समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तरप्रदेश के यशस्वी पूर्व मुख्यमंत्री, लोकसभा में सपा संसदीय दल के नेता आदरणीय श्री अखिलेश यादव जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
हम ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हैं।
शैलपुत्री
ब्रह्मचारिणी
चंद्रघंटा
कूष्मांडा
स्कंदमाता
कात्यायनी
कालरात्रि
महागौरी
सिद्धिदात्री
ये हैं मां दुर्गा के नौ रूप सनातन संस्कृति में हर बेटी देवी का रूप मानी गई है , वो पूजनीय है। ये बताने का उद्देश्य है कि कुछ इंसान रूपी हैवान पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी के ऊपर लांछन लगाकर अपनी कुंठा को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं। पूछना यह था कि वो कौन से धर्म के अनुयायि हैं। क्यूंकि ऐसे लोग सनातन संस्कृति कि परछाई से भी परे हैं।
बिल्कुल साफ शब्दों में सुनिए जो लिखा और शेयर किया जा रहा है यह राजनीति नहीं मानसिक दिवालियापन है, जब कुत्ते को रोटी ना मिले तो वह भौंकने लगता है काटने को दौड़ता है और अंत में उसका क्या इलाज होता है यह सब जानते हैं । जिस बेटी के पिता के सवालों के जवाब नहीं दे सकते ? तर्कों का सामना नहीं कर सकते, खरीद नहीं सकते , झुका नहीं सकते , दबा नहीं सकते ,सही को सही - गलत को गलत कहने से रोक नहीं सकते। उस व्यक्ति के आत्मविश्वास को तोड़ने के लिए बेटी का सहारा लेकर झूठ का बाजार सजाकर डैमेज करने की कोशिश की जा रही है। इतिहास गवाह है जब एक पुरुष समाज के लिए और सच्चाई के लिए लड़ाई लड़ता है तो उसके घर की महिलाओं के सम्मान को उछाला जाता है यह कोई नई बात नहीं है। पूछना यह था कि जो इतना घटिया लिख रहा है वह अपने घर की बहन और बेटियों को किसी नजर से देखते होगा।
एक सवाल पार्टी कि लीगल सेल से
क्या आप लोग सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री के साथ सेल्फी खिंचवाने के लिए बने हैं। जिस संगठन के पदाधिकारी और सदस्य अपने नेता और उसके सम्मान के लिए ना लड़ सके उन्हें स्वता लाल टोपी और लाल झंडा त्याग देना चाहिए। कोई भी कार्यक्रम हो ये लीगल सेल वाले पदाधिकारी सेल्फी और रीलबाजी में सबसे आगे नजर आते हैं । मगर जब जमीन पर लड़ाई लड़ना हो तो इन्हें सांप सूंघ जाता है । इनको शर्म भी नहीं आती है कि नेता से कैसे आंख मिलाएंगे । अक्सर धरना प्रदर्शन में न जाने कितने बच्चे जेल जाते हैं मुकदमा लेते हैं तब भी इनका कुछ पता नहीं होता है । ऐसे बच्चों की मदद सीधे या तो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष करें या बच्चे खुद अपनी कानूनी लड़ाई लड़ते हैं । फिर सवाल खड़ा होता है कि ऐसी लीगल टीम का क्या फायदा जो कान में तेल डालकर सोने के लिए और सेल्फी लेने के लिए बनी है।
एक सवाल खाकी से!
पूछना यह था कि जब आप लोग वर्दी पहनते हैं तो क्या दो अलग-अलग शपथ दिलाई जाती है सत्ता पक्ष और विपक्ष के लिए। वो इसलिए कि अगर कोई जानबूझकर या गलती से सत्ता पक्ष नेताओ के लिए कुछ भी लिख देया बोल दे तो स्वतः संज्ञान ले लेते हैं और थाने से 2 घंटे के बाद लंगड़ाते हुए वीडियो जारी हो जाती है। इतना ही नहीं हाथ जोड़कर नाक रगड़वा कर माफी भी मंगवाई जाती है। मगर जब बात एक पूर्व मुख्यमंत्री की , उसके परिवार की और महिला सम्मान की आती है तब यह कानून के रखवाले , नारी सम्मान की कसम खाने वाले , खाकी वर्दी वालों का जमीर क्यों मर जाता है।
साहब बेटी तो बेटी होती है , आपकी भी होगी ! बेटियों के लिए तो कम से कम इंसाफ का पैमाना एक रखिए!
