सफ़र में बहुत से लोग मिलते है कुछ को मंजिल मिल जाती है,तो कुछ का सफर मंजिल से पहले ही ख़त्म हो जाता है, तो कुछ बस् चलते रहते है मंजिल की तलाश में ना मंजिल मिलती है और ना सफऱ खत्म होता है!!
~ad...
राजस्थान सरकार द्वारा चिकित्सा संस्थानों में मरीजों की जांच के लिए अपनाए जा रहे मदर-हब और स्पॉक मॉडल के तहत जांचों का काम प्रदेशभर में एक ही फर्म कृष्णा डायग्नोस्टिक लैब प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था।
अब इस लैब से आ रहीं रिपोर्ट्स रोज़ नए 'चमत्कार' कर रही हैं...कहीं पर रिपोर्ट्स बदल रही रही हैं, तो कहीं जांच के गलत रिजल्ट आ रहे हैं, तो कहीं एक इंसान की एक ही दिन में दो बार करवाई गई एक ही जांच के दो अलग-अलग नतीजे आ रहे हैं।
पिछली कांग्रेस सरकार में जहां राजस्थान का चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मॉडल पूरे देश में सबसे अच्छा और प्रसिद्ध था, वहीं इस 'पर्ची' सरकार ने उस उन्नत मॉडल को गर्त में धकेल दिया है।
@INCIndia@INCRajasthan
वैसे तो पूरे राज्य में ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था के हाल खराब हैं...लेकिन राजस्थान सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्रीजी के 'गृह जिले के अस्पताल', जेएलएन की व्यवस्था तो 'आईसीयू' में है...!! 🤦🏻♂️ @INCIndia@INCRajasthan
प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी,आपका ध्यान राजस्थान राज्य की अत्यंत चिंताजनक एवं बदहाल सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। वर्तमान में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग “वेंटिलेटर” पर है, जहाँ आम जनता को बुनियादी उपचार भी समुचित रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने के बजाय अपने निजी व्यवसायों को बढ़ाने में अधिक ध्यान दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त, एक निजी डायग्नॉस्टिक कंपनी को सरकारी अस्पतालों में लैब जांच का कार्य सौंपा गया है, जो कथित रूप से स्वास्थ्य मंत्री के करीबी व्यक्ति से जुड़ी हुई है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में निजी लैब द्वारा की जा रही कई गंभीर अनियमितताएँ सामने आ रही हैं ,बिना सैंपल जांच किए ही रिपोर्ट जारी की जा रही हैं,स्वस्थ व्यक्तियों को थायराइड एवं कैंसर जैसे गंभीर रोगों से ग्रसित बताया जा रहा है और इन घटनाओं से संबंधित समाचार प्रतिदिन समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रहे हैं। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे-सीधे लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ है, जो आपराधिक श्रेणी में आता है। