#WATCH | Delhi: In the CEC row, Jan Suraaj Founder Prashant Kishor says, "The credibility and reputation of the Election Commission have not been compromised merely by an Indian Express report... There should be a nationwide discussion on how a former CEC has today become the chairman of the country's largest private bank... The Election Commission's credibility has been tarnished due to its style of functioning over the past several years—specifically, the manner in which it has discharged its responsibilities, both during elections and otherwise. This debate has been ongoing for the last 10 years... The ruling party, the BJP, appears to exert influence over everything—from the scheduling of election dates to the number of phases in which elections are conducted... Comprehensive measures must be taken to make the entire electoral process transparent. The Supreme Court should play a role in this... The opposition has no role in the process of appointing Election Commissioners or in the broader conduct of elections... Opposition parties are able to win elections only where there is a massive wave of sentiment against the BJP..."
पिछले लोकसभा चुनाव से पहले, साल 2023-24 के वित्त वर्ष में कई छोटे दलों को काफ़ी ज़्यादा चंदा प्राप्त हुआ.
बीबीसी की टीम ने लगभग दो महीने इस मामले में पड़ताल की, उन्होंने छह ऐसे दलों के बारे में पता किया, जिन्हें 'रजिस्टर्ड अनरिकग्नाइज़्ड पॉलिटिकल पार्टीज़' यानी RUPPs कहते हैं.
बीबीसी की टीम को पता चला कि इन पार्टियों को सैकड़ों करोड़ का चंदा मिला, जोकि कुछ मामलों में किसी राष्ट्रीय दल से भी ज़्यादा रहा.
लेकिन ये पार्टियां चुनावी राजनीति में अधिकतर गायब ही रहीं.
एक्सपर्ट कहते हैं कि हो सकता है ये पार्टियां असल में स्वतंत्र राजनीतिक संगठन ना हों, इसके बजाय ये पार्टियां टैक्स चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला लेनदेन और दूसरी वित्तीय अनियमितताओं के लिए एक तरह से मोर्चे के तौर पर काम कर सकती हैं.
देखिए बीबीसी की यह ख़ास पड़ताल.
रिपोर्टः शुभांगी मिश्रा
शूट एडिटः दीपक जसरोटिया
ग्राफ़िक्सः वासिफ़ ख़ान और चेतन सिंह
अतिरिक्त रिपोर्टिंगः तेजस वैद्य
होल्डिंग एडिटरः अभिक देब
BIG BREAKING NEWS 🔥
BJP का नया स्कैम....
गुजरात में BJP के नए खतरनाक राजनीतिक गैंग...
गुपचुप तरीके से हजारों करोड़ की सालाना कमाई।
गुजरात में छोटी-छोटी राजनीतिक पार्टियों को चंदा हजारों करोड़ में मिलता है, वोट सैकड़ों भी नहीं मिलते। यह भारत में नया स्कैम है। यह राजनीति का नया गुप्त हथियार है।
गुजरात में ऐसी कई राजनीतिक पार्टियां हैं जो चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड हैं लेकिन मान्यता प्राप्त नहीं हैं।
इनका केवल एक ही काम है चंदा उगाही और वक्त पड़ने पर बड़ी पार्टियों के हाथों बिक जाना।
आम जनमत नाम की पार्टी जिसने 3 साल में 1 हजार करोड़ का चंदा हासिल किया और फिर रातों-रात बंद हो जाती है।
6 ऐसी पार्टियां हैं जिन्होंने ये खेल रचा है।
हाल ही में तृणमूल के 20 सांसद एक पार्टी में शामिल हो गए जो ऐसे बिकने के लिए ही बनाई गई थी।
गुजरात में 6 फर्जी राजनीतिक पार्टियां जो हर साल हजारों करोड़ उगाही कर रही हैं,
क्या यह नया माफिया है जिनके ऑफिस भी बंद हैं और फोन नंबर भी बंद आते हैं?
पड़ताल में सभी पार्टियों के कर्ताधर्ता बीजेपी के ही निकल आते हैं। यह BJP के नेताओं का उगाही करने का नया तरीका है।
Amit Bhatia has expressed ‘huge privilege and excitement’ to be part of the future of Liverpool FC amid 1892 Holdings' new minority investment into the club 🗣️
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₹35,715 crore written off. Less than 28% recovered.
Then there’s a US$600 million settlement linked to the NMC Health collapse.
What do these numbers tell us about accountability in India’s banking system—and why are ordinary depositors held to a very different standard?
@suchetadalal examines the unanswered questions.
Watch the full video on YouTube: https://t.co/k4Wn3xZ6Bn
@moneylifers@yogtoday
सुभाष चंद्रा ने क्या खेल खेला है…
सरल शब्दों में समझिए…
सुभाष चंद्रा की दो कम्पनियाँ है…
Zee और Essel group
Essel group ने अलग अलग बैंकों, फ़ाइनेंशियल ग्रूप से 22,000 करोड़ का लोन लिया…
इस पूरे लोन की पर्सनल गारंटी दी सुभाष चंद्रा ने…
गारंटी के वक़्त कहा गया कि मेरी नेट वर्थ है 40,000 करोड़…
जब लोन चुकाने का वक़्त आया तो सुभाष चंद्रा पलटी मार गए…
कहने लगे मेरी संपत्ति केवल 31 करोड़ ही है…
मैं केवल 6 करोड़ चुका सकता हूँ… चाहो तो 6 करोड़ मे लोन सेटल कर लो….
अब सुनिए नियम क्या कहता है…??
लोन देने वाली अलग अलग बैंक और फ़ाइनेंशियल ग्रूप में से 75% ग्रूप अगर कोई आपत्ति दर्ज नहीं करवाते हैं…
तो लोन 6 करोड़ में सेटल हो जाएगा…
अब यहीं सुभाष चंद्रा ने सबसे बड़ा खेल किया हैं…
22,000 करोड़ के लोन में 4223 करोड़ रुपये…
LIC, HDFC, Axis bank, Canara bank इत्यादि बैंकों से लिया गया था…
बाक़ी 17783 करोड़ रुपये अपनी ही फ़ाइनेंशियल कम्पनियों और कुछ पर्सनल लोगों से लिया गया था…
अब जो अपनी खुद की फ़ाइनेंशियल कम्पनियाँ और व्यक्तिगत स्तर पर लोगों से लोन लिया गया था…
ये बनता है 80%
इन सबको व्यक्तिगत स्तर पर लोन चुका दिया…
और कोर्ट में इन सब फ़ाइनेंशियल ग्रूप ने कह दिया कि हमें 6 करोड़ के सेटलमेंट से कोई आपत्ति नहीं है…
बैंक वाले केवल 20% थे… वो बेचारे मुँह ताक़तें रहे…
मतलब कुल मिलकर नियमों में उलझाकर, सुभाष चंद्रा ने बैंकों के 4223 रुपये डकार लिए…
ग़ज़ब का खिलाड़ी निकले ये सुभाष चंद्रा…
और रही सरकार के सपोर्ट की… तो पिछले दस सालों में इतनी चाटुकारिता तो की है
कि सरकार का फ़ुल सपोर्ट है चंद्रा साहब को…!!!
बांकीपुर उपचुनाव | Round 5 तक EVM Counting Update
🟡 जन सुराज पार्टी — 8,971 वोट
🟠 भारतीय जनता पार्टी — 6,592 वोट
🟢 राष्ट्रीय जनता दल — 884 वोट
जन सुराज की बढ़त — 2,379 वोट
Round 5 में जन सुराज ने 2,379वोट की बढ़त ली। 🔥