"सत्ता से सवाल करना अब आसान नहीं रहा..."
@news24tvchannel छोड़ने के बाद वरिष्ठ पत्रकार गरिमा सिंह ने टीवी मीडिया का ऐसा सच सामने रखा है, जिसे हर नागरिक को सुनना चाहिए।
अगर किसी सरकार के दौर में पत्रकारों को सवाल पूछने से पहले दबाव, ट्रोलिंग और स्टूडियो तक पहुँचने वाली भीड़ का डर सताने लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है।
जब पत्रकार निर्भीक नहीं रहेंगे, तो जनता भी सच से वंचित होती जाएगी। इसलिए यह मुद्दा किसी एक पत्रकार या एक चैनल का नहीं, पूरे लोकतंत्र का है।
बाक़ी, आपकी समझदारी पर छोड़ता हूँ।
“गुंडे भेजने के बाद एक 15 साल की लड़की को सबके सामने माफ़ी मांगने के लिए मजबूर करना और फिर उस माफ़ी को स्वीकार करना पूरी तरह बकवास है”
@RahulGandhi 🔥🔥🔥🔥
⦿ जब मैं शांति से चल रही थी तो पुलिस ने मुझे क्यों मारा?
⦿ ये रूल है कि एक मेल ऑफिसर किसी लड़की को नहीं मार सकता, तो एक पुरुष RAF ऑफिसर ने मुझे कैसे मारा?
⦿ Why did he try to jab a baton into my buttocks?
उस ऑफिसर को जिसने भी ऐसा करने का ऑर्डर दिया था, अगर वो माफी मांग ले, तो मुझे खुशी होगी।
: मुस्कान शर्मा जी
डायरी, अलॉटमेंट और रजिस्ट्री के बाद भी खरीदारों को नहीं मिली जमीन... भूमाफियाओं पर एफआईआर दर्ज हुई और गिरफ्तारी वारंट भी जारी हुए पर कोई कार्रवाई नहीं
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हमारी माँग यही है कि प्रधानमंत्री मोदी जी और गृह मंत्री अमित शाह सदन में आएँ। वो अपना बयान दें, हम चर्चा करने को तैयार हैं। चर्चा से ही हल निकलेगा।
सदन शुरु हुए काफी दिन हो गए हैं। उन्हें आना चाहिए, सदन में न आकर वो संसद का अपमान कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर गरिमा सिंह का वीडियो वायरल है. न्यूज़ 24 से इस्तीफा देने के 27 दिन बाद गरिमा सिंह आखिकार अपनी चुप्पी आज तोड़ी.
गरिमा सिंह ने कहा, न्यूज़ चैनल पर सत्ता पक्ष से सवाल करना मुश्किल कर दिया गया है. सरकार से जब सवाल पूछ ही नही पाऊंगी तो इस्तीफा देना बेहतर समझा.
गरिमा सिंह ने कहा, एक वो दौर था जब पत्रकार अपना माइक लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सामने खड़े हो जाते थे.
गरिमा सिंह ने एक तीर से कई लोगों को निशाना साधा है. उन्होंने साफ कहा, इस्तीफा देकर काफी सुकून महसूस कर रही हूँ. गरिमा सिंह ने कभी किसी विपक्षी नेता को उस तरह अपमानित नही किया, जैसा चित्रा त्रिपाठी, रुबिया लियाकत और अंजना ओम कश्यप करती हैं. सरकार को सीधे घेरने पर गरिमा सिंह के बहादुरी की तारीफ करनी चाहिए.
जिस देश की भावनाएं 16 साल की बच्ची की गालियों से आहत हो रही थीं
उस देश को भगवान के नाम पर भक्त बने इन ‘कांवड़ियों’ की गुंडागर्दी और गाली गलौज से आत्मा तृप्त होती दिख रही है
Hypocrisy की भी सीमा होती है
https://t.co/GkGf2Hf44j
मोदी ही नहीं चाहिए ये clear हो गया है.. मोदीजी आप क्यों ज़बरदस्ती लोगों के मम्मी पापा मसीहा बने हो, लोग नहीं चाहते है आपको.. इतना मौज काट लिया है झूठ फरेब करके, अब देश को बख्स दो न प्लीज
भोपाल में बारिश करवाने के लिए लोगों ने गधों को गुलाब जामुन खिलाएगए । अब मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक सोच रहे होंगे कि इतने सालों से हम उपग्रह, रडार और सुपरकंप्यूटर पर अरबों रुपये क्यों खर्च कर रहे हैं, जबकि समाधान तो हलवाई की दुकान पर रखा था.
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वैसे यह देश उम्मीदों पर चलता है। कभी मेंढकों की शादी कराई जाती है, कभी यज्ञ होता है और अब गधों को गुलाब जामुन खिलाए जा रहे हैं। बेचारे गधे भी सोच रहे होंगे कि ज़िंदगी भर बोझ ढोया, लातें खाईं और आज अचानक वीआईपी ट्रीटमेंट क्यों मिल रहा है? कहीं चुनाव तो नहीं आ गए?
