किस्मत की बाजियों पर इख्तियार नहीं है,
सब कुछ है जिंदगी में मगर प्यार नहीं है,
कोई था जिसको याद करके गा रहे है हम,
आँखों में किसी का अब इंतजार नहीं है !!
मैं उसकी दूसरी पसंद होकर भी खुद को खुशनसीब समझता वो जैसे चाहे मुझे अपनी ज़िंदगी में रखता अब तो इस अजियत की भी आदत सी हो गई है लेकिन वो एक बार झूठ ही मुझे अपना कहती तो मैं उसे अपना खुदा कहता सर पे ताज की चाहत नही मुझको मेरी कीमत बढ़ जाती अगर मैं अपने खुदा के कदमों में भी पड़े रहता
उसे तुम से मोहब्बत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना
ये बस दिल की शरारत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना
तुम्ही को देख कर वो मुस्कुराता है तो हैरत क्या
उसे हँसने की आदत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना
मैं तुझ को चाहता हूँ बात ये सच है मगर फिर भी
मुझे तेरी जरूरत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना
– आदिल राही
उनकी सोहबत में गए, सम्हले, दोबारा टूटे,
हम किसी शख्स को दे दे के सहारा टूटे..
ये अजब रस्म है, बिल्कुल न समझ आयी हमें,
प्यार भी हम ही करें, दिल भी हमारा टूटे!!
🖤🖤
सोचो अगर वो काजल लगा ले एक दफा बस उलझे बाल सुलझा ले ये ज़माना अपना रुख ना बदल दे हर कोई उसके साथ ना चल दे ये हवाएँ रुक ना जाए उसे देखने को कहीं मैंने जब से देखा है मैं हूँ वहीं.
एक शख्स को शामिल खुद में करने का इरादा कर बैठे थे,
जितनी मोहब्बत बस की थी,हम उससे ज्यादा कर बैठे थे,
पलट क्यों ना जाती छोड़कर मुझको एक सहजादे के खातिर,
वो शतरंज इश्क में उसको रानी खुद को प्यादा कर बैठे थे,
हम तुम्हारे ग़म से बाहर आ गए
हिज्र से बचने के मंतर आ गए
मैं ने तुम को अंदर आने का कहा
तुम तो मेरे दिल के अंदर आ गए
एक ही औरत को दुनिया मानकर
इतना घुमा हूँ कि चक्कर आ गए
इम्तिहान-ए-इश्क़ मुश्किल था मगर
नक़्ल कर के अच्छे नंबर आ गए।
और एक दिन सब कुछ थम जाएगा.
अरमान, ख्वाहिशें, उलझनें, बेकरारियां,सब धीरे-धीरे धुंधला पड़ जाएंगी।
न कोई उम्मीद बाकी रहेगी,न कोई शिकवा.
बस एक गहरी खामोशी होगी, जिसमें न आवाज़ का असर होगा,न यादों की हलचल.
शून्यता सब समेट लेगी अपने अंधेरे में,और हम बस एक बीते वक़्त की कहानी बन जाएंगे।
पेड़
पत्तियों से नहीं,
जड़ों से हरे होते हैं।
जिन पेड़ों को यह बात समझ आ जाती है,
वे पतझड़ में भी नहीं सूखते।
पतझड़
सिर्फ एक संकेत है
कि वसंत फिर लौटेगा।
यादें
हमेशा सदाबहार होती हैं,
न उन्हें कोई पतझड़ छू सकता है,
न ही किसी वसंत की ज़रूरत होती है।
उनकी सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे,
हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे।
ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें,
प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे।