महाराष्ट्र में ₹1800 करोड़ की सरकारी ज़मीन, जो दलितों के लिए आरक्षित थी, सिर्फ़ ₹300 करोड़ में मंत्री जी के बेटे की कंपनी को बेच दी गई।
ऊपर से स्टाम्प ड्यूटी भी हटा दी गई - मतलब एक तो लूट, और उसपर कानूनी मुहर में भी छूट!
ये है ‘ज़मीन चोरी’, उस सरकार की, जो खुद ‘वोट चोरी’ से बनी है। उन्हें पता है, चाहे जितना भी लूटें, वोट चोरी कर फिर सत्ता में लौट आएंगे।
न लोकतंत्र की परवाह, न जनता की, न दलितों के अधिकार की।
मोदी जी, आपकी चुप्पी बहुत कुछ कहती है -
क्या आप इसीलिए खामोश हैं क्योंकि आपकी सरकार उन्हीं लुटेरों पर टिकी है जो दलितों और वंचितों का हक़ हड़पते हैं?
कोल्हापुर मधील एका हॉस्टेलमध्ये रॅगिंग,बेल्ट,बॅट,दांडक्यांनी मारहाण
हे होस्टेल बंद करून टाका नाहीतर ही गुंड कारटी एखाद्याचा जिव घेतील हाजो कोणी बॅट डोक्यात मारत आहे त्याला मरेपर्यंत कारावास झाला पाहिजे
कारण बॅटच्या माराने डोक्याची कवटी फुटते मेंदू बाहेर येऊन जीव जाऊ शकतो😡☹️
अजित पवारांना फ़ोन करणारे हेच ते तालुका प्रमुख बाबाराजे जगताप आहेत का?
ह्यांच्या हातात काय आहे ?
अश्या लोकांसाठी अजित पवारानी IPS अधिकारी अंजना कृष्णा यांना धमकावले?
आज जब हम चुनाव आयोग से मिलने जा रहे थे, INDIA गठबंधन के सभी सांसदों को रोका गया और हिरासत में ले लिया गया।
वोट चोरी की सच्चाई अब देश के सामने है।
यह लड़ाई राजनीतिक नहीं - यह लोकतंत्र, संविधान और ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के अधिकार की रक्षा की लड़ाई है।
एकजुट विपक्ष और देश का हर मतदाता मांग करता है: साफ़-सुथरी वोटर लिस्ट।
और, ये हक़ हम हर हाल में लेकर रहेंगे।