अब अपने जाति के लिए कर रहे है तो आप लोग के पेट में दर्द हो रहा है सही तो कह रहे आरक्षण के आधार आर्थिक होगा तभी इनकी जाती को आरक्षण का लाभ मिलेगा । संविधान का शासन में अब कोई किसी को नहीं दबा सकता है अगर कोई दबा सकता है तो इनके केटेगरी के लोग ही आरक्षण का मलाई खा कर आर्थिक रूप से कमजोरो का हिस्सा खा जाते है
क्रीम लेयर और आर्थिक आधार ही आरक्षण का असली पैमाना होना चाहिए @KraantiKumar
@raviadi7793 अरे भाई तू रिजर्वेशन के चक्कर में प्राइवेट सेक्टर को भगाएगा क्या इंडिया से
क्युकी ओ टैलेंट देखते है ये नहीं देखते है की पानी पाँच हज़ार साल से नहीं पिया है 😁😁
ओ क्यों रहेगा ओ भी लिख दीजिए
पाँच हज़ार साल से पानी वाली बात 😁😁
बाक़ी नहीं चाहिए आरक्षण हम खैरात वाले नहीं है मेहनत से पहुंचते है
और आवाज उठ रही है रिफार्म की तो इकोनॉमिक आधार होगा तो कल्याण और फ़ायदा पिछड़ी और दलित जातीय ही पाएंगी क्युकी ग़रीब ज़्यादातर वही है
लेकिन उनमे मलाई खा रही जाती के लोग ही प्रतिनिधित्व कर रहे तो भड़कायेंगे तो ज़रूर
लेकिन पाँच हज़ार साल वाली थ्योरी अच्छी लगती है 😁😁
आप किसी मंच में मुझसे ही हिम्मत है तो संवाद कर लीजिए आरक्षण पे वोट बैंक आपके ग़रीब है नेता जी आर्थिक आरक्षण सपोर्ट कीजिए उनको ही फ़ायदा होगा
देश के विकास के लिए यह अनिवार्य है कि हम केवल अधिकारों की बात न करके योग्यता को भी बढ़ावा दें।
समाज के वंचित, दलित और पिछड़े वर्गों के परिवारों को अपनी प्राथमिकताओं पर गहराई से विचार करने की आवश्यकता है। मेहनत-मजदूरी करके कमाए धन को दैनिक खर्चों या व्यसनों में गंवाने के बजाय बच्चों की उच्च शिक्षा और अच्छे संस्कारों पर खर्च करना चाहिए। इसके विपरीत, सामान्य वर्ग जैसे ब्राह्मण और अन्य जनरल कास्ट के कई परिवार बेहद सीमित संसाधनों और कम खान-पान में भी अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई को हमेशा प्रथम स्थान पर रखते हैं। यदि समाज को मुख्यधारा में लाना है, तो वंचित परिवारों में शिक्षा के प्रति इस जागरूकता को बढ़ाना सबसे पहली जरूरत है।ना की आरक्षण का लॉलीपॉप
देश में जातिगत भेदभाव को पूरी तरह समाप्त करने के लिए आरक्षण का आधार जाति के बजाय पूर्णतः आर्थिक Economic होना चाहिए। जातिगत आरक्षण कहीं न कहीं समाज में विभाजन और भेदभाव को बनाए रखता है, जबकि आर्थिक आधार पर आरक्षण देने से जातिगत दूरियां अपने आप खत्म हो जाएंगी।
संविधान में आरक्षण को एक नीति के रूप में स्थान दिया गया है, लेकिन इसमें निरंतर समीक्षा का प्रावधान भी शामिल है यह व्यवस्था हमेशा के लिए अपरिवर्तित रखने के उद्देश्य से नहीं बनाई गई थी। इसलिए संविधान के इन नियमों को वोट बैंक की राजनीति का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। राजनीतिक दलों के कोर वोटर वास्तव में गरीब और पिछड़े लोग ही हैं, और यदि आरक्षण का आधार शुद्ध रूप से आर्थिक कर दिया जाए, तो इसका सीधा और वास्तविक लाभ इन्हीं जरूरतमंदों को मिलेगा। देश को प्रगति के पथ पर आगे ले जाने के लिए अब आर्थिक सुधारों और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करना अत्यंत आवश्यक है।
निजी क्षेत्र (Private Sector) में हमेशा योग्यता और मेरिट को प्राथमिकता दी जाती है, जिसकी प्रतिस्पर्धा में कई बार आरक्षण के माध्यम से प्रवेश पाने वाले छात्र पीछे छूट जाते हैं। देश के विकास के लिए यह अनिवार्य है कि हम केवल अधिकारों की बात न करके योग्यता को भी बढ़ावा दें।
समाज के वंचित, दलित और पिछड़े वर्गों के परिवारों को अपनी प्राथमिकताओं पर गहराई से विचार करने की आवश्यकता है। मेहनत-मजदूरी करके कमाए धन को दैनिक खर्चों या व्यसनों में गंवाने के बजाय बच्चों की उच्च शिक्षा और अच्छे संस्कारों पर खर्च करना चाहिए। इसके विपरीत, सामान्य वर्ग जैसे ब्राह्मण और अन्य जनरल कास्ट के कई परिवार बेहद सीमित संसाधनों और कम खान-पान में भी अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई को हमेशा प्रथम स्थान पर रखते हैं। यदि समाज को मुख्यधारा में लाना है, तो वंचित परिवारों में शिक्षा के प्रति इस जागरूकता को बढ़ाना सबसे पहली जरूरत है।
देश में जातिगत भेदभाव को पूरी तरह समाप्त करने के लिए आरक्षण का आधार जाति के बजाय पूर्णतः आर्थिक Economic होना चाहिए। जातिगत आरक्षण कहीं न कहीं समाज में विभाजन और भेदभाव को बनाए रखता है, जबकि आर्थिक आधार पर आरक्षण देने से जातिगत दूरियां अपने आप खत्म हो जाएंगी।
संविधान में आरक्षण को एक नीति के रूप में स्थान दिया गया है, लेकिन इसमें निरंतर समीक्षा का प्रावधान भी शामिल है यह व्यवस्था हमेशा के लिए अपरिवर्तित रखने के उद्देश्य से नहीं बनाई गई थी। इसलिए संविधान के इन नियमों को वोट बैंक की राजनीति का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। राजनीतिक दलों के कोर वोटर वास्तव में गरीब और पिछड़े लोग ही हैं, और यदि आरक्षण का आधार शुद्ध रूप से आर्थिक कर दिया जाए, तो इसका सीधा और वास्तविक लाभ इन्हीं जरूरतमंदों को मिलेगा। देश को प्रगति के पथ पर आगे ले जाने के लिए अब आर्थिक सुधारों और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करना अत्यंत आवश्यक है।