'वंदे मातरम्', जो स्वतंत्रता आंदोलन का प्रखर जयघोष रहा, उसका आजादी के 80 वर्ष बाद आज पहली बार लाल किले की प्राचीर से गान हुआ।
इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनकर न सिर्फ रोंगटे खड़े हो गए, बल्कि रोम-रोम पुलकित हो उठा।
सदैव भय में वो ही जीता है
जो अनिश्चितता को विष सा पीता है
इस अनिश्चितता से मत डरो
बल्कि इसको अवसर में बदलो
संभावनाएँ, भय को भगा देती हैं
और नई उम्मीदों को जगा देती हैं