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अगर सचमुच गुलाब जामुन से बारिश आती है, तो अगली बार सूखा पड़ने पर सरकार राहत पैकेज की जगह एक किलो रसगुल्ला योजना और दो किलो गुलाब जामुन मिशन शुरू कर दे। मौसम विभाग का नाम बदलकर मिठाई विभाग कर दिया जाए, और पूर्वानुमान कुछ ऐसा हो आज शाम तक दो किलो जलेबी और चार किलो गुलाब जामुन खिलाने पर हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना है।
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दरअसल, समस्या गुलाब जामुन या गधों की नहीं है। समस्या यह है कि हम विज्ञान पर भरोसा कम और प्रतीकों पर ज़्यादा करते हैं। मौसम बदलने के लिए पेड़ लगाने, तालाब बचाने और नदियों को साफ़ रखने से ज़्यादा आसान लगता है किसी गधे को मिठाई खिला देना।
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बेचारे गधे उन्हें क्या पता था कि इंसानों की उम्मीदों का सबसे मीठा बोझ भी आखिर उनकी ही पीठ पर लाद दिया जाएगा।😂
प्रधानमंत्री जी,
श्री राम मंदिर में करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ अपनी कमाई अर्पित की - वहां हुई चंदा चोरी अब किसी से छुपी नहीं है।
ट्रस्ट के हर सदस्य को आपकी सरकार ने चुना था। इस चंदा चोरी पर आपकी चुप्पी अस्वीकार्य है।
तत्काल स्वतंत्र जांच कराइए, पूरा हिसाब सार्वजनिक कीजिए और दोषियों को कानून के कटघरे में लाइए।
आपकी सरकार की विश्वसनीयता अब आपकी कार्रवाई पर निर्भर है।
ये यामिका गांधी हैं, जो न्यूज़ीलैंड में रहने वाली एक डेटा साइंटिस्ट हैं।
उन्होंने कहा अपने एक ब्लॉग में बताया कि👇
"तो शाम के 4 बज रहे हैं, और मेरा ऑफिस खाली है क्योंकि लोग आमतौर पर शुक्रवार को घर से काम करते हैं। मेरे कलीग ने मुझे एक मैसेज भेजा, जिसमें लिखा था, 'थैंक यू, यामिका। मैं सच में आपके काम की तारीफ़ करता हूँ।
मैं कन्फ्यूज़ हूँ कि क्या जवाब दूँ क्योंकि मैं उन पर कोई एहसान नहीं कर रही हूँ। ये मेरे नॉर्मल काम के घंटे हैं, 9 से 5 के बीच, और मुझे इस काम के लिए पैसे मिलते हैं।
अगर मैं थोड़ा भी अच्छा काम करती हूँ, तो लोग उसे नोटिस करते हैं और उसके लिए मेरी तारीफ़ करते हैं।
मेरे मैनेजर ने मुझसे कहा कि मैं हफ़्ते में 40 घंटे से ज़्यादा काम न करूँ। और अगर मैं किसी दिन थोड़ा ज़्यादा काम कर रही हूँ, तो मुझे अगले दिन काम-ज़िंदगी को बैलेंस करने के लिए कुछ समय की छुट्टी लेनी चाहिए।
लेकिन इंडिया में, हमारे मैनेजर लोगों को ओवरटाइम और कभी-कभी वीकेंड पर भी काम करने के लिए मजबूर करते हैं क्योंकि आप जितनी ज़्यादा मेहनत करते हैं, आप उतने ही रिस्पेक्टेबल होते हैं। और इसे अक्सर क्वालिटी के बजाय घंटों की क्वांटिटी से मापा जाता है।"
17 जुलाई को देहरादून आ रहा हूँ। पर उत्तराखंड ही क्यों? क्योंकि देवभूमि को पेपर लीक का epicentre बना दिया गया है।
UKSSSC परीक्षा में यहाँ एक “सिस्टम” बैठ गया है, जहाँ पटवारी, लेखपाल, या कोई और पद क़ाबिलियत से नहीं, अपराधियों के तय किए रेट से मिलता है।
सरकार ने सख़्त नकल-विरोधी क़ानून बनाया - फिर भी लीक होते रहे। क़ानून काग़ज़ पर रहा, और पेपर बाज़ार में बिकते रहे।
ज़रा सोचिए, एक बच्चे ने सालों तैयारी की। फ़ॉर्म भरा, फ़ीस दी, दूर के सेंटर तक गया। और उसका पद किसी और ने ख़रीद लिया।
यह लीक नहीं - यह चोरी है। उस युवा के हक़ की, उसके रोज़गार की, उसके भविष्य की।
मैं उत्तराखंड के हर अभ्यर्थी, हर छात्र, हर युवा से कहता हूँ - यह आपकी लड़ाई है, और मैं आपके साथ हूँ।
17 जुलाई, देहरादून। आइए, ‘छात्रों की गूँज’ को हुंकार बनाएँ। भविष्य नीलाम नहीं होने देंगे। सपने लीक नहीं होने देंगे।
अभी जुड़ें: https://t.co/g6mbw7X5XC
#ChhatronKiGoonj