अंत समय की सबसे बड़ी सच्चाई | हर इंसान को जानना चाहिए | Sant Rampal Ji Satsang
क्या आपने कभी सोचा है कि मृत्यु के समय बहुत से लोग भगवान का नाम क्यों नहीं ले पाते?
इस सत्संग में बताया गया है कि जिस व्यक्ति ने पूरे जीवन सच्ची भक्ति नहीं की, परमात्मा का नाम नहीं जपा और पूर्ण संत से नामदीक्षा नहीं ली, उसके अंतिम समय में यमदूत उसकी वाणी को रोक देते हैं। इसलिए मृत्यु के समय वही याद आता है जिसका अभ्यास पूरे जीवन किया गया हो।
गीता जी के अध्याय 8 के आधार पर समझाया गया है कि अंतिम सांस तक परमात्मा का स्मरण करने वाला साधक ही श्रेष्ठ गति को प्राप्त करता है। इसलिए अभी से सच्ची भक्ति, नाम-स्मरण और सत्संग का अभ्यास करना आवश्यक है।
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@DrGauravGarg4@DrGauravGarg4 Sir, aap aa rahe hain to hum sab students ki taraf se aapka bahut swagat hai 🙏
Please ek timeline bata dijiye aane ka, hum usi hisab se taiyar rahenge. Tab tak hum dusre subjects par focus kar lenge.
Current Affairs aapke naam hai Sir!
#WaitingForGGSir
@DrGauravGarg4
Sir, aapki Current Affairs classes ki quality sach mein lajawab hai! Explanation itna clear aur depth ke saath koi nahi deta.🙏
Aapko ek baar phir se Current Affairs padhane ka anurodh hai. Mere NTPC CBT-2 exam ki taiyari mein aapke bina bahut chinta ho rahi hai.
@SatlokChannel@rakesh12251#रोटीकपड़ा_चिकित्सा_शिक्षामकान
सरई राजपुतानी, भदोही, उत्तर प्रदेश के एक अत्यंत गरीब परिवार के मुखिया को आँखों की गंभीर बीमारी थी। जिसके चलते बड़ी बेटियों को पढ़ाई छोड़कर खेतों में मजदूरी करनी पड़ी। ऐसे में संत रामपाल जी महाराज द्वारा राशन और राहत सामग्री उपलब्ध कराई।
#Durlabh_Darshan_Sant_Ke
दर्शन दुर्लभ संत के, कर लो किस्मत वालों
संत गरीबदास जी ने अमरग्रन्थ साहिब में तत्त्वदर्शी संत के विषय में कहा है:
तत्त्वदर्शी का दर्शन दुर्लभ, तीन लोक कुर्बाना।।
Darshan Karlo Kismat Walo
हरियाणा प्रांत के गांव छुड़ानी, जिला झज्जर मे सन् 1717 मे जन्मे संत गरीबदास जी को परमेश्वर कबीर साहिब जी जिंदा बाबा के रूप मे सतलोक से आकर विक्रमी संवत् 1784, सन् 1727 मे फाल्गुन मास की सुदी द्वादशी को मिले थे। इसीलिए संत गरीबदास जी ने कहा है।
#हरि_आये_हरियाणे_नूं