ये कौन-सी मिसाल बनाने में लगा है,
गाँधी के रास्तों को बचाने में लगा ��ै…
“गद्दार” कह रही है उसे ये हुकूमत,
लेकिन सच ये है —
वो तो जेल में भी बच्चों को पढ़ाने में लगा है!
जिसे सत्ता अपराधी दिखा रही है,
वो समाज को शिक्षित करने में लगा है।
जिसे वे देशद्रोही बताते थकते नहीं,
वो संविधान और समा��ता की लौ जलाए खड़ा है।
आज सच बोलने वाला कैद है…
और झूठ फैलाने वाले सत्ता पर काबिज!
इतिहास गवाह है—
सच्चाई को कैद किया जा सकता है, हराया नहीं जा सकता। ✊🔥
@Wangchuk66
ओबीसी चीफ मिनिस्टर @DrMohanYadav51 27% ओबीसी आरक्षण को नहीं सुलझाना चाहते हैं?
आख़िर आप ही देख लीजिए कितनी बार डेट बदली जा रही है. डेट आती है फिर गायब हो जाती है, आखिर @BJP4MP@RSSorg ऐसा क्यों कर रही है? पिछड़े वर्ग के नाम पर गाल बजाना बंद कीजिए.
आप देख सकते है, कौन भाग रहा हैं, बेईमान लोगो को पता है पिछड़े का पक्ष मजबूत है. इसलिए डेट और लेट करने ,कराने का खेल चल रहा?
आखिरकार पिछड़े वर्ग को कोर्ट के नाम ���र कब तक गुमराह किया जाएगा?
आख़िर कब तक ?
#ओबीसी_विरोधी_महाधिवक्ता_प्रशांत_सिंह
#OBC_13_प्रतिशत_पद_अनहोल्ड_करे_सरकार
#18_मई_भोपाल_चलो
50% की सीलिंग को सुप्रीम कोर्ट ने ब्रेक कर दिया है.
देश मे ओबीसी आरक्षण 27% से बढाकर 52% करने की बात चल रही है.
लेकिन इसके उलट मध्य प्रदेश में @BJP4MP राज में ओबीसी ��ो 27% की जगह 14% रिजर्वेशन दिया जा रहा है.
@DrMohanYadav51 जी अगर पिछड़ों का भला चाहते है तो 27% ओबीसी आरक्षण तुरंत लागू करें.
ओबीसी के नाम पर सिर्फ गाल बजाने से काम नहीं चलने वाला है.
#ओबीसी_विरोधी_महाधिवक्ता_प्रशांत_सिंह
#OBC_13_प्रतिशत_पद_अनहोल्ड_करे_सरकार
The Advocate General, and advocate general office of the Madhya Pradesh regularly trying to turn off the reservation in favour of OBC SC and ST by Misusing process of law and given incorrect legal opinion which is completely in consistent with the well settled la and breakdown the constitution in the state
मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था का क्या हाल है 27% ओबीसी आरक्षण पर ��भी तक कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं मुख्यमंत्री जी क्या मतलब ऐसे ओबीसी के लॉलीपॉप वाले मुख्यमंत्री जी का
जबकि सुप्रीम कोर्ट से भी बोल दिया है क्या कोई रोक न थी ना है @baagi_kamlendra @CMMadhyaPradesh @DrMohanYadav51
मध्य प्रदेश सरकार का आरक्षण तथा बहुजन विरोधी चेहरा फिर हुआ उजागर
👉सुप्रीम कोर्ट, के रेखांकित मार्गदर्शी आदेशों के अनुरूप हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेशों के विरूध दायर SLP पर मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार, वेलरीजेंन्ट आदेशों का करे पालन,अपील ���ी ख़ारिज !
👉आरक्षित वर्ग के प्रतिभावान अभ्यर्थियों की आरक्षण नियमो के विरूध की गईं पदस्थापना को उनकी पसंद के अनुरूप पोस्टिंग करने वाले हाईकोर्ट की डिवीजन बैच के आदेश की सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर,मध्य प्रदेश सरकार की अपील ख़ारिज !
👉हाईकोर्ट के संवैधानिक फैसलों के विरूध सुप्रीम कोर्ट में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा दाखिल SLP (c) 11888/2025 फटकार लगाकर की ख़ारिज !
👉मध्य प्रदेश सरकार का आरक्षण विरोधी रवैया एक वार फिर हुआ उजागर !
