रात की नही #सुबह होती,
बस गुज़रते वक़्त है..
जिंदगी में ना कोई,
उम्मीद की कोई किरण है..
रात दिन कड़ी मेहनत कर,
पेट को नही पालते..
तन पे कपड़े है कहां,
जो लाज को हम ठाकते..
आस भी नही पास बाकी,
ना कोई उम्मीद है..
बस गुज़रते वक़्त है और,
रात काली जिंदगी..
#अजय57#बज़्म#नारीशक्ति
@Rajesh885168 वाह सुंदर..👌👌👍
ऐसी नज़रों से हमको न यूं देखिए,
बढ़ जाती है दिल की धड़कन मेरी..
ये आंखे है क़ातिल बड़ी आपकी,
बिन बोले न जाने ये क्या कह देती..
#अजय57#संस्कृति
@sanskartwi #मौन ही मंथन है तेरा,
मन को तू ज़रा मथ के देख..
विष अमृत दोनों तुझमें,
दोनों में तू फर्क़ कर..
वाणी से ही विष निकलते,
वाणी से ही अमृत..
मान भी अपमान भी,
वाणी से ही हमें मिलती..
दूध मथ मक्खन निकलते,
छाछ हो जाता अलग..
मन को तू भी मथ के देख,
विष भी होगा अलग..
#अजय57#संस्कृति
पलकों की चौखट पर
खड़ी नींद ने हमसे कहा
सो जा दीवाने
हकीकत में ना सही
शायद
ख्वाबों में ही उसका
दीदार हो जाए
मेरे दिल ने धीरे से कहा
अये बावरे
इतना #आसान कहाँ
कि नींद आये
क्योंकि आंखों में तो
बसेरा है उसका...
#बज़्म#शब्द_शाला#संस्कार#कैप्शन