छात्रों की मांगों को लेकर सरकार शुरू से ही गंभीर रही है। अब छात्रों की मांगों के संबंध में निर्णय लिया गया है कि इस बार की TRE-4 परीक्षा एकल चरण में आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही 9 अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए हैं।
राज्य सरकार ने विभिन्न परीक्षाओं में सुधार के लिए अनुशंसाएँ देने हेतु “परीक्षा सुधार पर एक विशेषज्ञ समिति” का गठन किया है। माननीय पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित यह समिति विभिन्न परीक्षाओं से संबंधित छात्रों की शिकायतों की भी सुनवाई करेगी।
सरकार ने छात्रों की समस्याओं और शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए “विद्यार्थी सहयोग पोर्टल” एवं “विद्यार्थी सहयोग शिविर” की शुरुआत की है। इसके माध्यम से छात्रों की समस्याओं का समाधान 30 दिनों के भीतर किया जा रहा है।
सरकार छात्रों के कल्याण और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।
JUST IN: Supreme Court issues notice to Centre and Jharkhand government on PIL seeking CBI probe into alleged job scam in Jharkhand.
A CBI probe has been one of the main demands of JPSC aspirants, whereas state govt is carrying out a CID probe
#WATCH | Delhi | Advocate Manan Kumar Mishra says, "There were numerous corrupt practices and irregularities in the Jharkhand JPSC and Staff Selection Commission exams. A CID investigation revealed this, and numerous arrests were made. The state government took notice and cancelled the exam. We told the Supreme Court that the petition was filed, mentioned, and stayed in one day. That's why we demanded a CBI investigation led by a retired judge... The Supreme Court ordered a full investigation to understand the details of the case and therefore issued a notice..."
कल तक कई लोगों को लगता था कि सुप्रीम कोर्ट #JPSC#JSSC नियुक्ति महाघोटाले को देखते ही, याचिकाकर्ता को रांची हाई कोर्ट भेज देगी।
लेकिन आज चीफ जस्टिस की बेंच ने ना सिर्फ इस मामले को स्वीकार किया, बल्कि चीफ जस्टिस ने, JPSC के माध्यम से ज्यूडिशियरी की जो परीक्षा होती है, उस पर भी चिंता जताई।
सुप्रीम कोर्ट के रुख को देखकर अब ऐसा लगता है कि झारखंड का नौकरी घोटाला जल्द ही CBI की चौखट तक पहुँचने वाला है। और अगर CBI पहुँची, तो फिर जाँच की आँच सिर्फ़ घोटाले तक सीमित नहीं रहेगी—मुख्यमंत्री आवास की पूरी “किचन कैबिनेट” को भी जेल की राह दिख सकती है। #JPSC#JSSC#jharkhand
शर्मनाक हरकत की भी कोई सीमा होती है!
जिस राज्य के मंत्रियों को JPSC का फुल फॉर्म तक नहीं पता और मुख्यमंत्री युवाओं को 'मुर्गी-बकरी पालने' का ज्ञान देते हैं, उस राज्य की पुलिस अब पैंट का प्रिंट देखकर आंदोलन कुचलने निकली है!