👉डीपीआई कमिश्नर श्री मति शिल्पा गुप्ता ने गिरफ़्तारी से बचने,हाईकोर्ट के उचित फैसलों के विरूध शासन के खर्चें पर सुप्रीम कोर्ट में कराई गईं कई अपीले जिनमे से एक हुई ख़ारिज !
👉डीपीआई द्वारा, हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेला के, दो सैकड़ा से अधिक अवमामना के मामले हाईकोर्ट में है विचाराधीन !
👉महाधिवक्ता कार्यालय एवं सरकार आरक्षण से सम्वधित हाईकोर्ट के फैसलों को नहीं कर रही कंप्लायंस !
👉23 अक्टूबर 2024 को हाईकोर्ट की डिवीजन बैच ने डीपीआई को एक माह के अंदर आरक्षित वर्ग के प्रतिभावान् अभ्यर्थियों को ट्रायबल से डीपीआई में पदस्थापना के दिए थे आदेश!
👉हाईकोर्ट आदेश की कंप्लायंस न करने पर शिल्पा गुप्ता को गिरफ्तारी व��रंट जारी करने के दिए आदेश तब 5 माह बाद सुप्रीम कोर्ट में 48 घंटो के अंदर दाखिल कर दी गई कई अपीले !
👉जबलपुर 26/4/2025:- मध्य प्रदेश शासन द्वारा आरक्षण से संबं��ित हाई कोर्ट द्वारा पारित आदेशों की निर्धारित समय सीमा में कंप्लायंस नहीं की जा रही है ज़ब सम्वधित याचिका कर्ताओ द्वारा अवमानना की कार्यवाही हाईकोर्ट में दाखिल की जाती है, तब मध्य प्रदेश सरकार कुंभकरनी नींद से जागकर, सुप्रीम कोर्ट में अपीले दाखिल कर देती है! ठीक इसी प्रकार का मामला है, डीपीआई एवं ट्राइबल विभाग का दोनों विभागों द्वारा संयुक्त काउंसलिंग कर प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्तिय��ं- 2023 से 10 अगस्त 2024 तक की गई है जिनमे, हजारों की संख्या में आरक्षित वर्ग के प्रतिभावान अभ्यर्थियों को अनारक्षित वर्ग में, उनकी पसंद के अनुरूप पदस्थापना नही की गईं ! बल्कि उनके निवास स्थान से सैकड़ो किलोमीटर दूर जनजाति कार्य विभाग की शालाओं में कर दी गई , जबकि उनसे कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों की पदस्थापना डीपीआई द्वारा उनके गृह जिले में की गई, इस मुद्दे को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सर्���प्रथम वरिष्ठ अधिवक्ता श्री ठाकुर द्वारा सैकड़ो अभ्यर्थियों की ओर से याचिकाए दाखिल कर चुनौती दी गई ! उक्त याचिकाओं की विस्त���त सुनवाई करते हुए माननीय हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा सभी याचिकाए एलाऊ की गईं तथा डीपीआई कमिश्नर को स्पष्ट निर्देश दिए गए की आदेश दिनांक 23 अक्टूबर 2024 से 30 दिवस के भीतर याचिकर्ताओं की पदस्थापना उनकी पसंद के अनुसार डीपीआई द्वारा संचालित शालाओं में की जाए, और यदि अभ्यर्थियों द्वारा चयनित शाला में पद रिक्त नहीं है, तो उनके पसंद के जिले की किसी भी शाला में पदस्थापना की जाए ! लेकिन डीपीआई कमिश्नर शिल्पा गुप्ता द्वारा 3 माह के भीतर भी कोई कार्यवाही नहीं की गई, तब हाई कोर्ट में डीपीआई कमिश्नर श्रीमती शिल्पा गुप्ता के विरुद्ध कई अवमानना याचिकाएं दाखिल की गई जिनमे नोटिस जारी होने के बावजूद भी शिल्पा गुप्ता ने, हाई कोर्ट में कोई कंप्लायंस रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की, तब हाई कोर्ट ने मजबूरन शिल्पा गुप्ता को गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश दिए गए, तब उक्त वारंट की तामीली से बचने तथा अवमा��ना दिनांक 24/3/25 के पूर्व ही श्रीमती शिल्पा गुप्ता द्वारा मध्य प्रदेश शासन के खर्चे पर पब्लिक फंड से सुप्रीम कोर्ट में 48 घंटे के अंदर, कई अपीले दाखिल करवा दी गई ! उक्त अपीलों में से एक अपील क्रमांक SLP (C) 11888/2025 की सुनवाई, दिनांक 25 अप्रैल 2025 को माननीय न्यायमूर्ति श्री सुधांशु धूलिया ए��ं न्यायमूर्ति के.विनोद चंद्रन की खंडपीठ द्वारा की गई उक्त खंडपीठ द्वारा हाईकोर्ट के आदेशों का अवलोकन कर पाया, कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उक्त आदेश जिनके विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन सहित शिक्षा विभाग एवं कमिश्नर डीपीआई द्वारा अपील दाखिल की गई है जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में पारित निर्णयों के अनुरूप हैतथा उक्त आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ के प्रकरण में नौ जजों की संवैधानिक पीठ द्वारा पारित मार्गदर्शी सिद्धांतों पर आधारित है,सुप्रीम कोर्ट द्वारा फटकार लगाते हुए अपील खारिज कर दी गई!
