I did my master’s from Panjab University even in distance mode, it always felt like home. Some protests aren’t against power they’re for belonging.
What’s happening in Panjab University isn’t just about elections — it’s about identity.
#PUProtest#SavePU
The daylight killing of a gym operator in Hisar is deeply disturbing. Similar attacks have raised serious concerns about public safety. Regardless of the motive, such incidents highlight the urgent need for stronger law enforcement and a safer environment for citizens.
#hisar
On Sidhu Moosewala’s 4th death anniversary, his mother’s words break hearts once again - ‘You live in my every breath.’ A pain no time can heal, a son never forgotten. 🕊️💔’
#sidhumoosewala#punjabisinger#Punjab
Punjab Local Bodies Election Results
Mukerian Municipal Council (10/15)
BJP - 06
INC - 03
AAP - 01
This falls under constituency of BJP MLA Jangilal Mahajan
#Breaking
धुरी नगर काउंसिल में @AamAadmiParty की बड़ी जीत
धुरी की 21 नगर काउंसिल की सीटों में से आप ने 20 सीटें जीती।
धुरी CM @BhagwantMann की विधानसभा है
Another serious revelation regarding the alleged Punjab Police #LawrenceBishnoi connection. As reported by senior journalist @japs99 , a Punjab Police DSP allegedly sent birthday gifts to Bishnoi while he was lodged in a Gujarat jail.
क्या अपर्णा… तुमसे रोया भी ना गया !
अपर्णा यादव अपना चेहरा अपने दिवंगत पति से 90 डिग्री पूर्व की ओर रखकर...18 के डेसिबल पर चीखी होतीं...2 मिनट 53 सेकेंड तक आंखो से 5 मिलीलीटर आंसू निकाले होते...तो शायद वो आदर्श पत्नी होती।
या क्या पता इससे भी कुछ और नपा तुला तय है जो उन्हें करना चाहिए और वो नहीं कर पाई इसलिए वो आदर्श पत्नी नहीं रह गईं।
मुझे डर है उन पर सवाल उठाने वाले कहीं अपने घरों में परिजनों की मृत्यु की मॉक ड्रिल्स ना करवाते हों...ताकि सब उनके तय हिसाब से हो। पर ईश्वर के तय हिसाब का आज तक कौन हिसाब लगा पाया है।
और आपके घर की मृत्यु पर आपके परिजन आपके हिसाब से रोएंगे ना। अपर्णा यादव आपके फूफा की मृत्यु के हिसाब से कैसे आपकी भूमिका निभा सकती हैं? उनसे ये अपेक्षा क्यों?
कई लोग सवाल उठा रहे हैं जब पति बीमार थे तो वो असम क्यों गई…यहां क्यों गई… वहां क्यों गई? बड़ी साधारण सी बात है कि वो पत्नी और मां होने के साथ ही महिला आयोग की अध्यक्ष भी हैं, बीजेपी की नेता भी हैं...वो असम इसीलिए गईं क्योंकि उन्हें ये दायित्व भी निभाना था।
गिद्ध की तरह स्क्रूटनी पर बैठे समाज की जींस कभी मंदिरा बेदी की जींस से मैच नहीं खाती इसलिए वो कहता है कि उन्हें अपने पति के अंतिम संस्कार पर जींस नहीं पहननी चाहिए थी।
अपर्णा यादव महिला आयोग की अध्यक्ष हैं। जब उनके शोक पर सवाल उठ रहे हैं तो वो समझ सकती हैं उन्हें कैसे समाज से महिलाओं की रक्षा के लिए...उनके कल्याण के लिए... अपनी आवाज उठानी है।
दरअसल पति के जाने पर छाती पीटती औरतें इस समाज के लिए एक सुकून होती हैं...आश्वासन होती हैं। घूंघट के पीछे गश खाती रिरियाती औरतें समाज को उसके प्रति बेचारगी से भर देती हैं।
लेकिन बड़ा डराती है समाज को फिर से उठ खड़ी होती...उसके खांचे को मानने से इनकार करने वाली, उसकी बेड़ियों में ना बंधने वाली औरतें।
याद है आपको...
पहलगाम हमले में मारे गए शुभम द्विवेदी की 29 साल की पत्नी ऐशान्या को कहना पड़ा...बस मैं ये चाहती हूं कि अब मैं कभी हंसू तो लोग ये ना कहें कि बताओ इसके पति की तो हत्या हो गई थी और ये हंस रही है।
बड़ी साधारण बात है। दुख दुख होता है। कोई छाती पीट के रो लेता है कोई पथराई आंखो के पीछे सब सोख लेता है। निजी दुख पर किसी के लिए परफार्म नहीं करना होता और कैमरे के लिए तो हरगिज नहीं।
उसे रोने दीजिए , समझने दीजिए , संभलने दीजिए, संभालने दीजिए, दोबारा चलने दीजिए.. पुरुष के साथ भी तो आप ऐसा ही करते हैं ना..
पत्नी की मृत्यु पर अगर पति विधुर होता है तो पत्नी भी पति की मृत्यु पर विधवा ही होती है अपाहिज नहीं।
संवेदना की स्थिति में पुरूष को भी कंधा चाहिए होता है स्त्री को भी कंधा ही चाहिए होता है गोद नहीं।
जब आप एक स्त्री को ऐसे हालात से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें तो नीयत इतनी साफ रखे कि वो आगे बढ़े तो आगे आकर खुद ही ना खड़े हो जाएं।
बाकी हाय हाय बेचारी की उपमा वाली स्त्री आत्मनिर्भर होने के बाद कहलाती तो बड़ी तेज ही है।
इसलिए स्त्री का तेज सहने की क्षमता रखने वाला समाज बनिए। राजा राम मोहन राय और ईश्वर चंद विद्या सागर की आत्मा को भी शांति मिलेगी।
@aparnabisht7