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp से यह प्रश्न है कि इस निजी लैब को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है? गलत रिपोर्टों के कारण जिन मरीजों के जीवन पर खतरा उत्पन्न हो रहा है, उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? यह मामला केवल जांच का नहीं, बल्कि आपराधिक लापरवाही का है, और राजस्थान की जनता शासन से जवाब मांग रही है। जिस स्वास्थ्य मंत्री से पूरा राजस्थान अपेक्षा रखता है,उनके खुद के गृह जिले नागौर की स्वास्थ्य सेवाएँ भी अत्यंत दयनीय स्थिति में हैं,चिकित्सकों की कमी, खराब एवं बंद मशीनें तथा व्यापक अव्यवस्थाएँ यह दर्शाती हैं कि वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग की स्थिति अत्यंत कमजोर है। सरकारी अस्पतालों के हालत देखते हुए मैं यह कहना चाहता हूं कि राजस्थान को ऐसे नाकारा और गैर जिम्मेदार स्वास्थ्य मंत्री की कोई जरूरत नहीं है जिन्हें अपने महकमे में धरातल से जुड़ी कोई जानकारी तक नहीं है | प्रधानमंत्री जी को इस स्थिति पर त्वरित संज्ञान लेकर एक कड़ा संदेश गैर - जिम्मेदार मंत्रियों को देना चाहिए ताकि राजस्थान में स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण महकमे का जिम्मा संभाल रहे व्यक्ति को कड़ा सबक मिले और जनता को सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर लाभ मिल सकें | सरकार द्वारा लैब से जुड़ा कार्य निजी कंपनी को देने से वर्षों से अल्प वेतन पर कार्य कर रहे संविदा कार्मिकों / प्लेसमेंट कार्मिकों की आजीविका पर भी संकट आ गया | मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा को पुनः कहना चाहता हूं कि आपको विगत दस दिनो में राज्य के विभिन्न जिलों में प्राइवेट लैब को जांचों का कार्य देने से क्या स्थिति बनी ? उसकी उच्च स्तरीय समीक्षा करनी चाहिए क्योंकि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अपनी जवाबदेही के प्रति लापरवाह है और उन्हें इस महकमे से जुड़ी धरातल की कोई जानकारी भी नहीं है |
@PMOIndia@RajCMO
बिना किसी डिग्री/ डिप्लोमा झोलाछाप कर रहे है टेस्टिंग
कृष्णा डायग्नोस्टिक लिमिटेड में लगे कार्मिकों के पास नहीं है शैक्षणिक योग्यता ,, फिर भी कर रहे है कार्य!!!
मरीजों की सेहत से खिलवाड़ का बेहद ही खतरनाक सच जो शायद सरकार एवं सरकारी अधिकारियों के अलावा सबको दिख रहा है
@RajCMO
नागौर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा ठेके पर दिए गए जांचों (टेस्ट्स) के काम में ठेका कंपनी उम्मीद से बढ़कर काम कर रही है...डॉक्टर एक जांच लिख रहे हैं, ठेका कंपनी तीन जांचें कर रही है...!! और यह सब मरीजों की भलाई के लिए नहीं बल्कि सरकार से मोटा बिल वसूलने के लिए किया जा रहा है।
जब पूरा विभाग ही ठेके पर चल रहा हो तो मदर लैब हो या फादर लैब, ठेकेदार तो अपने मुनाफे का ही सोचेगा...!!
@INCIndia@INCRajasthan
@cmo@BhajanlalBjp@DIPRRajasthan@GajendraKhimsar
खांसी में प्रेग्नेंसी की रिपोर्ट देने के बाद
मदर लैब ..
Dr ने 90 Rs की CBC लिखी
मदर लैब में HBA1C, B12, TSH, लगभग 850 की जांचे अपनी तरह से जोड़ दी
ये सरकार को सीधे आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है
क्या इस पर एक्शन होगा?
@cmo@DIPRRajasthan
MNJY जांच व्यवस्था मजबूत थी
जिसमें रोजगार भी था
गुणवत्ता भी थी
किफायती भी थी
हब एंड स्पोक मॉडल से जांच व्यवस्था कमजोर हुई
सरकारी अस्पताल को ही अगर प्राइवेट हाथों में सौंपना कितना जायज है?
