Prayagraj Gen Alfa Protest
आज प्रयागराज में जो देखा वो शायद कभी नहीं भूलूंगा. एक ओर देश आज़ादी का जश्न मना रहा था और दूसरी ओर नन्हें बच्चे खुलकर बोल रहे थे कि उनके हॉस्टल की व्यवस्था कितनी जर्जर है. इनकी उम्र महज़ 9-15 साल के बीच की थी. वो प्रिंसिपल के सामने बोल रहे थे कि प्रिंसिपल कैमरे पर झूठ बोल रहे हैं. उन्होंने पूरा हॉस्टल घुमा दिया. जिस टंकी से बच्चे पानी पी रहे थे उसने चिड़िया मरी हुई पड़ी थी. सड़ी रोटियां पानी टंकी में पड़ी थी. अंडा पड़ा था. और प्रिंसिपल कह रहे उनके पास फंड नहीं है. सवाल है इसका जिम्मेदार कौन है? समाज कल्याण की देख रेख में चलने वाले हॉस्टल की इतनी बत्तर हालत क्यों? कौन जवाब देगा?
पूरी रिपोर्ट @thelallantop पर देखें.
Full Video Link- https://t.co/VHjOCIH6QF
शानदार एडिट और कैमरे के लिए @editor_yogesh_yadav को खूब बधाई दीजिए.
उत्तराखंड की अंकिता भंडारी याद है?
4 साल पहले एक VIP को खुश करने से इंकार करने पर उसकी हत्या कर दी गयी थी
हत्या का आरोप बीजेपी नेता के बेटे पर आया लेकिन सरकार बीजेपी की थी इसलिए आज तक इस मामले मे निष्पक्ष जाँच नहीं हुई
धीरे धीरे लोग भी भूल गए लेकिन राहुल गाँधी ने अंकिता के घरवालों से मुलाक़ात करके फिर इस मामले को उठा दिया
राहुल गांधी अब हर जगह पहुंच रहे है, लोगो से मिल रहे है, उनकी समस्याओ को सुन रहे है और उठा रहे है, इसलिए छवि बदलती जा रही है
लेकिन मुझे नहीं लगता जब तक बीजेपी सरकार उत्तराखंड मे है इस मामले मे न्याय हो पायेगा
बेटी बचाओ का नारा देने वाली बीजेपी अपने ही राज्य मे एक 19 साल की लड़की अंकिता भंडारी को न्याय नहीं दिलवा पायी है क्योंकि
इनकी कथनी और करनी मे अंतर होता है..
जिस दिन सरकार बदलेंगी उम्मीद है अंकिता की फ़ाइल फिर खुलेगी और उसे इंसाफ मिलेगा ✊
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा मौलाना मोहम्मद अली जौहर जी को भारत के विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना इतिहास के प्रति उनके अल्पज्ञान और स्वतंत्रता संग्राम के एक महान सेनानी के योगदान को राजनीतिक चश्मे से देखने का उदाहरण है।
मौलाना मोहम्मद अली जौहर जी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी, निर्भीक पत्रकार, शिक्षाविद और राष्ट्रवादी नेता थे। उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध मुखर होकर आवाज उठाई, जेल की यातनाएं सहीं और खिलाफत तथा असहयोग आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1930 में लंदन में आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन में उन्होंने भारत की स्वतंत्रता और स्वशासन की मांग मजबूती से उठाई। उन्होंने गुलाम भारत में लौटने से इनकार करते हुए आजादी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट की। 4 जनवरी 1931 को लंदन में उनका निधन हो गया।
इतिहास का एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर जी के निधन के दो वर्ष बाद, 1933 में, पहली बार ‘Pakistan’ नाम के साथ एक अलग राष्ट्र के गठन का प्रस्ताव रखा गया।
ऐसे में 1931 में दुनिया छोड़ चुके मौलाना मोहम्मद अली जौहर जी को 1933 में सामने आए ‘Pakistan’ के प्रस्ताव और 1947 में हुए भारत के विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराना इतिहास की घटनाओं, उनके कालक्रम और उनके वास्तविक राजनीतिक योगदान तीनों की अनदेखी है।
इतिहास को राजनीतिक चश्मे से नहीं, तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर पढ़ा जाना चाहिए।
“जानकारी का टोटा, बयानों की भरमार!”
