नासिर-जुनैद को ज़िंदा जलाकर मारने वाले आरोपी के साथ ख़ुशगवार माहौल में फोटो खिंचवाने वाले फरीदाबाद पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर राजेश दुग्गल साहब से पूछना है कि आप इस तरह से पुलिस का इक़बाल बुलंद कर रहे हैं ?
मुख्यमंत्री @NayabSainiBJP जी क्या एैसे चलेगी प्रदेश की क़ानून व्यवस्था ?
@FBDPolice@police_haryana
मुस्लिम लड़के को अपरहण कर जंगल में ले जाया गया,बेल्ट और लोहे के तारों से पिटाई की,जख्मो पर नमक लगाया गया ..💔😢
मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के ग्राम सालीवाड़ा निवासी ITI छात्र सोहेल खान उर्फ वहीद खान पर...
जबसे अयोध्या में चंदा चोरी हुई है, तब से योगी जी के बुलडोजर सर्विसिंग पर चले गए हैं : @rajeevranjanMKH
◆ देखिए माहौल क्या है, राजीव रंजन के साथ
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उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ ज़िले अंतर्गत छर्रा थाना इलाके से एक बेहद हैरान करने वाली और दर्दनाक खबर सामने आई है. यहां एक गांव में सब्जी खरीदने निकली नाबालिग किशोरी को किशनगोपाल और संजू वाल्मीकि ने बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया. आरोप है कि दोनों दरिंदों ने पीड़िता को उसके घर से 4 किलोमीटर दूर एक सुनसान मकान में ले जाकर जबरन शराब पिलाई और फिर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म की वीभत्स घटना को अंजाम दिया. दरिंदों की क्रूरता के चलते किशोरी लहूलुहान होकर बेहोश हो गई, जिसे गंभीर हालत में महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है. वहीं पुलिस ने दोनों आरोपियों को दबोच लिया है.
हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाने वाले शामली के आयुष मलिक (उर्फ मोहम्मद अली) ने अब दाढ़ी कटवाकर और मुंडन करवाकर फिर से हिंदू धर्म में वापसी कर ली है। उसने बयान दिया है, "मम्मी-पापा, मैं आपकी परेशानी को देखते हुए वापस हिंदू धर्म में लौट आया हूं।"
आयुष ने अपनी मर्जी से इस्लाम कबूला था और एक मुस्लिम लड़की चांदनी कुरैशी से निकाह किया था। लेकिन बाद में हिंदू संगठनों के भारी दबाव के चलते शामली पुलिस ने चांदनी, उसके परिजनों और 3 मौलानाओं के खिलाफ जबरन धर्मांतरण की एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल में डाल दिया। जो आयुष कल तक मीडिया के सामने अपनी मर्जी से इस्लाम कबूलने की गवाही दे रहा था, उसने एक पूरे मुस्लिम परिवार को बर्बाद करने के बाद अब सरेंडर कर दिया है।
पत्रकार जाकिर अली त्यागी ने इस गंभीर मामले पर तीखे सवाल उठाते हुए लिखा है कि आखिर आयुष मलिक का क्या बिगड़ा? ना उस पर कोई एफआईआर हुई और ना ही उसकी गिरफ्तारी हुई। उसने एक मुस्लिम लड़की की जिंदगी से खिलवाड़ किया, उसे और उसके परिवार को जेल भिजवा दिया और खुद वापस हिंदू बन गया। त्यागी ने तंज कसते हुए कहा कि यह इंसान तो डरपोक निकला, जिसने संगठनों के आगे घुटने टेक दिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उस बेगुनाह मुस्लिम लड़की और उसके बेबस परिवार का क्या होगा, जो सिर्फ इस आयुष मलिक की वजह से आज सलाखों के पीछे अपनी जिंदगी के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं? कौन देगा इस परिवार को इंसाफ?
अमेरिका के मशहूर इस्लामी दाई (धर्म प्रचारक) शेख उस्मान बिन फारूक कई वर्षों से पश्चिमी देशों में इस्लाम का संदेश पहुंचाने का काम कर रहे हैं। 2022 के क़तर फीफा वर्ल्ड कप के दौरान भी उन्होंने और उनकी टीम ने अलग-अलग जगहों पर दावत-ए-इस्लाम कैंप लगाए थे। वहां लोगों को इस्लाम के बारे में बताया गया, क़ुरआन के अनुवाद बांटे गए और सवाल-जवाब के कार्यक्रम आयोजित किए गए। उनकी टीम का दावा है कि इन गतिविधियों के दौरान सैकड़ों लोगों ने इस्लाम स्वीकार किया।
अब अमेरिका में चल रहे फीफा वर्ल्ड कप के दौरान भी शेख उस्मान बिन फारूक अपनी संस्था One Message Foundation के साथ "World Cup Dawah Tour" चला रहे हैं। स्टेडियमों के बाहर और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को इस्लाम के बारे में जानकारी दी जा रही है और दुनिया भर से आए लोगों से बातचीत की जा रही है।
शेख उस्मान की टीम से जुड़े एक नव-मुस्लिम अमेरिकी युवक ने दावा किया कि वर्ल्ड कप शुरू होने के बाद से अब तक अमेरिका के अलग-अलग शहरों में 400 से अधिक लोगों ने इस्लाम स्वीकार किया है। उसने बताया कि केवल एक दिन में बोस्टन में 10–11 लोगों ने इस्लाम अपनाया, जबकि उससे एक दिन पहले भी 10 लोगों ने कलिमा पढ़ा था। उसके अनुसार अब यह संख्या 400 से अधिक हो चुकी है।
उसने यह भी कहा कि कुछ लोग दावा करते हैं कि इस्लाम तलवार के दम पर फैला, लेकिन उसका कहना है कि जब लोगों को इस्लाम को सीधे समझने और मुसलमानों से मिलने का मौका मिलता है, तो वे अपनी मर्जी से इसे स्वीकार करते हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि 400 से अधिक लोगों के इस्लाम स्वीकार करने का यह दावा शेख उस्मान बिन फारूक और उनकी टीम का है। इसका उद्देश्य उनकी दावती गतिविधियों के प्रभाव को बताना है।