तुम एक पार्टी के चाहने वाले हो,
रामभक्त होते तो मंदिर में चोरी पर बोलते।
राष्ट्र प्रेमी होते तो जवानो सेना की शहादत पर बोलते।
गौ प्रेमी होते तो गौ माता के सम्मान में बोलते।
शिक्षा प्रेमी होते तो पेपर लीक पर बोलते।
विज्ञान प्रेमी होते तो ISRO के 100 वैज्ञानिक इस्तीफे पर बोलते।
किसान प्रेमी होते तो MSP, खाद,बीज और फ्री सिंचाई पर बोलते।
तुम एक पार्टी के चाहने वाले अंधभक्त हो !
अवाम की आवाज़ लंबे समय तक डर और दमन के साये में दबाई गई।
लेकिन अब वही आवाज़ फिर उठ रही है, गूंज रही है।
जब लोग डरना छोड़ देते हैं, तब सत्ता को जवाब देना पड़ता है।
आज सोनम वांगचुक के समर्थन में उठती आवाज़ें सिर्फ़ एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के लिए हैं।
ज़िंदा वही समाज होता है, जो अन्याय के सामने खामोश नहीं रहता।
#SonamWangchuk #जाट_समाज
सोनम वांगचुक जी आपकी इस लड़ाई में हम आपके साथ हैं , जो सच का साथ दे और गलत के खिलाफ लड़ सकें उसे को तो जाट कहते हैं और मुझे विश्वास हैं की मेरी जाट कोम आपका साथ जरुर देगी ।
हाँसी हिसार का चैनत गाँव आज तक पानी के लिए लड़ रहा हैं और दूसरी तरफ युवाओं और शिक्षा के लिए सोनम वांगचुक जी लेकिन वह समाज के कलाकार हमेशा की तरह आज भी खामोश हैं जो अपने गीतों में समाज की ज़िम्मेदारी की बातें करते हैं ।
जाट समाज हरियाणा
गांव में रहने वाली मेरी जाट कौम को अब गांव छोड़कर शहरों और विदेशों की तरफ जाना होगा, और कर दिखाना होगा अपनी मेहनत से और भी उच्च नाम ..
खेल वह देश रक्षा में अव्वल दर्जे पर हो आप अब व्यापार में आना होगा ।
समाज का संगठन चलाने वाले नेतृत्व को राजनैतिक नेतृत्व के खिलाफ टीका टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।लेकिन यहां राजाराम जी मील हमेशा चूक कर जाते है।
विधानसभा चुनाव के दौरान गोविंदसिंह जी डोटासरा को हराने के लिए बयान दे रहे थे तो लोकसभा चुनाव में हनुमान जी बेनीवाल के खिलाफ टीका-टिप्पणी कर रहे थे।
सामाजिक नेतृत्व को हर पार्टी,विचारधारा वाले राजनैतिक नेतृत्व बराबर सम्मान करना चाहिए।राजाराम जी सत्ता परिवर्तन की आहट के साथ क्यों बदलने लग जाते है उस पर काफी जानकारियां एकत्रित की है।
पहला कारण तो उनका बिजनेस है जो हर पार्टी की सरकार में चलाना है इसलिए सत्ता में आने वाली पार्टी के साथ हो जाते है।दूसरा कारण इनके इर्द-गिर्द की मंडली है जो पूरे दिन इनके साथ रहकर उकसाती रहती है।
हनुमान जी के खिलाफ जो अभी टिक्का-टिप्पणियां की है वो दावे के साथ कह सकते हैं कि यह राजाराम जी के दिमाग की उपज नहीं है।मंडली के माध्यम से संघ के लोगों ने यह ज्ञान घुसाया है।
हनुमान जी जिस तरह उपचुनाव में हराया गया था यह उससे अगली कड़ी है।कांग्रेस के नेताओं के साथ जिस तरह से हनुमान जी की अनबन है व गहलोत हाशिए पर जा रहे है उसके हिसाब से आगे कांग्रेस के साथ गठबंधन संभव नहीं होगा।
यही डर बीजेपी के नेताओं को सता रहा है कि कहीं हनुमानजी बीजेपी के साथ गठबंधन न कर लें इसलिए पहले ही हनुमान जी उस स्तर पर ले आओ कि बाद में कह सके कि इनके पास कुछ नहीं है।यह खेल राजाराम जी को आगे करके खेला जा रहा है।
समाज के युवाओं को समझना चाहिए कि हमारे लिए हनुमान जी मजबूत राजनेता के रूप में क्यों जरूरी है। कांग्रेस व बीजेपी में जाटों को प्रतिनिधित्व हनुमान जी के डर से ज्यादा मिला हुआ है व इन पार्टियों के जाट नेता भी समाज की बातें करते थे अन्यथा आज मुँह भी नहीं खोलते।
हनुमान जी के साथ युवाओं की फौज है लेकिन उसको उस हिसाब से वोटों में तब्दील नहीं कर पाते है उनके तीन प्रमुख कारण है-
1. पार्टी की मजबूत कार्यकारिणी का अभाव
2. सामाजिक संगठनों के साथ सामंजस्य का अभाव
3. बुद्धिजीवी तबके की बेरुखी/ विमर्श से बेरुखी
इन तीन कारणों पर हनुमान जी को भी मंथन करना होगा।डरा धमकाकर वफ़ा करवाने के दौर से बाहर निकलकर इन पर ईमानदारी से रचनात्मक रुख अख्तियार करना होगा।
अंतर्जातीय विवाह के हम कल भी खिलाफ थे व आज भी खिलाफ है।
#जाट_समाज
जाट महासभा के अध्यक्ष बने बैठे हैं, काम इनका नस्ल खत्म करने का है। तो समाज का सुधार कहाँ से करेंगे?
अपने घर परिवार में अंतर्जातीय ब्याह का इन्होंने इतना खुल के सपोर्ट किया की अपना नाश कर पाप का घड़ा तो भरा ही भरा, अब जनाब समाज की नस्ल का नाश करना चाहते हैं।
कोई कुछ कह दो तो इन्हें तकलीफ़ होती है।
ऐसे मानस को अध्यक्षता से हटाओ, और साथ ही राजस्थान की समस्त जाट सरदारी से अनुरोध है, कि ऐसे लोगो से बचें और अपनी नस्ल को बचा लो।
@R_Palsaniya @hanumanbeniwal
#जाट_समाज
अरावली सिर्फ पहाड़ी नहीं हैं , ये हमारी सांसों की ढाल हैं , अगर आज हम इसको एक क्षेत्र की लड़ाई में बदलेंगे तो एक बड़ा नुक़सान पूरे देश को होगा ।
#SaveAravalli#NatureProtection#GreenIndia
समाज को तोड़ने की पूरी तैयारी चल रही है , सफीदों हलके में पंचायतें कर रहे हैं, लेकिन इन बेवकूफों को कौन समझाएगा की तुम अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने का काम कर रहें हो ।
भाई दलजीत सिहाग ने जो लड़ाई लड़ी है समाज के लिए मुझे नहीं लगता इतनी त्याग भावना से कोई लड़ाई लड़ सकेगा मिलकर साथ देना हम सबका फ़र्ज़ है । - जाट समाज हरियाणा
पाखंड की आग ने जब हर धर्म जला दिया जब एक कलाकार की कलम ते निकले कुछ शब्द ही उस आग ने बुझाने का काम कर सके हैं - पाखंडी इब सदमे में हैं - Dhanda भाई स्वाद आगया सुण के vomit in paper