1. गुजरात राज्य के ज़िला गिर सोमनाथ के ऊना में सन् 2016 में हुये दलितों पर जघन्य अन्याय-अत्याचार काण्ड के लगभग सभी अभियुक्तों को मार्च में स्थानीय कोर्ट द्वारा बरी करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देकर न्याय पाने के लिये पीड़ित दलित परिवारों को वित्तीय आदि का भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी विचलित करने वाली कड़वी सच्चाई से ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के लोगों में भारी चिन्ता व्याप्त है।
2. इसको लेकर मेरी चिन्ता का विशेष कारण यह भी है कि इस काण्ड के पीड़ितों से मिलने मैं खु़द भी वहाँ गयी थी और वहाँ सच्चाई का पूरा पता करने के बाद राज्य सरकार से सभी दोषियों के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई करने की माँग की थी, किन्तु देश भर में इसके ख़िलाफ रोष व आक्रोश आदि होने के बावजूद 40 में से 35 आरोपी के मार्च महीने में बरी हो जाने की ख़बर कुछ और नहीं बल्कि दलितों के प्रति सरकारी द्वेष, उनके हित व सुरक्षा के प्रति लापरवाही व उदासीनता आदि का ही परिणाम ज़्यादा लगता है।
3. वैसे अभी भी मौक़ा है जब गुजरात सरकार अपनी इस ग़लती में सुधार करते हुये इस मामले की हाईकोर्ट में उचित पैरवी करके सभी दोषियों को सख़्त सज़ा दिलवाये ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके और दूसरों को सबक।
4. साथ ही, राज्य सरकार पीड़ित परिवार वालों के संतोष के मुताबिक वकील सरकारी ख़र्च पर उसी तरह मुहैया कराये, जिस प्रकार बी.एस.पी. की यूपी में मेरी रही सरकार ने ग़रीबों के लिये फ्री में क़ानूनी सहायता का क़ानूनी प्रावधान किया था।
सपा सरकार के दौरान मात्र 4 महीने में 460 करोड़ कैसे खर्च हुआ था? एक दिन का कितना हुआ?
सैफई में निजी शौक के लिए 334 करोड़ के नाच वाले अलग ही छोड़ दो?
तब का 460 करोड़ आज का कितना होता?
#BreakingNews: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का लंबी बीमारी के बाद लखनऊ में निधन हो गया।
उमाशंकर सिंह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन से प्रदेश की राजनीति में शोक की लहर है।
उमाशंकर सिंह केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि निर्माण क्षेत्र में भी एक बड़ा नाम थे। उनकी निर्माण कंपनी छात्र शक्ति उत्तर प्रदेश की प्रमुख निर्माण कंपनियों में गिनी जाती है।
उनके निधन की खबर सामने आने के बाद समर्थकों और राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया है।
#UmaShankarSingh #BSP #Ballia #UttarPradesh #ATCard #AajTakSocial | @aap_ka_santosh
लखनऊ : बसपा विधायक उमाशंकर सिंह का निधन
➡विधायक के निधन पर मायावती ने जताया दुख
➡उमाशंकर सिंह का निधन को बेहद दुखद
➡उमाशंकर सिंह कर्मठ, ईमानदार नेता थे
➡BSP परिवार हर दुख की घड़ी में साथ है- मायावती
#Lucknow#Mayawati#UttarPradesh
बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता पार्टी में हमारे मिशनरी साथी एवं रसड़ा विधानसभा से बसपा के विधायक आदरणीय श्री उमाशंकर सिंह जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद एवं हृदय विदारक है।
