मैंने ये वीडियो अपनी timeline पर कई लोगों के handles से देखा।
और सबसे ज्यादा शर्म इस बात की आई कि लोग एक इंसान के गिरने पर हंस रहे हैं।
अरे भाई, तुम्हें इसमें funny क्या लग रहा है?
एक महिला बाइक से गिर गई क्योंकि बारिश के पानी में सड़क का गड्ढा दिखाई नहीं दिया। बाइक का balance बिगड़ा और वो सड़क पर जा गिरी।
कल वो महिला आपकी माँ, बहन या पत्नी भी हो सकती है।
लेकिन छोड़िए… Reel है भाई, हंस लो।
किसी के दर्द पर views और likes मिल रहे हैं तो इंसानियत जाए भाड़ में।
और इससे भी ज्यादा शर्म की बात उन लोगों के लिए है जो उसी इलाके में रहते हैं, जानते हैं कि वहां बारिश में पानी भरता है, सड़क के गड्ढे दिखाई नहीं देते और हादसे हो सकते हैं—फिर भी कभी आवाज नहीं उठाते।
फिर जब कोई गिर जाता है तो वीडियो बनाओ, Reel डालो और हंसो।
सड़कें आपकी जिम्मेदारी नहीं हैं—लेकिन सवाल पूछना आपकी जिम्मेदारी जरूर है।
जिन authorities की जिम्मेदारी है सड़क को सुरक्षित रखना, उनसे सवाल पूछिए।
जिन लोगों को आप चुनते हैं, उनसे सवाल पूछिए।
जिस व्यवस्था को आप अपना पैसा देकर चलाते हैं, उससे सवाल पूछिए।
Police आपका challan काटे तो बिना सवाल किए भर देते हो।
लेकिन जब सड़क के गड्ढे की वजह से कोई गिर जाए तो सवाल पूछने में डर क्यों लगता है?
क्यों?
क्योंकि हमें अपनी जिम्मेदारी सिर्फ challan भरने तक याद रहती है?
मुझे नहीं पता कितने लोग मेरी इस बात से सहमत होंगे।
लेकिन अगर आप खुद को थोड़ा भी जागरूक और जिम्मेदार नागरिक मानते हैं तो अगली बार ऐसी Reel देखकर हंसने से पहले एक सवाल जरूर पूछिए:
“ये सड़क ऐसी क्यों है?”
आज सिर्फ एक महिला गिरी है।
कल कोई बच्चा हो सकता है।
कल कोई बुजुर्ग हो सकता है।
कल कोई ऐसा इंसान हो सकता है जिसकी जिंदगी सिर्फ एक गड्ढे की वजह से बदल जाए।
हर हादसे के बाद “शुक्र है बच गए” बोलना समाधान नहीं है।
समाधान है: सवाल पूछना। शिकायत करना। आवाज उठाना। Accountability मांगना।
और अगर कुछ नहीं कर सकते, तो कम से कम इस वीडियो को इतना शेयर कीजिए कि ये उस व्यक्ति तक पहुंचे जिसके पास इस समस्या को ठीक करने की जिम्मेदारी है।
सिर्फ Reel मत देखिए।
सिर्फ हंसिए मत।
विरोध कीजिए। सवाल पूछिए। आवाज उठाइए।
और अगर किसी को पता है कि ये वीडियो किस जगह का है, तो location जरूर बताइए।
क्योंकि अगली बार कोई गिरे, उससे पहले गड्ढा ठीक होना चाहिए।
A young man in Mumbai collected eighteen lakh rupees online this week for his sister's urgent brain surgery.
It turned out she did not exist. Thousands of regular people donated fifty and five hundred rupees within two days simply because an emotional appeal went viral on their feed. Social media has made financial fraud so simple that bad actors now trade directly on human sympathy before anyone even asks for a hospital stamp.
Empathy without basic verification is just funding your own deception.
बैंक वाले फिर हड़ताल पर हैं।
माँग क्या है? सप्ताह में 2 दिन अवकाश चाहिए।
सुबह 10 बजे बैंक आना –
चाय-पानी के बाद काम शुरू करना, दोपहर में 45 मिनट से 1 घंटे का लंच ब्रेक और फिर शाम होते-होते घर जाने की तैयारी।
त्योहारों की छुट्टियाँ अलग, बीमारी की छुट्टियाँ अलग और अब सप्ताह में दो दिन की छुट्टी भी चाहिए।
वेतन और सुविधाएँ भी कम नहीं हैं –
सवाल यह है कि जब बैंकिंग व्यवस्था का सीधा संबंध आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरतों से है, तो क्या काम के दिनों और छुट्टियों में बदलाव के साथ ग्राहक सेवा की गुणवत्ता और जवाबदेही पर भी उतना ही ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए?
पब्लिक सेक्टर के तुलना में प्राइवेट बैंक के कर्मचारी अक्सर कम वेतन और संसाधनों में भी ज्यादा ग्राहक संभालते दिखाई देते हैं। वहाँ ग्राहक सेवा, समयबद्ध काम और प्रतिस्पर्धा का दबाव काफी अधिक होता है।
वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कई ग्राहकों की शिकायत रहती है कि एक छोटे से काम के लिए भी उन्हें कई बार बैंक के चक्कर लगाने पड़ते हैं। पासबुक प्रिंट से लेकर छोटे-छोटे अपडेट तक के लिए कभी एक काउंटर तो कभी दूसरे काउंटर भेज दिया जाता है। घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी काम न हो पाए तो ग्राहक की परेशानी स्वाभाविक है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक आखिरकार आम आदमी की बैंकिंग जरूरतों को ध्यान में रखकर खड़े किए गए थे। गाँव-गाँव बैंकिंग पहुँचाने, छोटे किसानों, छोटे कारोबारियों और जरूरतमंद लोगों तक वित्तीय सेवाएँ पहुँचाने के उद्देश्य से।
आज जरूरत इस बात की है कि,
बैंक कर्मचारियों के अधिकारों और सुविधाओं के साथ-साथ ग्राहकों के समय, सम्मान और सुविधाजनक बैंकिंग के अधिकार को भी उतनी ही गंभीरता से देखा जाए।
महाराणा प्रताप वार्ड, शिव नगर कॉलोनी, अयोध्या में नगर निगम द्वारा पाइपलाइन डालने के लिए सड़क खोद दी गई है, लेकिन कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है।
खुले गड्ढों और टूटी सड़क के कारण राहगीरों, बच्चों को समस्या होती है
@Jayendra_IAS@girishpati#NagarNigamAyodhya
@pulsestories1 i really want to appreciate you for the calmness you maintain in space despite wo many mugups, i dont know if my words means but you shouldn't say goodbye