When they taught us Islam in school, in a Muslim country, the teachers were not embarrassed. They were very proud of it.
They taught how Islam invaded other lands, defeated them, and converted them under the sword. They did not hide it. They celebrated it. They called it “futuhat” which means “openings.” Those countries were “closed.” Muslims “opened” them with the blade.
Fath al-Andalus (Spain). Fath Misr (Egypt). Fath North Africa. Fath al-Maghrib al-Aqsa (Morocco). All of it: conquest. All of it: taught as glory.
Now they sell the West a different product: “Islam did not spread by the sword.”
That is not history. That is a sales pitch for people who never sat in those classrooms.
Hindu Americans, candidates & our allies shouldn’t be subjected to public targeting simply for engaging with Hindu organizations or advocating for Hindu concerns. The message is chilling: speak up, and you too may be put on a list. That has a very real silencing effect.
ओवैसी कह रहे हैं कि चूँकि बाबर उज़्बेकिस्तान से आया था और कल उज़्बेकिस्तान ने हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया और उन्हें राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया, इसलिए हम सबको अब बाबर से नफ़रत नहीं करना चाहिए।
कमाल का बेवक़ूफ़ी भरा तर्क है।
मुझे नहीं मालूम था कि ओवैसी इतने बेवक़ूफ़ हैं।
आज हमारी सरकार UPA के ज़माने से अफ़ग़ानिस्तान को हर प्रकार की मदद कर रही है, तो क्या मोहम्मद गोरी और गजनी को उसके पापों के लिए माफ़ कर देना चाहिए ?
हम सब इंग्लैंड जाते हैं।
ढेर सारे भारतीयों ने अपना दूसरा घर लंदन में बसा लिया है।
क्या जनरल डायर को माफ़ कर देना चाहिए ?
रॉबर्ट क्लाइव, जिसने भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की और उस जैसे तमाम अत्याचारी अंग्रेज शासकों को माफ़ कर देना चाहिए ?
ओवैसी और उनके जैसे तमाम बाबर प्रेमी मुसलमान भारत प्रेम को दूसरे दर्जे पर क्यों रखते हैं ?
#Babar
#Uzbekistan
@bainjal So, these two corrupted minds think that when two planes collide, only the passengers suffer injuries or fatalities, while the surrounding area remains completely unaffected.
Sunita, while you and your fringe group deny that Hinduphobia even exists, we’ve had an active campaign to address anti-Hindu hate in Frisco, TX & coordinated with community on the ground creating a toolkit and testimonies for city council meetings.
Those who deny anti-Hindu hate are always the worst purveyors of it.
Always.
कृपया मुझे इस बात पर भावनात्मक ब्लैकमेल न करें कि मोदी जाएगा तो राहुल आ जाएगा, योगी जाएगा तो अखिलेश आ जाएगा। इस दोनों परिस्थिति की चिंता भाजपा को करनी चाहिए कि इनके आने से इनका क्या होगा। इन नेताओं और पार्टी पर ऐसे लोग कैसे-कैसे प्रतिबंध डालेंगे।
मैं इन बातों का लोड नहीं लेता क्योंकि मेरे लोड लेने, या ना लेने, से कोई अंतर नहीं पड़ता। मैं सामान्य वर्ग के अधिकारों के लिए लड़ता रहूँगा। कल को कोई ऐसी पार्टी आई जो, आप जैसा कह रहे हैं की बदतर बना देगी, तो उस से सड़कों पर निपट लेंगे। उनको वैसे भी सड़कों की क्रांति पर ऑर्गैज़म आ जाता है।
आपसे तो केवल शब्दों से लड़ रहे हैं। यदि किसी को यह भ्रम है कि सवर्णों का रक्त रंगहीन जल बन चुका है, और उस से वीरता का वाष्पीकरण हो चुका है, तो हम वहीं हैं जिन्होंने लहू से सने जनेऊ मनों में तुलवाया ��ा धर्म रक्षा हेतु। हम वही हैं जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में फाँसियाँ झेलीं। हम वही हैं जो अंग्रेजों के विरोध में बिगुल फेंका। और हम वही हैं जिन्होंने मुगलों के होते हुए भी धर्म की रक्षा की।
जो लोग शब्दों से समझ सकते हैं वो समझें। हम बिकाऊ राजनेताओं के राजनैतिक समीकरणों के वेरिएबल्स नहीं ��ैं कि जब इच्छा हुई, जो मन में आया वो कर लिया। हमने आशा दिखाई कि आपके पास विज़न है, और आप 'विकसित भारत' के नाम पर एक जातिवादी समाज देश पर थोप रहे हो जहाँ प्रतिभा को आगे बढ़ने के लिए हर मार्ग पर आपने गड्ढे बना रखे हैं!