सपा सांसद श्री Lalji Verma के नेतृत्व में 30 मई को विशाल धरना प्रदर्शन 🔥🔥
पीडीए आरक्षण घोटाला,
पीडीए आरक्षित सीटों की लूट,
पेपर लीक, डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस और
यूरिया डीएपी की बढ़ती कीमतों एवं किल्लत के विरोध में...
समाजवादी पार्टी 30 मई को अम्बेडकरनगर में कलेक्ट्रेट पर सुबह 10 बजे से विशाल धरना प्रदर्शन करेगी।
सपा सांसद @LaljiVermaSP जी आरक्षण घोटाले की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक मजबूती से लड़ रहे हैं।
प्रधानमंत्री को विश्वगुरु बनने का अच्छा मौका मिला था.
प्रधानमंत्री इजराइल गए थे. वहां से बिना परमिशन ईरान चले जाते, जैसे पाकिस्तान गए थे.
वहां जाकर बीच में खड़े हो जाते और कहते कि मैं वॉर नहीं होने दूंगा. ये कर देते तो विश्वगुरू बन जाते.
- अखिलेश यादव
“थाने के अंदर गुंडों ने मुझे रेप की धमकी दी, माँ बहन की गालियाँ लगातार दे रहे थे”
पिछड़े दलित बेटियों को गाली देने वाले गुं*डो पर सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए
यूपी के देवरिया में जमीनी विवाद को लेकर फिल्मी स्टाइल में गोलियां चल गई
वीरेंद्र यादव नाम के व्यक्ति ने दो साल जमीन की रजिस्ट्री कराकर पक्की दीवार बनवा दी. इसमें दूसरा पक्ष अशोक पांडे और विनोद पांडे कुछ लड़कों के साथ राइफल लेकर विवादित जमीन पर पहुंच गए और दीवार तोड़ने लगे. वीरेंद्र यादव ने इसका विरोध किया तो पांडे बंधुओं ने राइफल से गोली चलाना शुरु कर दिया
“सड़कें ख़ामोश हो जाएँ तो संसद आवारा हो जाती है”—
लोहिया की यह बात आज ममता बनर्जी जी रही हैं।
जब संसद सवालों से भागती है,
तब सड़कें लोकतंत्र की आवाज़ बनती हैं।
ममता सत्ता के गलियारों में नहीं,
जनता के बीच खड़ी राजनीति का नाम हैं।
यह विरोध नहीं,
लोकतंत्र को ज़िंदा रखने की ज़िद है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लखनऊ से सैफई लौट रहे थे उनका काफिला एक कस्बे से गुजर रहा था। एक स्थान पर सड़क के किनारे भीड़ दिखी। अखिलेश जी ने गाड़ी रुकवाई और पूछा “क्या मामला है?”
