कृष्ण हुए तो अतीत में,लेकिन हैं भविष्य के।उनका देवत्व धर्म की परम गहराइयों-ऊँचाइयों पर होकर भी गंभीर नहीं।वह जिंदगी से उदास,निराश,भागा हुआ नहीं है।��ृष्ण हर परिस्थिति में अकेले नाचते दिखते हैं।हँसते-गाते मिलते हैं
@hemantsharma360
#Raaggiri #janmashtami2025
@YRDeshmukh @hvgoenka
Those who do not understand true pain can never understand true peace. Let them suffer let them know the pain, then only the true peace can be established.
#IndiaPakistanWar
ध्वस्त होते बुतों, खोखले चरित्रों, भड़भड़िया नेताओं के दौर में @Phogat_Vinesh हमारी असली नायिका हैं. यह कविता विनेश के जीवट और साहस को समर्पित है.
https://t.co/jFYmj8on4d
मरने की थी सबील जिए जा रहा हूँ मैं
साक़ी पिला रहा है पिए जा रहा हूँ मैं
मालिक की बख़्शिशों का हिसाब-ओ-किताब क्या
वो दे रहा है और लिए जा रहा हूँ मैं
'मोहसिन' हरीम-ए-दिल में उसे देख देख कर
अपना तवाफ़ आप किए जा ���ूँ मैं
~ शाह मोहसिन दानापुरी
आवाज़ - वसुंधरा रोगन
चलो कि आज सभी पायमाल रूहों से,
कहें कि अपने हर-इक ज़ख्म को जवाँ कर लें।
हमारा राज़, हमारा नहीं सभी का है,
चलो कि सारे ज़माने को राज़दाँ कर लें॥
- साहिर लुधियानवी
लम्हें 1991 में रिलीज़ हुई थी।ये क्लिप निश्चित तौर पर उससे पहले की है। यानी क़रीब 34-35 साल पुरानी। संगीतकार पंडित शिव-हरि जी से लता जी गाने के नोट्स जिस तरह ले रही हैं वो उनकी मेहनत-साधना और संजीदगी को दिखाता है। #Raaggiri@AnilKapoor@AnupamPKher@hvgoenka@YRDeshmukh@sumrag
ये सिर्फ एक क्लिप नहीं है। रस—वर्षा है। उस्ताद विलायत खां और उस्ताद बिस्मिल्लाह खां जुगलबंदी करते हुए "मोहे पनघट पर" बजा रहे हैं। सितार और शहनाई की म���ुर रस वर्षा में भीगते हुए आप कहीं खो जाते हैं।
अचानक दोनों उस्तादों का मन गुनगुनाने का हो उठता है
और फिर रोशनी बिखर जाती है।
दिल उसकी मुह��्बत में गिरफ़्तार हुआ था
इक हुस्न की देवी से मझे प्यार हुआ था
....
रॉ संगीत का अलग आनन्द है. ये वीडियो इंस्टाग्राम पर UNHEARD (unheard_shayari) के हवाले से मिला.
ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है
क्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
माना कि इस ज़मीं को न गुलज़ार कर सके
कुछ ख़ार कम तो कर गए गुज़रे जिधर से हम
साहिर लुधियानवी
(जन्मदिन विशेष)
#शायरी
जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता
मुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता
ग़लत बातों को ख़ामोशी से सुनना हामी भर लेना
बहुत हैं फ़ाएदे इस में मगर अच्छा नहीं लगता
जावेद अख़्तर
@Javedakhtarjadu
ग़म से बहल रहे हैं आप आप बहुत अजीब हैं
दर्द में ढल रहे हैं आप आप बहुत अजीब हैं
अपने ख़िलाफ़ फ़ैसला ख़ुद ही लिखा है आप ने
हाथ भी मल रहे हैं आप आप बहुत अजीब हैं
पीरज़ादा क़ासीम