अतः, यह धर्म की लड़ाई है, समाज की लड़ाई है और देश की लड़ाई है। प्रतिभा को कूड़ेदान में रखने वाला राष्ट्र कभी भी विकसित नहीं हो सकता। ऐसे राष्ट्र में रेवड़ियाँ बाँटी जाती रहेंगी और वह अं���तः वेनेजुएला बन जाएगा। इसलिए, समय रहते या तो हम इनसे तंत्र को ठीक करवाएँगे या अपने जीवन की परवाह किए बिना इस समर में कूदेंगे।
मैं नेता नहीं हूँ। मैं कुछ भी नहीं हूँ। मैं कल को रहूँ या ना रहूँ, यह विषय ही समाज का नेतृत्व करेगा। और जब समाज का हर व्यक्ति अपनी चिंता, अपने बच्चों से जोड़ कर करने लगेगा, तब सत्ता को भयाक्रांत होना चाहिए।
मेरी योजना ओपन-सोर्स है। मुझे किसी पुस्तक की आवश्यकता नहीं है। मैं छुप कर अचानक से कुछ नहीं करूँगा। मैं जो करूँगा, मैंने वह कई बार लिखा है और वही करता हूँ। मैं सचेत करने के प्रयास करता हूँ, मैं प्रॉपर चैनलों से आप तक बात भी पहुँचाता हूँ परंतु यदि तुम नहीं मानते, तो मेरा क्या दोष!
संसद में सामान्य वर्ग की बात करने वाला एक भी व्यक्ति क्यों नहीं है? OBC के क्रीमी लेयर और EWS की क्वालिफिकेशन में इतनी असमा��ताएँ क्यों हैं? सवर्णों के टैक्स के पैसे से SC/ST/OBC की योजनाएँ फाइनेंस होती रहेंगी और हमारे बच्चे लोन के लिए मरते रहें जो उन्हें मिलता नहीं?
उनके पिता ६०% के ब्याज दर पर पैसे ले कर उसे हर महीने भेजते रहें और तुम घनघोर अयोग्य लोगों को कोचिंग दो, फिर मेरिट में छूट दो, फिर वो क्लास में कुछ ना उखाड़ पाए तो आगे PG में फिर से छूट दो, फिर नौकरी में छूट, प्रमोशन में छूट... ये अनंत काल तक चलता रहेगा?
दिस हैज टू बी फकिंग स्टॉप्ड! एंड वी विल नोट कॉम्प्रोमाइज एन इंच नाउ!
Interesting that Mamdani opposes Bhagwat's rally because he rejects “exclusionary” vision rather than the secular, pluralistic India he knew.
Yet days earlier he comfortably attended Pakistan’s Independence Day celebration at the Allama Iqbal Community Center, named after a thinker who rejected territorial nationalism and advocated a distinct Muslim political homeland.
If religious nationalism is the problem, shouldn’t that principle be applied consistently?
तर्क: हमारे साथ 5000 वर्षों से डिस्क्रिमिनेशन हुआ। अतः आरक्षण सकारात्मक डिस्क्रिमिनेशन है और उचित है।
उत्तर: हिन्दुओं का नरसंहार मुगलों के समय में हुआ, बलात्कार हुआ, गाँव जलाए गए। यह 4-500 वर्ष पहले की ही बात है। तो क्या वर्तमान मुसलमानों का, उपरिलिखित तर्क से, नरसंहार उचित हो जाएगा?
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इस पर तुरंत भीम वाले पग��ा जाएँगे कि ऐसे कैसे तुम आरक्षण के डिबेट में लॉजिकल बातें ले आते हो। आज तक ये 5,000 वर्ष का कोई भी प्राइमरी सोर्स ले कर आए नहीं। और उस समय किसने किया, क्या किया, मैं उसका लोड क्यों लेता फिरूँ?