अपनी नाकामी और घोटालों को छिपाने के लिए छात्रों को यूं प्रताड़ित करना बंद कीजिए।
#JharkhandYouth #StudentProtest #JPSC_JSSC_Scam #HemantSoren #RanchiPolice #hitlerhemant
झारखंड के JPSC/ JSSC CGL की तरह ही एक मामला राजस्थान में आया था। साल 2021 में वहाँ की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में राजस्थान एसआई/दरोगा भर्ती परीक्षा की बहाली के दौरान पेपर लीक हुआ था, जिसकी वजह से 3.83 लाख अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लग गया था।
बाद में सरकार बदली तो जाँच शुरू हुई, और इसी इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पानी के गिलास में दो-तीन बूंद जहर गिर जाए तो उसे पानी से अलग नहीं किया जा सकता, पूरा गिलास फेंकना ही पड़ता है।
लेकिन झारखंड में, इस भ्रष्ट्र सरकार ने खुद को बचाने के लिए पहले सीबीआई जाँच से इनकार किया, फिर छात्रों से झूठा वादा कर के आंदोलन खत्म करवाया और अगले दिन कोर्ट में खामोश रह कर मामले को उलझा दिया।
फिर जब उसके विरोध में छात्र प्रदर्शन करने आए, तो अपने गुंडों एवं पुलिस से उन्हें पिटवाया, झूठे मुकदमे दर्ज करवाए, और आंदोलन को कुचलने का प्रयास किया।
अगर आपको लगता है कि युवाओं की आवाज को लाठियों के बल पर दबाया जा सकता है, तो आपने इतिहास से कुछ नहीं सीखा। इसी देश में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने युवाओं की आवाज को कुचलने के लिए इमरजेंसी तक लगा दी थी, लेकिन जनता ने उस सरकार को उखाड़ फेंका।
@harisharandevgn सुप्रीम कोर्ट की बेंच में शामिल माननीय जस्टिस वी. मोहना पहले हाई कोर्ट में CGL केस में सिलेक्टेड स्टूडेंट्स की तरफ से वकालत कर चुकी हैं, तो यह सीधा Conflict of Interest का मामला बनता है।
और लीगल टीम के ध्यान में आना बेहद जरूरी है ताकि नियम के तहत निष्पक्ष बेंच में केस जा सके।
>ब्रो का नाम हेमंत सोरेन है
>ब्रो झारखंड का मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री भी है
>ब्रो की योग्यता पिताजी को ठंड में गरम पानी देना
>ब्रो बिना किसी मेहनत के मुख्यमंत्री बन गया इसलिए ब्रो को मेहनत का पता नहीं
>ब्रो अपने कार्यकाल में एक भी परीक्षा सही से नहीं करवा पाया
>ब्रो के खिलाफ आन्दोलन हुआ, ब्रो डर गया,
>ब्रो ने बच्चों को बहला फुसलाकर घर भेज दिया
>ब्रो के खिलाफ बच्चों ने शांतिपूर्ण आन्दोलन किया
>लेकिन अब ब्रो और उसके अधिकारी चुन चुन कर बच्चों के खिलाफ मुकदमे लिखवा रहे
>कई लोगों के खिलाफ ट्वीट लिखने तक पर मुक़दमे हो रहे
>जब जब ब्रो डरता है पुलिस को आगे करता है
#WATCH | Ranchi, Jharkhand | Mayor Roshni Khalkho says, "It has been about three or four hours since we have been sitting here. Initially, we had no idea what was happening here... It was only when we started to protest that they revealed there was an earlier case involved. I asked if there was a pre-existing case for which the girls were picked up, why didn't they issue a notice?... But to send three or four vehicle-loads of police force for a girl living in a hostel, pick her up from her room, and keep her detained at the station for four or five hours—can you imagine the state of her mental well-being? This is a complete conspiracy by the government here to weaken the student movement. They are singling out students, filing cases against them, and trying to break their morale. This girl had participated in the protest. That is precisely why they brought her in. Because the policy here is to silence anyone who raises their voice against the government. This is Hemant’s 'courageous' government... If it were a case under the jurisdiction of the Sadar police station, she should have been taken to Sadar. Why did you bring her to Kotwali?... She was whisked away secretly through the back door, keeping us in the dark..." (22.08)
झारखंड के छात्रों की आवाज़ अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच चुकी है।
JPSC परीक्षा और अन्य परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका की पहली सुनवाई होने जा रही है।
यह सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि उन हजारों छात्रों के भविष्य की लड़ाई है जिन्होंने वर्षों की मेहनत और उम्मीदें इन परीक्षाओं से जोड़ी हैं।
दिल्ली और आसपास मौजूद झारखंड के सभी छात्रों से अपील है कि पहली सुनवाई के दिन 24/August/2026 अधिक से अधिक संख्या में सुप्रीम कोर्ट पहुँचकर छात्रों की एकजुटता और अपनी आवाज़ का समर्थन करें।
आज जरूरत है साथ खड़े होने की, क्योंकि जब छात्र एकजुट होते हैं, तो उनकी आवाज़ को अनसुना करना आसान नहीं होता।
आइए, अपने अधिकारों, निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था और झारखंड के छात्रों के भविष्य के लिए एक साथ खड़े हों।
एकजुट छात्र ही मजबूत आवाज़ हैं।
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