बेटी के प्राइवेट पार्ट में हाथ डालने वाले ने भगवा लपेट रखा था, इसलिए IT सेल चुप हैं, 👉अगर हरा गमछा या सर पर टोपी होती, तो इस वक्त बिहार "जल" रहा होता --गिन्नी इंडियन
पुरे रास्ते बुर्का में कांवड़ यात्रा करी लेकिन जब मंजिल आई तो हिन्दूओं ने बुर्का में हवन-पूजन करने से रोक दिया गया और कहाँ गया अगर हवन करना है तो आपकों बुर्का उतारना पड़ेगा हमारी आस्था का सवाल है!
आखिर में इन मुर्तदों ने अपनी नौटंकी उतारी उसके बाद उन्हे मत्था टेकने दिया गया 😂
ाँसी मे ं बाबा 302 गैंग ने दलित पर बेल्ट बरसाए, लोटे में भरकर पेशाब पिलाई, मऊरानीपुर कोतवाली में FIR भी हुई लेकिन पीड़ित ने पुलिस पर भी लगाए गंभीर आरोप...
पूजा पाल कह रही ह ै ं सांसद अतीक अहमद ने जो पाप किया ह ै उसकी सजा उसके बच्चे को मिल राही ह ै ं मेरी पूजा पाल से कहना ह ै तुम्हारे पिता जी ने कोन सा पाप करे थे जो तुम जवानी मैं विधवा हो गई
#viralㅤㅤ
गई है। एक तरफ जहा ं नियम और कानून के तहत रेलवे में बिना टिकट यात्रा पर जुर्माना तय है, वही ं आस्था के नाम पर नियमों को ठेंगा दिखान े वाली इस हरकत से आम यात्रियो ं मे ं नाराजगी देखी जा रही है।
ट्रेन में बिना टिकट यात्रा कर रहे कांवड़ियो ं से जब ड्यूटी पर तैनात TTE ने जुर्माना भरने को कहा, तो कांवड़ियो ं ने उल्टे TTE से ही बहस शुरू कर दी और दावा कर दिया कि "सावन में कांवड़ियो ं के लिए ट्रेन फ्री होती है।" इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद एक नई बहस छिड
मगर हापुड़ में कांवड़ खंडित होने पर मुहम्मद अ़ज़ीम को बेरहमी से क़त्ल कर दिया गया तो कोई नहीं पूछ रहा कि कांवड़ एक इंसान की जान से ज़्यादा है क्या!
क्या अब आरोपियों के घरों पर बुलडोज़र चलेगा? अब कहां गया सारा फर्जी सेक्युलरों का नैरेटिव?? दिख नहीं रहा कही वो मार्मिक कहानियों व
दिल्ली में होली पर तरुण खटीक की हत्या पर संघी मीडिया और छुपी हुए फर्जी सेक्युलर्स ने प्रोपगेंडा फैलाया गया कि बच्ची से रंग गिर गया था, इस्लाम रंग गिरने से कैसे खतरे में आ सकता है, आरोपी पक्ष पर कड़ी कार्रवाई हुई, उनका घर तक गिरा दिया गया और सबको उठाकर जेल में डाल दिया।
मगर हापुड
यूपी में पुलिस वालों को पुलिस की गाड़ी से निकाल कर कावड़ियों द्वारा पीटा गया, यहाँ तक कि उनके कपड़े तक फाड़ दिए। उन पुलिस वालों ने अपनी जान खेतों में भाग कर बचाई। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है, लेकिन यह नौबत लाया कौन जो ना बच्चों को छोड़ा जा रहा है ना ही प्रशासन को कुछ समझा जा रह
क्या गुजर रही होगी,इसके परिवार वालों पर ,,घर का चिराग को बुझा दिया गया,जब इसी के घर वाले पलट कर हमला करेंगे तो कुछ सेकुलर लोग भला बुरा कहेंगे
आखिर हमारे जान की कीमत इतनी सस्ती हो गई है,की कोई भी कुछ इल्ज़ाम लगाकर मौत के घाट उतार देता है,और मिलता है,,सिर्फ आश्वासन!!
#मोबलिंचिंग
यह हैं गणेश यादव बिहार से नेपाल गए थे भारत की तरफ से दंगों का नेतृत्व करने
भाईसाहब को उम्मीद थी कि
युगांडा पुलिस की तरह वहाँ की पुलिस भी दंगों में आगे आगे सहयोग करेगी
लेकिन हो गया इसके उलट और भाईसाहब के पिछवाड़े पर लगी गोली और गए पलट
और इस तरह एक कुशल नेतृत्व कर्ता का अंत
वैसे तो एक तस्वीर एक हज़ार शब्दों पर भारी होती है लेकिन इस तस्वीर के लिए अल्फ़ाज़ ख़त्म हो गए, निःशब्द हो गए लोग। लानत है ऐसे दंगाईयों, हुड़दंगियों, गुंडों और नशेड़ियों पर। श्रद्धा के लिए हज़ारों भोले अमन शांति से काँवड़ लेने जाते हैं और वापिस अपने घरों को लौट आते हैं