कुदरत से प्रार्थना है कि शोकाकुल परिवार, समर्थकों और चाहने वालों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति एवं संबल प्रदान करे।
भावभीनी विनम्र श्रद्धांजलि। 💐
भावपूर्ण श्रद्धांजलि
बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं रसड़ा विधानसभा से विधायक उमाशंकर सिंह जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद एवं पीड़ादायक है।
उन्होंने जनसेवा, सामाजिक सरोकार और अपने क्षेत्र के विकास के लिए जो योगदान दिया, उसे सदैव स्मरण किया जाएगा। उनका निधन राजनीतिक एवं सामाजिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों, समर्थकों एवं शुभचिंतकों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
ॐ शांति।
बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) के कर्मठ, ईमानदार व पूरी तरह से वफादार बलिया की रसड़ा सीट से लोकप्रिय विधायक श्री उमाशंकर सिंह की आज शाम लम्बी बीमारी की वजह से इलाज के दौरान देहान्त हो जाने की ख़बर अति-दुखद। उनके परिवार तथा उनके सभी चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी शोक संवेदना। पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा की जितनी भी तारीफ की जाये वह कम है। उनका पूरा परिवार बी.एस.पी. परिवार की तरह है तथा उनके परिवार के सभी लोग मुझे बड़ी बहन की तरह ही पूरा आदर-सम्मान देते हैं।
उनके पुत्र से लगातार सम्पर्क बने रहने के दौरान ही आज शाम उनके देहान्त की ख़बर उनके पुत्र से ही मिली। इस दुख की घड़ी में मैं व पूरी पार्टी उनके व उनके परिवार के साथ है तथा उन्हें किसी भी प्रकार से हिम्मत नहीं हारना है बल्कि इस परिस्थिति का सामना करते हुये आगे बढ़ना है। कुदरत उन सभी लोगों को इस दुख को सहन करने की शक्ति दे।
दतिया में भाजपा और दलाल चन्दू की प्लानिंग फेल होती दिख रही है।आरएसएस का पाला हुआ अब भाजपा के किसी काम का नही आ रहा। भाजपा इस से अपना बंगला औऱ सिक्युरिटी वापस ले सकती है
1. उत्तर प्रदेश विधानमण्डल का मानसून सत्र आज दिनांक 3 अगस्त से शुरू हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक़ कुल मिलाकर चार कार्य दिवस वाले इस सत्र में अगले दिन दिनांक 4 अगस्त को सरकारी ख़र्चे सम्बंधी अनुपूरक बजट राज्य सरकार विधानसभा में पेश करेगी।
2. हालाँकि यह सत्र अति-अल्पकालीन है, फिर भी लोगों की यही अपेक्षा है कि यूपी विधानमण्डल का यह सत्र, संसद के वर्तमान सत्र की तरह ही, देश व जनहित, जनकल्याण एवं जव्लन्त जन समस्याओं के प्रति समर्पित होने के बजाय, संकीर्ण दलगत राजनीति, खींचतान, आरोप-प्रत्यारोप व हंगामा आदि की पूरी तरह से भेंट ना चढ़ जाये।
3. वैसे इस अल्पकालीन सत्र को लेकर लोगों की यह चिन्ता भी स्वाभाविक ही है कि अफ़सरशाही (ब्यूरोक्रेसी) को संविधान के शपथ के प्रति जवाबदेह एवं जनहित, जनकल्याण को लेकर उत्तरदायी बनाये रखने के लिये ज़रूरी है कि विधायिका का संवैधानिक प्रभाव किसी भी प्रकार से कम ना होने पाये।
4. इसके लिये यूपी के विधानमण्डल का लगातार घटते सत्र के साथ-साथ विधानसभा का इतना संक्षिप्त सत्र क्या अपना वास्तविक उद्देश्य हासिल कर पायेगा या फिर केवल औपचारिकता ही रह जायेगी?