अमेरिका में ग़ज़ब हो रहा है। जोहरान ममदानी के बाद एक और परिणाम ऐसा आया है जो इस्राइली लॉबी और बड़े थैलीशाहों के लिए बड़ा झटका है।
मिशिगन में डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रायमरी चुनाव में में डॉ. अब्दुल अल सैय्यद काँग्रेस वूमन हैली स्टीवेंस का हरा दिया है।
स्टीवेंस को इस्राइली लॉबी का समर्थन था। बल्कि अमेरिकी इतिहास में इस्राइली लॉबी ने किसी एक प्रायमरी में इतना खर्च नहीं किया जितना स्टीवेंस को जिताने और डॉय अब्दुल को हराने के लिए किया है।
उसने क़रीब 32 मिलियन डॉलर खर्च किए। लेकिन स्टीवेंस को जिताने के लिए धन्ना सेठों ने भी तिजोरियाँ खोल दी थीं। कुल मिलाकर साठ करोड़ डॉलर डॉ. अब्दुल को हराने के लिए खर्च किए गए मगर वे उन्हें हरा नहीं पाए।
डॉ. अब्दुल ममदानी की तरह समाजवादी हैं, इस्राइल के ख़िलाफ़ और फिलिस्तीन के समर्थन में खड़े हैं, वे भी आम आदमी की बात कर रहे हैं। उनकी जीत डेमोक्रेटिक पार्टी के दिग्गजों की भी हार है क्योंकि वे उन्हें जीतते नहीं देखना चाहते थे।
अब मिशिगन के चुनाव में अगर डॉ. अब्दुल जीते तो वे सीनेट के पहले मुस्लिम मेंबर बनेंगे।
यह स्कूल का मिड डे मील है... शिक्षक होने के नाते मेरा सवाल है कि अगर देश अपने बच्चों के साथ ये बर्ताव करता है तो आप क्या उम्मीद करते हैं - इन बच्चों को युवा और वयस्क होने के बाद इस देश समाज सरकार के साथ कैसा बर्ताव करना चाहिए?
संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को चाहिए कि वे नागरिकों को नागरिक बनाने - नागरिक हक, नागरिक दायित्व पूरा करने पर जोर दें न कि उन्हें बेटी, पोती, बहू, दीदी, चाची बनाने के नाम पर उनके मालिक और अभिभावक बनने की जुगत लगाएं. नागरिक सवाल पूछ रहे हैं जवाब दें बात खत्म. इंफ़ेंटलाइज़ेशन ऑफ़ सिटीज़नरी लोकतंत्र के ख़िलाफ़ है.
संविधान सिर्फ संसद, अदालतों और किताबों में नहीं रहता।
कभी-कभी उसकी सबसे ताकतवर आवाज उस युवा के गले से निकलती है, जिसके पास न सत्ता है, न मंच — सिर्फ अपने अधिकारों पर भरोसा है।
NEET पेपर लीक के विरोध में इरफ़ान का प्रस्तावना पढ़ना सिर्फ़ एक पाठ नहीं था। वह सवाल था— क्या न्याय, समानता और बंधुत्व सचमुच हर नागरिक के लिए हैं?
संविधान मनाने की चीज नहीं, जीने और अपने हक के लिए आवाज़ उठाने का दस्तावेज़ है।
#Constitution #NEET #StudentProtest #Justice #Equality
प्रधानमंत्री की मानहानि पुलिस की चिंता का विषय क्यों है? क़ानून के जानकर समझाएँ। मुझे तो अभी तक यही पता है कि जिसका अपमान होता है उसे सबूतों के साथ संदिग्ध के ख़िलाफ़ शिकायत करनी होती है. यानि ये कार्य प्रधानमंत्री का हुआ कि वे शिकायत करें कि अमुक ने यह यह कहा और लिखा इससे मेरी बेइज़्ज़ती हुई - पुलिस नियमानुसार FIR और तफ्तीश करे हर मामले में। ये फिशिंग क्यों की जा रही है ?