त के बल पर आवाज़ को कुचला जा सकता है, लेकिन विचारों को नहीं। हम इस दमनकारी कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हैं और प्रशासन से मांग करते हैं कि छात्रों पर हुए अत्याचार का जवाब दिया जाए।✊ सच्चाई झुकेगी नहीं, आवाज़ रुकेगी नहीं!
#UGCRollback #StudentProtest #LathiCharge
#PMOindia
#amitshah
RHA को ले कर सरकार से कुछ बात और माँगें
सरकार अपने स्तर से हर आंदोलन को फूट, समझौता, बल-प्रयोग, समझदारी, मिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन या कायरता दिखा कर कर समाप्त करना चाहती है। और वही उनका कार्य भी है। RHA का नाम ले कर कुछ लोगों ने आंदोलन के लिए जनता को बुलाया और लगभग 7000 की भीड़ जंतर मंतर पर भीतर दिखी, उतने को ही बाहर होल्ड किया गया या लौटा दिया गया।
मैंने केवल दिल्ली पुलिस की बकलोली की अवज्ञा के लिए इसमें भाग लेने की बात की और फिर बहुत लोग मेरे आने पर भी आए। फिर दुबे को पाठक जी ने नेता मान कर एक ऐसे पत्र पर चर्चा के लिए आश्वासन दिया जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं है।
खैर, मैं ये सब तकनीक देखता और जानता आया हूँ। मुझे इस विषय पर सरकार को भीड़ दिखाने की आवश्यकता न पहले थी, न आज है, पर जब चाहूँ वह भी कर सकता हूँ। अगली बार बिना अनुमति के भी ऐसा किया जा सकता है यदि प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट चाहिए, तो वह भी दिखा देंगे। पर मेरा लक्ष्य वह है ही नहीं।
सरकार को ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से इसलिए नहीं डरना चाहिए क्योंकि एक भीड़ पूरे कनॉट प्लेस को घर कर पत्थरबाजी करते हुए संसद घेर लेगी। सरकार को इसलिए डरना चाहिए कि ऐसी कोई भीड़ ही नहीं है, न ही हम संसद को घेरने की योजना बना रहे हैं।
आंदोलन की तपन केवल जलती हुई कार की आग और अराजक भीड़ की ही नहीं होती। एक तपन ऐसी भी होती है जब जनमानस को वैचारिक रूप से इतना सक्षम बना दिया जाता है कि वह स्वयं ही अपने लिए वह निर्णय कर ले, जो वो कल तक किसी दूसरे बहकावे में आ कर कर रहा था।
हमारी माँगें:
१. आरक्षण पर श्वेत-पत्र: क्या लाभ हुआ, किन जातियों को अनुपात से अधिक लाभ लगातार मिला, कौन सी जातियाँ पूर्णतः छूट गईं। आरक्षण किस तरह से देश या समाज के उत्थान में सहायक है, उसके लिए आँकड़े क्या कहते हैं आदि आदि! इस से जुड़ी हर वह रिपोर्ट और सर्वेक्षण जो सार्वजनिक नहीं हुई।
२. EWS को हर वह आर्थिक सहायता दी जाए जो SC को मिलती है। निःशुल्क कोचिंग, निःशुल्क फॉर्म, शून्य हॉस्टल और कोर्स फीस। फिर भी लोन यदि लेना पड़े तो उसमें भी सुविधा।
३. तीनों ही आरक्षित वर्ग में ‘कोटा विदिन कोटा’ लागू हो ताकि वास्तविक दलित-पीड़ित-वंचित जातियों तक लाभ पहुँचे। अभी SC और OBC में हजार-हजार जातियाँ ऐसी हैं जिन्हें नगण्य आरक्षण मिला है। और 4-5 जातियाँ ऐसी हैं जो 70-80% आरक्षण खा रही हैं। इसका आधार पारिवारिक आय हो, न कि वैयक्तिक और दुरुपयोग की संभावना न रहे।
४. मेरिट का सम्मान हो। आरक्षित वर्ग का कटऑफ किसी भी हालत में सामान्य वर्ग के कटऑफ के (से नहीं) 10% के रेंज से बाहर न जाए। और यह भी आज की परीक्षा के अधिकतम आयु सीमा वाले बच्चों की आयु के बाद समाप्त किया जाए। न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स तो तय होना ही चाहिए।
५. सरकार यह सर्वेक्षण करे कि क्या गरीबी, भेदभाव या पिछड़ेपन से किसी की बौद्धिक क्षमता घट या बढ़ सकती है? इम्पीरिकल एविडेंस सार्वजनिक करें और उसी आधार पर आरक्षण की नीतियाँ बनें।
६. एक व्यक्ति को एक बार आरक्षण मिले। एक परिवार को एक बार आरक्षण मिले।