18 मई भोपाल चलो
मप्र के ओबीसी के समस्त जातिगत संगठन अपनी ताकत को पहचानो आपकी जाति के बच्चे बेरोजगार सड़को पर घूम रहे है!
13% ओबीसी होल्ड अभ्यर्थियों की नियुक्तियां सरकार ने जानबूझकर रोक कर रखी है!नोकरी से वंचित कर रखा है! उ��ो जागो ओर हक अधिकार लेकर रहो!
@DrMohanYadav51 @BJP4MP
#18_मई_भोपाल_चलो
18 मई 2025 दिन रविवार को ओबीसी महासभा द्वारा ओबीसी होल्ड अभ्यर्थियों की नियुक्तियां के लिए मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में धरना प्रदर्शन.
@DrMohanYadav51 सरकार ने असंवैधानिक रूप से 13% ओबीसी होल्ड अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रोक कर रखी है. @OfficeOfKNath@BJP4MP
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण पर संवैधानिक संकट', जीतू पटवारी ने की राष्ट्रपति शासन की मांग.
मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग को 27% आरक्षण न दिए जाने पर ओबीसी नाराज है.
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार पर संविधान की अवहेलना का आरोप लगाते हुए राष्ट्रपति से प्रदेश में तत्काल राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की है. पटवारी ने कहा कि बीजेपी सरकार ओबीसी वर्ग के अधिकारों का हनन कर रही है और विधायिका द्वारा पारित कानून को लागू करने में विफल रही है, जो एक गंभीर संवैधानिक संकट है.
जीतू पटवारी ने बताया कि वर्ष 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने ओबीसी आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% करने के लिए अध्यादेश जारी किया था.
पटवारी ने स्पष्ट किया कि यह कानून आज तक किसी भी अदालत द्वारा निरस्त नहीं किया गया है और न ही इस पर कोई स्थगन आदेश (स्टे) लागू है. फिर भी राज्य सरकार इसे मनमाने ढंग से लागू कर रही है, कभी 14 प्रतिशत और कभी 27 प्रतिशत, सरकार पर नियुक्ति में भेदभाव का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने जिन विभागों में 27 प्रतिशत आरक्षण के तहत चयन प्रक्रिया पूरी कर ली, वहां भी अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र नहीं दिए गए. उन्होंने बताया कि कई उम्मीदवार बीते चार से पांच सालों से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं. इसके अलावा जनवरी 2025 में शिक्षक भर्ती के लिए मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा जारी विज्ञापन में भी केवल 14 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का उल्लेख किया गया है, जो कि विधानसभा द्वारा पारित कानून का खुला उल्लंघन है.
संविधान की भावना के खिलाफ कार्य कर रही सरकार: पटवारी
जीतू पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य की कार्यपालिका संविधान की मूल भावना और कानून का उल्लंघन कर रही है. उन्होंने बताया कि स्वयं राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में स्वी��ार किया है कि मध्य प्रदेश में ओबीसी की जनसंख्या 50 प्रतिशत से अधिक है. इसके बावजूद सरकार ओबीसी समाज को उनके हक से वंचित रखे हुए हैं.
राष्ट्रपति शासन की मांग और कांग्रेस का एला��
पटवारी ने इस पूरे प्रकरण को संवैधानिक संकट करार देते हुए महामहिम राष्ट्रपति से अपील की है कि मध्य प्रदेश में तत्काल राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए. उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार चुनावों के समय ओबीसी समाज को बहलाने के लिए बड़े वादे करती है, लेकिन हकीकत में उनके अधिकारों को कुचलने का काम कर रही है. कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ओबीसी वर्ग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और उनके हक की लड़ाई को सड़क से लेकर संसद तक लड़ा जाएगा.