@hanumanbeniwal
राजस्थान के स्वास्थ्य संस्थानों में लैब की जांच से जुड़े कार्यों को हब एंड मॉडल के तहत निजी कम्पनियों को देने का निर्णय अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण व जनविरोधी है | यह निर्णय न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करेगा बल्कि मरीजों, मेडिकल छात्रों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए गंभीर संकट खड़ा करेगा | निजी कम्पनियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए ऐसे निर्णय से मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर, इंटर्न, नर्सिंग स्टूडेंट्स और पैरामेडिकल स्टाफ की पढ़ाई और प्रशिक्षण पर सीधा असर पड़ेगा,मरीजों को जांच और इलाज के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा वहीं इमरजेंसी सेवाओं में देरी जानलेवा साबित हो सकती है साथ ही बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने की मजबूरी से आम जनता की तकलीफ बढ़ेगी। उदाहरण के तौर पर बताऊं तो थैलेसीमिया जैसे गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को समय पर जांच और उपचार नहीं मिल पाएगा वहीं वर्षों से अल्प वेतन पर संविदा पर जो लोग कार्य कर रहे थे उन्हें उम्मीद थी कि कभी न कभी सरकार उनके साथ न्याय करेगी और वर्षों की मेहनत का उन्हें सकारात्मक फल मिलेगा मगर सरकार के ऐसे तुगलकी फरमान ने पहले से संविदा पर लगे कार्मिकों के भविष्य पर भी प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया | मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp को कहना चाहता हूं कि ऐसे निर्णय की तत्काल उच्च स्तरीय समीक्षा करके हब एंड मॉडल के तहत निजी कम्पनियों को दिए गए कार्य पर रोक लगाए | चिकित्सा क्षेत्र में ऐसे महत्वपूर्ण कार्य में निजीकरण को बढ़ावा देना प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए शुभ संकेत नहीं है |
@RajCMO
राजस्थान का सुदृढ़ स्वास्थ्य ढांचा आज उपेक्षा का शिकार होकर दरक रहा है।
यह बेहद चिंताजनक है कि हमारी कांग्रेस सरकार द्वारा स्थापित विश्वस्तरीय हेल्थ मॉडल को वर्तमान सरकार धराशाई कर रही है। RGHS के अंतर्गत बकाया भुगतान न होने के कारण एक बार फिर निजी अस्पतालों ने ओपीडी और फार्मेसी सेवाएं रोकने की तैयारी कर ली है, जिससे कर्मचारी और पेंशनर्स अधर में हैं। साथ ही, चिरंजीवी (MAA) योजना को शिथिल कर प्रदेशभर के अस्पतालों में इलाज में देरी और आवश्यक दवाइयों की भारी किल्लत पैदा कर दी गई है।
जयपुर के SMS और जनाना अस्पताल जैसे बड़े केंद्रों में खून की भारी कमी एक बड़ी 'हेल्थ इमरजेंसी' है, जो प्रदेशवासियों के जीवन के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। सरकार को चाहिए कि निजी ब्लड बैंकों पर लगी रोक अविलंब हटाए ताकि मरीजों की समस्याओं का समाधान हो सके।
चाकसू विधानसभा क्षेत्र के 108 साल के बुजुर्ग श्री गोलूराम माली ने मेरे से मिलने की इच्छा जताई जिनसे मैं कल शाम उनके गांव जाकर मिला। वहां इकट्ठा हुए ग्रामीणों ने भी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सहित हर क्षेत्र में रोकी गई योजनाओं को लेकर भाजपा सरकार के प्रति रोष जताया।
जब मैं सोशल मीडिया के माध्यम से जनता की इन बुनियादी समस्याओं को उठाता हूँ, तो मुख्यमंत्री जी समाधान निकालने के बजाय अपने इवेंट्स में मुझ पर व्यक्तिगत कमेंट्स करने में व्यस्त रहते हैं। उन्हें समझना चाहिए कि हम जनता की पीड़ा की आवाज बन रहे हैं, और सरकार को जवाब देने के बजाय धरातल पर बिगड़ते हालात सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।
