*॥श्री हरि:॥*
भगवान् हमारे हैं, उनके सिवाय कोई हमारा नहीं है—ऐसा मान लो तो आप जीवनमुक्त, तत्त्वज्ञ, महात्मा हो जाओगे।
*- श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज*
।।श्रीहरि:।। सार बात यह है कि भगवान को अपना समझो। आप कपूत हों तो भी ��ैं भगवान के ही। वे कपूत को भी सपूत बना देंगे। उनकी कृपा से हम सपूत बन जाएंगे। इसलिए भगवान को अपना समझ कर ' हे नाथ! हे नाथ!' पुकारो। सब की सेवा करो , पर अपना केवल भगवान को मानो।
बिंदु में सिंधु; 175
*॥श्री हरि:॥*
भगवान् हमारे हैं, उनके सिवाय कोई हमारा नहीं है—ऐसा मान लो तो आप जीवनमुक्त, तत्त्वज्ञ, महात्मा हो जाओगे।
*- श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज*