पत्थर तब तक सलामत है जब तक वो पर्वत से जुड़ा है…पत्ता तब तक सलामत है जब तक वो पेड़ से जुड़ा है.इंसान तब तक सलामत है जब तक वो परिवार से जुड़ा है..क्योंकि परिवार से अलग होकर आज़ादी तो मिल जाती है,लेकिन संस्कार चले जाते हैं …❤️🙏 🙌 🇮🇳
हर भारतीय की शान, बान और आन ,राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को भारत के संविधान द्वारा आज के दिन अपनाया गया,आएं मिलकर हमारे राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान बढ़ाये ,सब मिलकर तिरंगे का जन्म दिवस मनाये...राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के जन्मदिन पर बहुत-बहुत बधाई!🇮🇳
मैं डर रहा हूं कि शनि जब डायरेक्ट होगा 4-5 महीने बाद , तब फिर क्या होगा ? अभी तो पांच छः दिन बाद ये सारा प्रोटेस्ट रुक जाएगा । सबको लगेगा, गया सब ठंढे बस्ते में ।
खैर नीच की तरफ जाते शनि के मज़े लीजिए । मई 2014 को जब बीजेपी की सरकार बनी थी, शनि उच्च के थे ।
अब वो नीच के होने जा रहे अगले साल । समय बदल गया ।
2014 में ज्यूपीटर मिथुन में थे जब सरकार बनी । मैं आपको कई बार बता चुका मिथुन का ज्यूपीटर चोरी , गलतबयानी इत्यादि इत्यादि को दिखाता है ।
अब वही ज्यूपीटर मिथुन में चक्र पूरा करके कर्क की ओर बढ़ लिया । न्याय और दंड का रिश्ता है शनि और गुरु के बीच में ।
जो गलतबयानी की, उसके भुगतान का समय आ गया ।
#सुप्रभात ! वृद्ध अतीत में जीता है इसलिए निराश रहता है ….. युवा भविष्य में रहता है इसलिए चिंतित रहता है ….. बच्चा वर्तमान में रहता है इसलिए प्रसन्न रहता है..✍️👍🥰🤗😇🙏
शहीद-ए-आजम भगत सिंह जी के साथ सेंट्रल असेंबली में बम फोड़कर बहरी ब्रिटिश सरकार के कानों तक भारतीयों की आवाज़ पहुंचाने वाले स्वतंत्रता सेनानी बटुकेश्वर दत्त जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित करता हूँ...आप जैसे राष्ट्र के महान सेवक पर देश की माटी के कण-कण को सदैव गर्व रहेगा!
दोनों इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन बोल मौजूद हैं!
वे कैसे दिन थे जब अनशन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री को विपक्ष के नेता संसद में इस तरह सुना देते थे और वे गंभीरता से सुनते थे!
वर्ष 1947-48 के भारत-पाक युद्ध में दुश्मन सेना को नाकों चने चबवाने वाले माँ भारती के अमर सपूत, परमवीर चक्र से सम्मानित मेजर पीरू सिंह शेखावत जी के बलिदान दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ! ✍️🙏🇮🇳
सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से जबरन हटाना केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध के संवैधानिक अधिकार पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
लोकतंत्र में असहमति का जवाब संवाद से दिया जाता है, दमन से नहीं। किसी भी सरकार की परिपक्वता उसकी आलोचना सुनने और बातचीत करने की क्षमता से तय होती है, न कि विरोध की आवाज़ को बलपूर्वक दबाने से।
लोकतंत्र की असली पहचान संवाद, संवेदनशीलता और जवाबदेही है - डर, दमन और चुप्पी नहीं।
अपने जीवन का हर क्षण धर्म और मानवता के कल्याण के लिए समर्पित कर देने वाले कांची कामकोटि पीठ के 69वें शंकराचार्य, परम पूज्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती जी की जयंती पर उनके चरणों में कोटिश: नमन करता हूँ..✍️🙏🙌