जिन जातियों को आरक्षण से हटाने के लिए 1960 के ही दशक में सिफारिश हुई, वो आज तक टिकी हुई हैं लिस्ट में, सबसे अधिक आरक्षण खा रही है। जिन जातियों को मुगलों के समय में जमींदारी दी गई, वो आज ओबीसी लिस्ट में हैं।
यदि सरकार को लगता है कि ये सारे डॉक्यूमेंट प्रधानमंत्रियों के तकिए की खोली में रखे होते हैं, तो वो भूल जाएँ। ये सब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आँकड़े और तथ्य हैं।
‘व्हाइट पेपर’ तो लाना ही होगा। नहीं लाओगे तो हम निकलवा लेंगे या ऐसे आँकड़े रख देंगे जो तुम्हें और भी असहज करेगा।
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एक बात संघ के लिए भी है: मूर्ख बनाना बंद करो ये सब लीक करवा कर कि ‘UGC पर तो हमें न उगलते बन रहा, न निगलते’। यह ऐसा स्तरहीन तर्क है कि सामने मिले ऐसा ��दमी तो पूछूँ कि तुम्हारी बुद्धि घास चरने चली गई?
इसमें ‘उगलना-निगलना’ क्या है? सीधा वक्तव्य यह दो: “आज के संदर्भ में, जब विश्वविद्यालयों की दीवारों पर सवर्णों के नरसंहार की बातें लिखी जाती हैं, हर सप्ताह कब्र खुदने के नारे लगते हैं, तो यह मानना अनुचित है कि उनको लेकर जातिगत घृणा नहीं है। अतः उन्हें भी इस लिस्ट का हिस्सा होना चाहिए।”
तत्पश्चात्, इसमें एक और बिन्दु जोड़ा जाए: यदि कोई भी शिकायत झूठी निकली, उस पर दोगुना जुर्माना और जेल का दंड होगा।
ऐसा कोई रॉकेट साइंस नहीं है।
मेरे ऊपर SC/ST एक्ट में FIR पर कुछ बातें सवर्ण समाज से
कोई मेरी माँ या बहन पर सीधे बलात्कारी मानसिकता के साथ यह कहे कि उसका विवाह मैं चंद्रशेखर के साथ करा दूँ, और मैं चुप रह जाऊँ तो आप बताइए कि मैं कैसा पुत्र या भाई हूँ?
इतने पर भी चंद्रशेखर को ले कर मैंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला, जो उक्त वीडियो में है। जब स्टेज से ब्राह्मणों की बेटियों को खींचने की बातें होती हैं और किसी SC नेता का चेला सोच-समझ कर उकसाने के लिए ऐसी बात करेगा, तो मैं चुप कैसे रहूँगा?
आज व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को समझे या न समझे, वह यह अवश्य जानता है कि SC/ST एक्ट क्या है। तो मैं जब बोलता हूँ तो मुझे अपनी सीमाएँ (चाहे वह कितनी ही अनुचित क्यों न हों) पता हैं कि क्या बोलना है, क्या नहीं।
मैं जानता हूँ कि दिल्ली पुलिस के नॉर्थ अवेन्यू स्टेशन में आजाद समाज पार्टी वालों ने कितना दवाब दे कर रात के बारह बजे यह FIR लिखवाया है जो कोर्ट में दो मिनट नहीं टिकेगा। एक भी धारा ऐसी नहीं है जो होल्ड करेगी।
मैं सैनिक स्कूल का छात्र हूँ और इतनी रैगिंग झेल चुका हूँ कि मेरा मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कस्टडी में मेरी हत्या करनी पड़ेगी, दो-चार डंडों से मेरा मनोबल नहीं टूटने वाला। और यदि मैं जीवित बच गया तो इसी स्थिति में जंतर मंतर जाऊँगा और अपने समाज से कहूँगा कि ��ताओ, तुम्हारी बहन और माँ को ले कर कोई ऐसी टिप्पणी करे तो क्या करोगे?
यदि ऐसा कमेंट फिर मेरे वीडियो पर आया तो मैं पुनः उसी तरीके से उत्तर दूँगा जो मैंने दिया। कानून जब तक है, संशोधन नहीं होता, मैं उसका सम्मान करूँगा और दिल्ली पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करूँगा। 92% ऐसे केस केवल प्रताड़ित करने के लिए होते हैं।
अंत में, सवर्ण समाज से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की टिप्पणी पर मुझे सह लेनी चाहिए थी क्योंकि किसी पार्टी के लोग नाराज हो जाएँगे? क्या ब्राह्मणों की माँ और बहनें इन रेप मैंटिलिटी से संचालित गुंडों के शाब्दिक बलात्कार के लिए जन्म लेती हैं?
