दोस्त का चाय पिलाने का तरीका सबसे अलग,
चाय का गिलास दूसरे से अलग-अलग रखने के लिए चाय के ऊपर नाम लिख दिया
कमाल कर दिया हमारे, दोस्त भी गजब स्टाइल मारते हैं
*खो गई वो चिठ्ठियां जिसमें "लिखने के सलीके" छुपे होते थे, "कुशलता" की कामना से शुरू होते थे। बड़ों के "चरण स्पर्श" पर खत्म होते थे..!!!*
* "और बीच में लिखी होती थी "जिंदगी"*
*नन्हे के आने के "खबर"*
*"माँ" की तबियत का दर्द*
*और पैसे भेजने का "अनुनय"
*फसलों के खराब होने की वजह..!!!*
*कितना कुछ सिमट जाता था एक*
*"नीले से कागज में"...*
*जिसे नवयौवना भाग कर सीने से लगाती*
*और अकेले में आँखों से आँसू बहाती..!*
*माँ की आस थी "पिता का संबल थी*
*बच्चों का भविष्य थी*और
*गाँव का गौरव थीं ये चिठ्ठियाँ..
*डाकिया चिठ्ठी' लाएगा कोई बाँच कर सुनाएगा* *देख-देख चिठ्ठी को कई-कई बार छूकर चिठ्ठी को अनपढ़ भी "एहसासों" को पढ़ लेते थे*..!!
*अब तो स्क्रीन पर अंगूठा दौड़ता है*
और अक्सर ही दिल तोड़ता है*
*मोबाइल'का स्पेस भर जाए तो*
*सब कुछ' दो मिनट में 'डीलिट' होता है।*