क्या मुझे साथ ले गए हो तुम,
मैं यहाँ मिल नहीं रहा हूँ।
तेरी यादों की धुंध इतनी है,
खुद से भी घुल नहीं रहा हूँ।
आईना देखता हूँ रोज़ मगर,
अपने जैसा नहीं रहा हूँ।
तेरे जाने के बाद ये जाना,
कितना मुश्किल में जी रहा हूँ।
लोग कहते हैं सब ठीक है,
मैं ही शायद नहीं रहा हूँ।
"सफर वहीं खूबसूरत है जहाँ यादें बन जाएँ,
पत्थरों की इन नक्काशी में हम खुद को पा जाएँ।
इतिहास की गोद में बैठकर ये लम्हा चुराया है,
जैसे गुजरे हुए कल ने आज को गले लगाया है।"
#2025
महाबलीपुरम का शोर मंदिर तमिलनाडु