एक युवक बोला “साहब… झगड़ा हो गया है… एक लड़का बुरी तरह घायल है…
अखिलेश जी ने कहा "100 नंबर पर कॉल किया"
लड़के ने कहा "100 नंबर कहां लगता है साहब और लग भी जाए तो पुलिस आती नहीं है"
अखिलेश जी ने जेब से अपना फोन निकाला। उन्होंने खुद 100 डायल किया। कई बार लगाने के बाद घंटी गई… कुछ सेकेंड। कोई जवाब नहीं।
उन्होंने फिर मिलाया। फोन कट गया। तुरंत काफिले से एंबुलेंस को बुलवाया गया। घायल को अस्पताल भेजा गया। माहौल संभल गया।
लेकिन अखिलेश जी का मन नहीं संभला। गाड़ी आगे बढ़ी, लेकिन वे खामोश थे। कुछ देर बाद उन्होंने कहा “दंगे अचानक नहीं होते। दंगे तब होते हैं, जब छोटी घटनाओं पर समय से पुलिस नहीं पहुँचती।”
उसी रात उन्होंने तय किया अब पुलिस का इंतज़ार नहीं कराया जाएगा। अब पुलिस खुद पहुँचेगी।
अब एक कॉल पर
लोकेशन ट्रैक होगी।
इसी हकीकत को बदलने का फैसला लिया अखिलेश यादव की सरकार ने। सोच साफ थी — पुलिस का इंतज़ार नहीं कराया जाएगा, पुलिस खुद पहुँचेगी। इसी सोच से 26 जुलाई 2016 को उत्तर प्रदेश में डायल 100 (UP-100) की शुरुआत हुई।
डायल 100 सिर्फ एक नंबर नहीं था, यह पूरी व्यवस्था का पुनर्गठन था। पहली बार यह तय किया गया कि राज्य भर में आने वाली हर आपात कॉल एक ही केंद्रीय कंट्रोल रूम में जाएगी। लखनऊ में अत्याधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाया गया, जहाँ कॉल रिकॉर्डिंग, कॉल ट्रैकिंग और जवाबदेही तय की गई। अब कोई भी कॉल “गुम” नहीं हो सकती थी।
इसके साथ ही पूरे प्रदेश में PRV (Police Response Vehicle) उतारी गईं। ये साधारण जीप नहीं थीं, बल्कि GPS, वायरलेस सिस्टम, टैबलेट और सीधे कंट्रोल रूम से जुड़ी गाड़ियाँ थीं। जैसे ही कॉल आती, सबसे नज़दीकी PRV को तुरंत अलर्ट जाता और उसका मूवमेंट लाइव ट्रैक किया जाता। देरी होने पर जवाब तय था।
सबसे बड़ा बदलाव आया समय में। डायल 100 से पहले कई जिलों में पुलिस को मौके पर पहुँचने में औसतन 45 मिनट से 1 घंटा लग जाता था। डायल 100 के बाद यह समय घटकर 15–20 मिनट तक लाया गया। कई शहरी इलाकों में तो पुलिस 10 मिनट के भीतर पहुँचने लगी। यही फर्क कई बार झगड़े को बढ़ने से पहले ही रोक देता था।
डायल 100 का असर सिर्फ अपराध पर नहीं, भरोसे पर पड़ा। महिलाओं, बुज़ुर्गों और आम नागरिकों को पहली बार यह एहसास हुआ कि फोन करते ही कोई न कोई रास्ते में है। घरेलू हिंसा, सड़क दुर्घटना, छेड़छाड़, मारपीट या अफवाह हर स्थिति में पुलिस की मौजूदगी पहले से तेज़ हुई। कई मामलों में पुलिस के पहुँचते ही माहौल शांत हो गया, बिना लाठी और बिना टकराव के।
इस सिस्टम में पुलिस की भी जवाबदेही बदली। अब थाने में बैठकर रिपोर्ट लिखना काफी नहीं था, बल्कि सड़क पर दिखना जरूरी हो गया। हर PRV की लोकेशन, हर कॉल का समय और हर कार्रवाई का रिकॉर्ड सिस्टम में दर्ज होने लगा। लापरवाही अब छुप नहीं सकती थी।
यही फर्क होता है
सत्ता और सेवा में।
भाजपा OBC के लिए संविधान द्वारा निश्चित 27% आरक्षण में से 1/3 आरक्षण को नकारकर अपना असली ‘संविधान-आरक्षण विरोधी’ चेहरा दिखा रही है। अब नये नवेले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जी सामने आएं और ओबीसी आरक्षण की हक़मारी से बचाएं।