हम क्यों नोटा दबाएंगे
@BJP4India
के कुकृत्य देखिये
1989 में बीजेपी के घोषणा पत्र में भी ओबीसी आरक्षण था, वीपी सिंह के साथ मिलकर बीजेपी पहली बार देश में ओबीसी आरक्षण लाई।
2019 के पहले नीट के केंद्रीय कोटा में ओबीसी आरक्षण नहीं था, जो पहली बार बीजेपी ने दिया।
आईआईटी (IIT) और आईआईएम (IIM) की फैकल्टी में कोई आरक्षण नहीं था, जिसे 2019 में बीजेपी ने एक्ट बनाकर दिया। यानी IIT IIM भी बीजेपी बर्बाद कर दी
ओडिशा के मेडिकल क्षेत्र में बीजेपी के आने के पहले सिर्फ 30% आरक्षण था, जिसे बीजेपी ने बढ़ाकर 50% किया।
2015 में सत्ता संभालते ही मोदी ने एससी-एसटी (SC-ST) एक्ट में 47 नए कड़े (ड्रैकोनियन) प्रावधान जोड़े।
भारत के किसी भी कानून में जातिगत भेदभाव के दायरे में ओबीसी नहीं आते थे, लेकिन बीजेपी ने यूजीसी (UGC) एक्ट में ओबीसी को जोड़ा। चू��कि 90% मुसलमान भी ओबीसी में आते हैं, इसलिए अब मुसलमानों को भी हमारे ऊपर एक्ट लगवाने का अधिकार यूजीसी के जरिए दे दिया गया।
बीजेपी 'हिंदू-हिंदू' करती है, लेकिन 1989 में जब मंडल कमीशन आया तो इसी बीजेपी ने मुसलमानों को भी ओबीसी आरक्षण दिया। आज भी पूरे देश में 90 प्रतिशत मुसलमानों को बीजेपी ओबीसी आरक्षण दे रही है।
याद रखना बीजेपी कभी भी मुसलमानो को ओबीसी आरक्षण से नहीं निकालेगी वो सिर्फ हिंदू मुस्��िम करके सत्ता लेती है
अब बताओ, जनरल समाज का 90% वोट लेकर जनरल समाज के साथ विश्वासघात करने वाली बीजेपी को जनरल समाज क्यों वोट दे?
जहां जहां आरक्षण नहीं था भाजपा सत्ता में आने के बाद वहां भी आरक्षण क्यों दी?
इसे फैलाइए PLS सब कोई ,सारे जनरल समाज को इनकी असलियत पता लगनी ही चाहिए
The Modi-hating anarchists pleaded 3 hours for permission to protest at Jantar Mantar. They were granted it.
The Modi-loving nationalists pleaded 30 days for permission to protest at Jantar Mantar. They were denied it.
Gen Z के हृदय में ��तरने के लिए मोदी जी दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। मिंटॉस खाया और कहा, वन नेशन, वन यूनिवर्सिटी योजना।
Another Day, Another बकवास!
इधर जेनजी नेता सौ-सौ गाड़ियों के काफिले से आउटरीच बना रहे हैं और मोदी जी को लगता है कि कुर्ता-पजामा पहने नेता जेनजी को लुभा लेंगे।
अखिलेश जी,
आरक्षण सुधार की बात होते ही आरक्षण खत्म हो जाएगा का नैरेटिव चलाना बंद कीजिए। कुछ दिन पहले PDA का P = पंडित बताया था
PDA नहीं, Political Double Act है। आज सवर्णों के सवालों से इतनी बेचैनी क्यों? सव��्ण सवाल पूछते रहें, निशाना सही जगह जा रहा है।
आंबेडकर खुद दलित आरक्षण में वर्गीकरण के पक्ष में थे।
उनका स्पष्ट कहना था अगर आरक्षण से किसी वर्ग का लाभ हो जाता है तो उसकी अगली पीढ़ी को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए।
आरक्षण केवल गरीब वंचित वर्ग की दलित जातियों के लिए है। जिन दलित जातियों को आरक्षण का लाभ मिल चुका है उन्हें आरक्षण से बाहर कर देना चाहिए।