७. दशकीय समीक्षा हो। समाप्ति के लिए एक ‘सनसेट क्लॉज’ या रोडमैप कि कब तक रहेगा।
८. कॉलेज/यूनिवर्सिटी पुस्तकालयों में पुस्तकों के अलॉटमेंट का आरक्षण तत्काल निरस्त हो। इसका कोई लॉजिक नहीं है। यह आरक्षण से लड़ कर वहाँ पहुँचे बच्चों को सताने की व्यवस्था मात्र है। या आप पुस्तकों की मात्रा दोगुनी कीजिए और वहाँ ‘आरक्षित सेक्शन’ लिख दीजिए।
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अन्य माँगें:
९. यूजीसी नियमावली निरस्त हो या समीक्षा कर के हर जाति समूह को इसमें सम्मिलित किया जाए।
१०. SC/ST Act की तर्ज पर ‘सवर्ण उत्पीड़न (रोकथाम) कानून पास’ हो। दोनों ही कानून में केस झूठा पाए जाने पर, उस केस में होने वाला दंड आरोप लगाने वाले को झेलना पड़े। आर्थिक जुर्माना भी वसूला जाए।
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सरकार और सुधिजन देख लें। बाकी, चाहे आप दुबे, शेखावत या अन्य को मैनेज कर लें, आंदोलन चलता रहेगा।
A large number of protesters have gathered at Jantar Mantar demanding reforms in the reservation system.
What are they demanding, and why has Delhi Police put up barricades?
@Keshavmalan93 is at Ground Zero. Full report coming soon across OpIndia’s platforms.
वाह @BJP4India सरकार! ये नए पैंतरे तिलचट्टों के लिए तो नहीं आज़माए थे! उनको तो दामाद बनाए घूम रहे थे! आज हमारे लिए बैरिकेड्स? याद रखना @DelhiPolice सारे बैरिकेड्स धरे रह जाएँगे, ये दोगलापन त्यागो, लोगों को स्टेज तक पहुँचने दो। मैं भी आ रहा हूँ!
दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोग पहुँच चुके हैं। कई साथी पहले से मौजूद हैं और लगातार लोगों का आना जारी है। आप भी जल्द से जल्द जंतर-मंतर पहुँचें और अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँ।
Many Groups including the Cockroach Janta Party got FULL permission to protest at Jantar Mantar. Infact the CJP rightfully got it the SECOND their boy landed at the airport.
So why the discrimination againt the General Category students & youth? Why are they DENIED permission even after applying properly, waiting, begging? One can agree or disagree with them but this is BS!
This is not democracy.
This is open discrimination.
One can absolutely disagree with the #21AugReservationHataoAndolan but they have a right to protest.
@neha_laldas@talk2anuradha@ajeetbharti
And that’s a huge FUCK YOU GENERAL CLASS from honourable @narendramodi ji! On 17/08 @DelhiPolice allowed a protest, and now they are saying that BNS 163 is applied in the whole district?
Why are you scared Modi ji? UGC time, you guys got us all under house arrest, this time you are not giving permissions? Do you seriously want this confrontation? Do you want us to take to street illegally and burn cars, stone pelt police like CJP?
When we use civilised and constitutional ways, you stop us at every instance! Our protest was not allowed in March but that Swami Prasad Maurya was allowed?
I am asking you @PMOIndia and @BJP4India, do you seriously want this confrontation? Do you want it to get more vicious? How long can you protect your shitty policies targeting General Castes?
We will answer to this. And FUCK YOU, FUCK YOUR AMBEDKAR LOVE.