विवरण:
उत्तर प्रदेश राजस्व विभाग लेखपाल भर्ती-
• कुल पद हैं - 7994
• OBC के लिए सिर्फ 1441 पद आरक्षित
• 27 % ओबीसी आरक्षण के हिसाब से कुल 2158 पद OBC के लिए आरक्षित होने चाहिए
• ओबीसी के 717 लेखपाल के पद की भर्ती होने से पहले लूट
• EWS को 10 परसेंट के हिसाब से पूरी 792 पोस्ट दी गयी हैं
खूब बधाई Dr. @Kanchanyadav000 जी ,
पिछड़ी महिलाओं का PhD कर पाना तो दूर पढ़ना भी शायद संभव ही नहीं होता अगर फूले दंपत्ति ना होते , बाबा साहब ना होते और मंडल कमीशन से निकला आरक्षण ना होता।
लड़ाई पढ़ाई ज़िंदाबाद।
सामाजिक न्याय ज़िंदाबाद।
डॉक्टरेट प्राप्ति की तस्वीरें मैं कई दिनों बाद साझा कर रही हूँ। चुनाव की व्यस्तता और फिर पारिवारिक कार्यक्रमों के कारण मैं यह बताने का अवसर नहीं पा सकी कि मैंने डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त कर ली है।
इस यात्रा में मेरे परिवार के बाद सबसे महत्वपूर्ण भूमिका जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और मेरे प्रोफेसर एवं मार्गदर्शक प्रोफेसर Andrew M. Lynn की रही, जिन्होंने School of Computational and Integrative Sciences, JNU में
“Application of Interpretable Machine Learning on Cancer Somatic Mutations " विषय पर मुझे गाइड किया।
मेरा एक रिसर्च Nature Scientific Report प्रकाशित है और अन्य Research भी जल्द ही प्रतिष्ठित जर्नलों में प्रकाशित होने वाले हैं।
मेरा थीसिस मैं अपने गुरु, मार्गदर्शक, और गरीबों के मसीहा आदरणीय @laluprasadrjd जी को समर्पित करती हूँ।
आदरणीय @yadavtejashwi जी को विशेष धन्यवाद, क्योंकि चुनाव जीतने-हारने से परे वे लालू जी के संघर्ष और विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं। “लड़ो पढ़ाई करने को, पढ़ो समाज बदलने को” यह संघर्ष श्री तेजस्वी जी शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य की बात कर और भी मजबूती प्रदान करते हैं।
मंडल आयोग के 2 सिफारिशों को लागू करवाने वाले नेताओं का योगदान इस पीढ़ी और आने वाली पिछड़े समाज की पीढ़ियाँ सदैव याद रखेंगी।
हृदय से धन्यवाद:
आदरणीय लालू प्रसाद यादव जी
आदरणीय वी. पी. सिंह जी
आदरणीय मुलायम सिंह यादव जी
आदरणीय शरद यादव जी
आदरणीय बहन मायावती जी
आदरणीय रामविलास पासवान जी
आदरणीय अर्जुन सिंह जी
एयरपोर्ट पर एक कार्यकर्ता ने अखिलेश जी का हाथ पकड़ा और खींचकर कुछ दूर ले गया और फिर अपनी बात कही
ये अपनापन, ये प्यार और ये विश्वास आपको कहीं और नहीं मिलेगा
सत्ता और सरकार के संरक्षण में काम कर रहा है कफ सिरप माफिया-राजीव राय, सांसद, घोसी
राय साहब…इतने संजीदा मसले पर भी सरकार गूंगी और बहरी बन गई है…एक गुंडे को बचाने में जुटी है!!
@RajeevRai
"नीतीश सरकार और मोदी सरकार के वोट देकर बेकार किए!"
इन महिलाओं की बस इतनी गलती थी कि अपना मत इन्हें दिया, क्या इसकी इतनी भारी कीमत इनसे वसूलेंगे?
RSS के पार्किंग के लिए मंदिर के जगहों पर कब्जा हो जाता है!
वहीं भूमिहीन बिहारी महिलाओं के ऊपर पुरुष पुलिस से लाठियां बरसाई जाती है।