पूरी स्क्रिप्ट पहले से तैयार थी लगता है. पूरी क्रोनोलॉजी समझिए.
28 अगस्त 2014 में प्रधानमंत्री Jandhan Yojna को लागू किया. इस योजना के तहत जीरो बैलेंस पर हर व्यक्ति का बैंक में खाता खुलवाया गया.
5 सितंबर 2014 को रिलायंस इंडस्ट्रीज ने JIO लॉन्च किया
8 नवंबर 2016 में रात 8 बजे प्रधानमंत्री ने पूरे देश में नोटबंदी लागू कर दी.
खाता इसलिए खुलवाया गया ताकि नोट बंदी लागू होने के बाद लोग बैंक में कैश जमा कर सकें.
जानकार बताते हैं 99% से ज्यादा कैश बैंकों में वापस आ गया. नोट बंदी के बाद दो उद्योपतियों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ.
इमरजेंसी की तरह नोटबंदी भी भारतीय इतिहास पर कलंक है. मुट्ठीभर लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए आम जनता और गरीब को लाइन में खड़ा किया गया.
नोट बंदी को DHURANDHAR 2 महिमा मंडित कर रही है. आदित्य धार को चाटुकारिता के लिए पूरे राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए.
@news24tvchannel मुस्लिम को न्यू इंडिया में क्या कुछ सहना पड़ रहा है कोई पाकिस्तानी बोलता हैं तो कोई मुस्लिम की दाढ़ी और टोपी को देखकर हत्या कर देते हैं क्या भारत के मुसलमान इंसान नहीं?
@Pari__ag अगर लड़का लकड़ी एक दूसरे को पसंद करते हैं पर दोनों का परिवार अच्छा हैं तो बहुत ही अच्छा हैं पैरेंट्स को बच्चों को स्पोर्ट करें और उनके अच्छे जीवन की कामना करें।
सरफ़राज़ को फांसी की सज़ा हो गई। सरफ़राज़ पर गोपाल मिश्रा की हत्या करने का आरोप था। गोपाल मिश्रा बहराइच के महसी में निकाले जा रहे एक धार्मिक जुलूस के दौरान ‘दूसरे’ के घर की छत पर ‘अपने’ धर्म का झंडा लगा रहा था। इस जुलूस में भड़काऊ नारेबाज़ी होने और विवादित ‘गाने’ बजाए जाने पर हिंसा हुई थी। बहरहाल सरफ़राज़ को फांसी की सज़ा हुई है, और 9 अन्य लोगों को उम्र कैद की सज़ा हुई है।
खैर! इंसान की जान लेने वाला गुनहगार बचना नहीं चाहिए। उसे सज़ा मिलनी ही चाहिए। लेकिन क्या कारण है कि महज़ एक साल में गोपाल मिश्रा हत्याकांड के आरोपितों को सज़ा हो जाती है और अखलाक हत्याकांड के आरोपितों को दस साल बाद भी सज़ा नहीं हो पाई? आखिर क्या कारण है कि यूपी सरकार अखलाक हत्याकांड के आरोपितों से आरोप वापस लेने के अन्यायपूर्ण कदम उठाती है?
भारतीय नागरिक के तौर पर अखलाक के परिवार को क्या इंसाफ की दरकार नहीं है? क्या एक ही प्रदेश में दो कानून लागू हैं?
हे भैणा! पहले भी बोला है फिर दोहरा देता हूँ, तुम्हारे पास ना ताक़त की कमी है ना धन की, तुम डराकर या लालच देकर मतांतरण कराकर देख लो तुम्हें तुम्हारी ताक़त और दौलत की औक़ात पता चल जाएगी और हमें हमारे ईमान की ताक़त पता चल जाएगी।
और ये क्या ऊर्वज पूर्वज का रट्टा लगाए रहती हो।अगर यही रट्टा हमने तुम्हारे बारे में लगा दिया तो तुम्हारी ही मान्यता के अनुसार तुम्हारे पूर्वज इंसान छोड़िए बल्कि बंदर मिलेंगे। इसलिए दफ्न है जो बात उस बात को मत छेड़िए।
हे फसादन भैणा! तुम्हें खुद हरामखोरी की लत लग चुकी है, इसलिए तुम्हें हर कोई हरामखोर ही दिखेगा। वास्तविकता यह है कि हरामखोरी तुम्हारी नस-नस में है। इस दुनिया में मुसलमान जहां भी हैं, अपने दम पर हैं, अपनी मेहनत अपने टैलेंट के दम पर हैं। लेकिन कुछ हरामखोर ऐसे हैं जो अपनी हरामखोरी को छुपाने के लिए दूसरों के प्रति नफरत फैलाते रहते हैं। उन हरामखोरों पर लानत है। सोचिए! अगर मुसलमान ना हों तो ये हरामखोर तो भूखे मर जाएं, या भीख का कटोरा लेकर भीख मांगते नज़र आएं।