बीजेपी ने 6 MLC चुनाव के प्रत्याशियों की घोषणा कि है जिसमे एक भी PDA समाज से नहीं है
भागीदारी सवर्णों को देंगे और वोट पिछड़े दलित समाज का चाहिए
PDA समाज सब देख रहा है।
क्या ये महिला या भारत की बेटी नहीं थी क्या जिन्होंने हाथरस में कुछ नहीं किया
⦁ जिन्होंने उन्नाव में कुछ नहीं किया
⦁ जिन्होंने मणिपुर में कुछ नहीं किया
⦁ जिन्होंने महिला पहलवानों के लिए कुछ नहीं किया
अब ये लोग महिला विरोधी माइंडसेट की बात करेंगे महिला आरक्षण के जरिए
@Nivedita_Shan ⦁ जिन्होंने हाथरस में कुछ नहीं किया
⦁ जिन्होंने उन्नाव में कुछ नहीं किया
⦁ जिन्होंने मणिपुर में कुछ नहीं किया
⦁ जिन्होंने महिला पहलवानों के लिए कुछ नहीं किया
अब ये लोग महिला विरोधी माइंडसेट की बात करेंगे महिला आरक्षण के जरिए महिला सशक्तिकरण की नींव कांग्रेस ने ही रखी है।
एक लड़की Rapido बुक करती है।
जब Rapido वाला आता है तो लड़की पूछती है रैपीडो वाले से भैया आपकी शादी हो रख्खी है क्या.?🙆♂️
रैपीडो वाला - नहीं मेरी शादी नहीं हुई है।🤷♂️
लड़की - मेरा तो पति खोया हुआ है।
रैपीडो वाला- फिर आप मुझसे शादी कर ले..see more
देशद्रोह का केस क्यों दर्ज हो! धर्मद्रोह की कोई व्यवस्था नहीं है क्या?
स्टेट कोर्ट कचहरी को क्यों परेशान करना, श्राप देकर भस्म कर दो, टनाटन वाली बैटरी नहीं है क्या?
मणिकर्णिका घाट हो या माघ मेला में पूज्य शंकराचार्य का अपमान, इस पर किसी 'हिन्दू संगठन' की प्रतिक्रिया आई ?
- बजरंग दल
- आरएसएस
- विश्व हिंदू परिषद्
- हिंदू युवा वाहिनी
जिस विषय पर पूरा देश लिख रहा है उस विषय पर इन संगठनों का कुछ तो ऑफिशियल बयान आना चाहिए !
लेकिन नहीं आया
सच्चा नेतृत्व जीवन के सभी क्षेत्रों में बेहतर बनने का प्रयास करने और अपने आसपास के सभी लोगों को उनके सर्वोत्तम रूप में विकसित होने के लिए सशक्त बनाता हैं!
हमें गर्व है हमारे दूरदर्शी नेता श्री @yadavakhilesh पर
BJP का गुजरात मॉडल दरअसल विकास का नहीं,कमीशन और भ्रष्टाचार का मॉडल था जिसे जनता ने 2014 में समझ नहीं पाया।
जहाँ कांग्रेस की बनाई 70 साल पुरानी टंकी तोड़ने के लिए JCB लगानी पड़े, और वहीं BJP सरकार की बनाई 21 करोड़ की नई टंकी 20 लीटर पानी में ढह गया।
वहाँ सवाल क्वालिटी का नहीं, नीयत का होता है।
ये मॉडल सड़क–पुल नहीं, कमीशन–कट और घोटालों पर टिका है।
नाम “गुजरात मॉडल” है, हक़ीक़त में भ्रष्टाचार का अड्डा।
यह केवल किसी एक घटना का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह धर्म और लोकतंत्र दोनों के नैतिक पतन का संकेत है, जब कोई राजनीतिक दल यह स्थापित करने में सफल हो जाता है कि उसके हर आपत्तिजनक, अमानवीय और अलोकतांत्रिक कृत्य को यदि “मास्टरस्ट्रोक” न कहा जाए, तो आप स्वतः ही “हिंदू विरोधी” घोषित कर दिए जाते हैं।
हिंदू धर्म न कभी किसी राजनीतिक दल की निजी संपत्ति था, न है और न कभी होगा। धर्म की आत्मा प्रश्न करने, विवेक रखने और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने में है न कि सत्ता के सामने आंख मूंदकर समर्पण करने में।
जो लोग हर गलत को भी भक्ति की भाषा में सही ठहराते हैं, वे न धर्म की रक्षा कर रहे हैं, न देश की वे केवल सत्ता के अंध समर्थक बनकर रह गए हैं।
मणिकर्णिका घाट पर मूर्तियों को तोड़े जाने के विरोध में जब नागरिक अपनी आवाज़ उठाते हैं, तो उनसे “सरकारी प्रमाणपत्र” मांगना लोकतंत्र नहीं, बल्कि तानाशाही प्रवृत्ति का स्पष्ट संकेत है।
आवाज़ उठाने पर लोगों को पीटना, पुलिसिया हिंसा करना यह न संविधानसम्मत है और न ही किसी धर्म के मूल सिद्धांतों के अनुरूप।
इस पूरे प्रकरण में सबसे अधिक चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कहना कि सब कुछ “AI जनरेटेड इमेज” का परिणाम था।
यह तर्क न केवल हास्यास्पद है, बल्कि जनता की बुद्धि का अपमान भी है। जब लोग वीडियो बना रहे हैं, प्रत्यक्षदर्शी घटनाओं की पुष्टि कर रहे हैं, बनारस के नागरिक अपनी आंखों से सब देख रहे हैं तो ऐसे में AI को ढाल बनाना सत्ता की बौद्धिक दिवालियापन को दर्शाता है।
यह व्यवहार न तो जिम्मेदार सरकार का है, न ही परिपक्व नेतृत्व का। यह एक बालसुलभ बचाव है, जो सच्चाई से मुंह मोड़ने का प्रयास करता है।
सत्ता का धर्म यह नहीं होता कि वह हर सवाल को दबा दे, बल्कि यह होता है कि वह सवालों का सामना करे।
और जो सरकार सवालों से डरने लगे, वह स्वयं अपने नैतिक आधार को खो चुकी होती है।
मैं कुछ नए साथियों से जुड़ना चाहता हूँ। कुछ ईमानदार, सवाल पूछने वाले, अन्याय के ख़िलाफ़ खड़े रहने वाले लोगों को फॉलो करना चाहता हूँ।
मैं मानता हूँ कि अकेली आवाज़ दबाई जा सकती है, लेकिन साथ चलती आवाज़ों को नहीं।
अगर आप....
– बराबरी में विश्वास रखते हैं
– अन्याय पर चुप नहीं रहते
– सत्ता से सवाल पूछना देशद्रोह नहीं, ज़िम्मेदारी मानते हैं
– और इस तानाशाही, फासीवादी सोच के ख़िलाफ़ खड़े हैं
तो आइए, जुड़िए। एक-दूसरे को आगे बढ़ाइए, सच को मज़बूत कीजिए, और मिलकर आवाज़ बनिए।
क्योंकि जो अन्याय पर चुप है, वो उसका साथी है। अब चुप्पी नहीं—अब एकजुटता। ✊