पत्रकार - तुम्हारे पास Iphone है अच्छे कपड़े हैं बाइक है पैसे हैं तो यहाँ गन्दी बस्ती की झुग्गियों में क्यों रहते हो.. अच्छे जगह रेंट पे रह सकते हो...
जावेद - रेंट का कोई मतलब ही नहीं, जब हम कहीं भी झुग्गी डालकर उस जगह को अपना बना सकते हैं...
इसे कहते हैं कब्जाखोर मज़हबी सोच✍️
एक धारावाहिक आता था दूरदर्शन पर चाणक्य नाम का। श्री चन्द्रप्रकाश द्विवेदी जी ने उसमे चाणक्य की भूमिका निभाई थी।
चन्द्र प्रकाश द्विवेदी जी ने ही इस धारावाहिक में चाणक्य की भूमिका निभाई,लेखक भी वही थे और निर्देशन का कार्य भी उन्होंने ही किया।
इतनी उच्च स्तर की एक्टिंग उसमे की गई थी कि आज भी जब हम चाणक्य को अपने कल्पना में लाते हैं तो चन्द्रप्रकाश जी का चेहरा ही सामने आता है।
उसमे बहुत उच्च स्तर के सम्वाद थे लेकिन 2-3 सम्वाद ऐसे थे जो कालजयी है।
जैसे-
"शिक्षक साधारण नही होता है,प्रलय व निर्माण उसकी गोद मे खेलते हैं।"
"जो लोग अपने राष्ट्र, अपनी भूमि और अपनी अस्मिता की रक्षा नहीं कर पाते, वे अंततः शरणार्थी बन जाते हैं।"
"जो आज इस भूमि पर शरण लेने आए हैं,
कल वे इसी भूमि पर अपना अधिकार भी माँगेंगे।"
"पराजित राष्ट्र तब तक पराजित नही होता, जब तक वो अपने संस्कृति अथवा मूल्यों की रक्षा कर पाता है।"
ऐसे कालजयी सम्वाद लिखे थे चन्द्र प्रकाश द्विवेदी जी।
जब भी सुनो रौंगटे खड़े हो जाते है।
क्या सचमुच सिर्फ जल और तिल से पितरों की तृप्ति हो सकती है?
बहुत लोग पितृ दोष की बात तो करते हैं, लेकिन उसका सबसे मूल, सरल और घर पर किया जा सकने वाला उपाय नहीं जानते…
और वही उपाय है — नियमित पितृ तर्पण।
कभी-कभी जीवन में बिना कारण अटकन बढ़ने लगती है।
घर में बार-बार कलह होने लगे,
काम बनते-बनते रुक जाएँ,
मन पर एक अदृश्य भारीपन बना रहे,
या संतान, धन और शांति के क्षेत्र में बार-बार बाधाएँ आएँ…
तो हमारी परंपरा सबसे पहले हमें अपने पितरों की ओर देखने को कहती है।
पितृ तर्पण केवल एक कर्मकाण्ड नहीं,
यह स्मरण है…
यह कृतज्ञता है…
यह उस वंशधारा के प्रति विनम्र जलांजलि है,
जिसके कारण आज हम हैं।
दैनिक या नियत तर्पण की सरल विधि:
1️⃣ किसी भी अमावस्या को, विशेषकर पितृ पक्ष में, या हर महीने एक निश्चित दिन निर्धारित करें।
2️⃣ स्नान के बाद स्वच्छ आसन या कुशासन पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें।
3️⃣ तांबे या स्टील के पात्र में जल लें।
उसमें काले तिल डालें।
यदि संभव हो तो जौ और कुश भी मिलाएँ।
4️⃣ फिर भावपूर्वक संकल्प करें —
“मैं अमुक गोत्र का अमुक, अपने समस्त ज्ञात-अज्ञात पितरों की तृप्ति और पितृ दोष शांति के लिए यह तर्पण कर रहा हूँ।”
5️⃣ अब दोनों हाथों से जल इस प्रकार अर्पित करें कि वह अंगुष्ठ और तर्जनी के बीच से दक्षिण दिशा की ओर गिरे।
6️⃣ साथ में यह मंत्र बोलें —
“ॐ सर्व पितृदेवताभ्यो नमः, स्वधा इदं पितृभ्यो।”
या
“ॐ पितृभ्यः स्वधा॥”
7️⃣ अंत में गाय, कुत्ते, चींटी आदि को थोड़ा अन्न दें या किसी जरूरतमंद को भोजन कराएँ।
याद रखिए —
हर बड़ा उपाय कठिन नहीं होता।
कुछ उपाय इतने सरल होते हैं कि लोग उन्हें हल्का समझकर छोड़ देते हैं,
जबकि प्रभाव वही सबसे गहरा देते हैं।
मान्यता है कि नियमित तर्पण से
मन का भारीपन कम होता है,
घर की ऊर्जा शांत होती है,
रुके कामों में गति आने लगती है,
और पितरों की कृपा का सूक्ष्म अनुभव होने लगता है। ✨
सबसे महत्वपूर्ण बात —
तर्पण दिखावे से नहीं,
भाव से फलित होता है।
अगर आप अपने घर की शांति, वंश की उन्नति और पितरों की प्रसन्नता चाहते हैं,
तो इस अमावस्या से यह छोटा-सा नियम शुरू कीजिए।
क्योंकि कभी-कभी जीवन की सबसे बड़ी रुकावटों का समाधान
ऊपर नहीं…
पीछे छूटे आशीर्वादों में छिपा होता है।
आप हर अमावस्या पितृ तर्पण करते हैं या अब शुरू करेंगे?
अपना उत्तर “स्वधा” लिखकर दें।
Anna Karina plays a slave girl who tells stories so good a king forgets to kill her. For 1,001 nights. In 1963. In Egypt. Costume by Yves Saint Laurent. Mute performance. Eye acting only. 7.3 on IMDb. I've watched it 10 times. 🔥
अधिकांश लोग दूसरों को खोने से डरते हैं। लेकिन असली डर खुद को खोने का होना चाहिए। क्योंकि लोग बदल जाते हैं। वादे टूट जाते हैं। परिस्थितियाँ रातोंरात बदल जाती हैं। लेकिन अगर आप खुद को इतना मजबूत बना लें… तो आपको सहारे के लिए गिड़गिड़ाना नहीं पड़ेगा। आप अपना ही सहारा बन जाएंगे। अपने पंखों पर भरोसा रखिए।