भाजपा सरकार द्वारा 746 नर्स, 222 लैब टेक्नीशियन समेत 1267 पदों पर नियमित भर्ती के बजाय संविदा भर्ती को स्वीकृति प्रदान करना युवाओं के साथ घोर अन्याय है।
इतना ही नहीं ये भर्ती नियमित पदों को समाप्त कर संविदा पर निकाली गई है, जो सीधे तौर पर नौकरी की सुरक्षा छीनने के साथ लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है।
विपक्ष में रहते भाजपा ने जिस संविदा व्यवस्था का विरोध किया, आज सत्ता में आकर उसी संविदा को लागू कर रही है। जबकि कांग्रेस सरकार ने ठेका प्रथा को बंद कर संविदाकर्मियों के नियमितीकरण के नियम बनाएं थे। 1.10 लाख से अधिक संविदाकर्मियों के नियमितीकरण का रास्ता खोला।
मुख्यमंत्री जी बार-बार लाखों रोजगार देने के दावे करते हैं, लेकिन हकीकत में भाजपा सरकार सिर्फ गिनी-चुनी भर्तियों में नाममात्र के पद और वो भी अस्थायी संविदा पर निकाल रही है।
अगर भाजपा सरकार सच में युवाओं को रोजगार देना चाहती है, तो संविदा की बजाय नियमित भर्ती निकालें। नहीं तो ये सिर्फ वादों का छलावा और युवाओं के साथ विश्वासघात है।
@BhajanlalBjp@DrPremBairwa@KumariDiya @GajendraKhims
राजस्थान में जांचों के निजीकरण का स्वयं चिकित्सक विरोध कर रहे हैं
जांचों की गुणवत्ता खत्म हो रही है
आखिर ऐसी भी क्या मजबूरी कि सरकारी मजबूत जांच व्यवस्था को ठप्प कर खराब निजी व्यवस्था को जबरन लागू किया जा रहा है
राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री निःशुल्क जांच योजना का ज़मीनी हकीकत गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
एक ही मरीज कैलाश देवी मीना की दो अलग-अलग जांच रिपोर्ट और दोनों में आंकड़े अलग। यह सिर्फ एक केस नहीं , बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल है।
अब मुद्दा सिर्फ एक गलती का नहीं है बल्कि
→ क्या लैब में मशीनें ठीक से कैलिब्रेटेड हैं?
→ क्या सैंपल कलेक्शन और स्टोरेज सही तरीके से हो रहा है?
→ क्या टेक्नीशियन प्रशिक्षित और योग्य हैं?
→ क्या रिपोर्टिंग सिस्टम में कोई डेटा मैनिपुलेशन या लापरवाही है?
→ एक ही कंपनी को ठेका देने से क्या मोनोपॉली और जवाबदेही की कमी नहीं बढ़ रही?
अब सवाल डायग्नोसिस ही संदिग्ध होगा, तो इलाज भी गलत होगा और इसका सीधा असर मरीज की जान पर पड़ता है।
लोग सिर्फ टेक्नीशियन की कमी नहीं, बल्कि पूरे मॉडल पर सवाल उठा रहे हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्था में ऐसी गड़बड़ी कोई छोटी लापरवाही नहीं, यह सीधा जनस्वास्थ्य का खतरा है।
@BhajanlalBjp@RajCMO@KumariDiya@GajendraKhimsar@DrPremBairwa
माननीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग एक अति संवेदनशील विभाग है
जनता का जांचकार्य MNJY में गुणवत्तापूर्ण है
लेकिन सरकारी लैबों का जांच कार्य निजीकरण के बाद खराब हैं
जनता नाराज
युवा परेशान
सरकार पर अतिरिक्त भार
@officialRGHS निजी हॉस्पिटल में अब rghs opd की स्लिप के लिए स्टाफ आनाकानी करता ह कार्ड no बताने पर भी फिजिकल कार्ड मगाते फिर ओरिजनल आधार कार्ड जमा कर लेते ही फोटो कॉफी हो तो स्लिप नही बनाते जब dr को दिखाने के बाद कार्ड मगाते तो कार्ड देने में टाइम लगते है कभी कभी तो ओरिजनल आधार देते भी नही
@officialRGHS निजी हॉस्पिटल में अब rghs opd की स्लिप के लिए स्टाफ आनाकानी करता ह कार्ड no बताने पर भी फिजिकल कार्ड मगाते फिर ओरिजनल आधार कार्ड जमा कर लेते ही फोटो कॉफी हो तो स्लिप नही बनाते जब dr को दिखाने के बाद कार्ड मगाते तो कार्ड देने में टाइम लगते है कभी कभी तो ओरिजनल आधार देते भी नही