ईवीएम को लेकर जनता के मन में शंका होने से देश का लोकतंत्र कमज़ोर हो रहा है। बैलेट पेपर से चुनाव लोकतंत्र में विश्वास की पुनर्स्थापना के लिए ज़रूरी है। तकनीकी के माध्यम से घपलों-घोटालों की ख़बर आम बात हो गयी है, तो फिर ईवीएम शक़ के घेरे से बाहर कैसे हो सकता है।
देश में ईवीएम को लेकर एक जनमत कराने की आवश्यकता है। लोकतंत्र में जनता को सिर्फ़ सरकार चुनने का ही अधिकार नहीं होता, चुनने के तरीक़े और चुनने के माध्यम को चुनने का भी अधिकार होता है। इसी के आधार पर दुनिया के विकसित देशों ने ईवीएम के स्थान पर फिर से बैलेट पेपर यानी मतपत्र से चुनाव कराना शुरू कर दिया है।
बैलेट पेपर निर्वाचन की सत्यता का पुख़्ता सबूत होता है।
मऊ घोसी का उपचुनाव उस अहंकारी सरकार को हराने का है जिसके मंत्री जब घोसी मे गुजर रहे है ,तो घोसी के जनता को धक्का देकर सड़क से फेंक दिया जा रहा है !
उस अपमान का जबाब जनता बीजेपी को हरा देगी ।
चुनाव जीतने के लिए प्रशासन की संलिप्तता का इससे ज़्यादा साफ़ सबूत और क्या होगा। चुनाव आयोग संज्ञान ले और बताए कि वो है और देख-सुन भी रहा है।
ये लोकतांत्रिक संकट है और बेहद गंभीर विषय भी कोर्ट भी इसका स्वत: संज्ञान ले और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित कराए।
सन् 2003
तत्कालीन BSP सरकार ने नेता जी के ऊपर एक दिन में 136 झूठे मुकदमे लिखा दिये थे उस समय नेता जी ने लखनऊ की सड़कों पर साइकिल चलाकर सरकार को चुनौती दी थी कि हिम्मत है तो गिरफ़्तार करो !
उस समय मैं लोहिया वाहिनी का प्रदेश सचिव था
(नेता जी के पीछे लाल शर्ट काली पैंट में)
अत्याचार व शोषण के खिलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद करने वाली सामाजिक न्याय की योद्धा, समाजवादी पार्टी की पूर्व सांसद स्व. फूलन देवी जी की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि।
शोषण और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने वाली न्याय की एक नई पटकथा लिखने वाली क्रांतिकारी समाजवादी नेता के रूप में संसद भवन मे अपनी आवाज बुलंद करने वाली स्व० श्रीमती फूलन देवी जी जयंती पर शत् शत् नमन करती हूं।
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