5. देश के संविधान व यहाँ लोकतंत्र की मज़बूती तथा अफसरशाही पर लगाम के लिये विधायिका की मज़बूती अति-महत्वपूर्ण और इसके लिये सरकार व विपक्ष दोनों का गंभीर संसदीय आचरण ज़रूरी।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि श्री अशोक सिद्धार्थ, पूर्व सांसद को महाराष्ट्र के चुनाव में खा़सकर पार्टी टिकट के बंटवारे को लेकर बी.एस.पी. महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष आदि के साथ सही से तालमेल करके नहीं चलने की वजह से अनुशासनहीनता व दिशा-निर्देश का उल्लंघन करने पर पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था तथा उन्हें दोबारा पार्टी में इस शर्त के साथ वापस लिया गया था कि वे दोबारा ऐसी ग़लती नहीं करेंगे और साथ ही उन्हें उत्तर प्रदेश में कहीं पर भी नहीं, बल्कि केवल दूसरे राज्यों में ही पार्टी के जनाधार को बढ़ाने की ज़िम्मेदारी दी जायेगी।
2. लेकिन उसके बाद जिन भी राज्यों की ज़िम्मेदारी बी.एस.पी. कोआर्डिनेटर के रूप में उन्हें दी गयी वहाँ इन्होंने अपनी ज़िम्मेदारी को सही से नहीं निभाया। केवल कर्नाटक ही नहीं बल्कि उड़ीसा व पश्चिम बंगाल इन राज्यों से भी इनकी अनुशासनहीनता अर्थात् पार्टी के दिशा-निर्देश के उल्लंघन की ख़बरें लगातार आते रहने के फलस्वरूप इनको बार-बार चेतावनी देने के बावजूद भी इनमें सुधार नहीं आने की वजह से कल श्री अशोक सिद्धार्थ को पार्टी की सभी ज़िम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था।
3. लेकिन इसके बाद यूपी में इनके वापस लौटने की ख़बरें जानबूझकर पार्टी में भ्रम की स्थिति फैलाकर आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव के सघन अभियान को प्रभावित करने का षडयंत्र है। अतः पार्टी व मूवमेन्ट के हित में श्री अशोक सिद्धार्थ को आज तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है और अब इन्हें पार्टी में आगे कतई भी वापिस नहीं लिया जायेगा।
4. इसी प्रकार श्री रणधीर सिंह बेनीवाल (निवासी ज़िला सहारनपुर) को बी.एस.पी. कोआर्डिनेटर के रूप में पंजाब सहित हिमाचल प्रदेश व जम्मू-कशमीर की भी कुछ ज़िम्मेदारी दी गयी थी। उनके विरुद्ध़ भी अनुशासनहीनता व पार्टी दिशा-निर्देश का उल्लंघन करने की ख़बरें लगातार आती रही हैं और अब श्री रणधीर सिंह बेनीवाल को भी पार्टी व मूवमेन्ट के हित के मद्देनज़र आज इनको भी तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।
5. यहाँ यह भी अवगत कराना है कि कल पार्टी संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर किये गये फेरबदल में श्री रामजी गौतम, राज्यसभा सांसद को अन्य राज्यों के साथ ही पंजाब स्टेट का भी पुनः प्रभारी बनाया गया है जो पंजाब के आगामी विधानसभा आमचुनाव तक ही नहीं बल्कि आगामी लोकसभा आमचुनाव तक भी अपनी इस ज़िम्मेदारी को निभाते रहेंगे।
6. इतना ही नहीं बल्कि बी.एस.पी. नेतृत्व का वर्तमान में यह नीतिगत फैसला है कि यूपी निवासी जो भी पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी व कोआर्डिनेटर आदि के रूप में यूपी के बाहर के राज्यों की अपनी ज़िम्मेदारी को निभा रहे हैं, उनमें से किसी को भी यूपी में पार्टी की किसी भी ज़िम्मेदारी पर नहीं लगाया जायेगा।
7. साथ ही, पार्टी के लोगों को ख़ास तौर से यह अपील है कि वे ऐसे सभी शरारती व षडयंत्रकारी तत्वों से पूरी तरह से ज़रूर सावधान रहें जो उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की अपनी बी.एस.पी. सरकार बनाने के पूरे ज़िद के साथ लगे अभियान को किसी ना किसी बहाने से ध्यान भटकाने अर्थात् हानि पहुँचाने का प्रयास करते रहते हैं तथा मीडिया से भी विशेष अपील है कि वे ग़रीबों, दलितों, शोषितों, उपेक्षितों आदि की अम्बेडकरवादी पार्टी बी.एस.पी. के विरुद्ध, विरोधी पार्टियों के षडयंत्र का हथियार बनने से अपने आपको ज़रूर बचायें अर्थात् मिथ्या एवं ग़लत तथ्यों को प्रचारित ना करें।