"जुल्म इतना भी मत सहा किजिये
जब जुबां है तो कुछ कहा किजिए "
हिमांशी बावरा की ये पंक्तियां हैं। चारण -भाटण के इस दौर में कुमार विश्वास और अनामिका अंबर जैसे सरकारी कवियों को हिमांशी से सीखना चाहिए कि गरिमा के साथ अभिव्यक्ति कैसे की जाती है ।
इतनी शालीन, इतनी शांत । बिना उत्साह के अतिरेक में आये मुस्कुरा कर दिल में उतर जाती हैं ।
युवाओं के साथ 4 तरीके का अन्याय हो रहा है।
1. शिक्षा की कीमत 9 लाख रुपए
2. पांच में से चार दरवाजे बंद
3. 150 में सिर्फ 1 छात्र को सफलता
4. पेपर लीक का अन्याय
: नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi
📍 देहरादून, उत्तराखंड
#ChhatronKiGoonj
सोनम जी को जबरन जंतर-मंतर से उठा लिया गया। कपड़ों से ढक रहे हैं।सरकार को ये बात समझ नहीं आई कि लोकतंत्र के चीरहरण को कपड़ों से कैसे ढकेंगे?
याद रखिएगा, जितने छात्रों ने आत्महत्या की,उनके लहू आपके कपड़ों पर है।
एक वक़्त आएगा, जब भाजपाई ये बताने में शर्म करेंगे कि वो भाजपाई थे!
सैकड़ों वैज्ञानिक ISRO छोड़ रहे हैं। एक वैज्ञानिक छात्रों के लिए अनशन पर हैं। मगर महामानव और उनकी अनपढ़ मंडली को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता!
इनकी सृजित तबाही का असर आने वाली पीढ़ियों और देश के भविष्य पर पड़ेगा।